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GS-II

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Practice Test-2

Question
54 out of 80
 

 

निम्नलिखित दो गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए।

पिछले 65 से ज्यादा वर्षों में भारत अपनी सभी विशेषताओं के साथ एक कार्यशील लोकतंत्र के रूप में जीवित रहा है। एक ऐसे देश में जहाँ 1 अरब से अधिक लोग अनेकों विभिन्न भाषाएँ बोलते हैं, ऐसा होना एक चमत्कार के समान है। वे दिन अब चले गये जब भारत को संपेरों और हाथियों का देश कहा जाता था। देश प्रत्यक्ष रूप से समृद्ध हुआ है। जनसंख्या वृद्धि के बावजूद पिछले 15 वर्षों में हर एक वर्ष में प्रति व्यक्ति आय पहले से कही अधिक बढ़ी है। तकनीकी मोर्चे पर भारत अपने स्वयं के उपग्रहों को प्रक्षेपित कर रहा है और हाल ही में उसने चंद्रमा पर एक अत्याधुनिक अंतरिक्षयान चंद्रयान को भेजा है।

भौगोलिक विस्तार के संदर्भ में भारतीय गणतंत्र दुनिया का साँतवा सबसे बड़ा देश है। यहां एक सिरे पर उत्तर में बर्फ से ढकी हिमाचल की पहाड़ियाँ हैं तो दक्षिण में हरित तटीय केरल भी हैं। उत्तर-पूर्व में सात बहनों के वर्षाप्रधान वन हैं और पश्चिमी छोर पर राजस्थान की झुलसाने वाली रेत भी है। समकालीन भारत की एक सबसे महत्वपूर्ण विरासत यह है कि यह विश्व का सबसे बड़ा संसदीय लोकतंत्र है। इसके बावजूद यह जटिल नौकरशाही, भ्रष्टाचार और समाज में संचित तथा वंचित वर्ग के बीच विभाजन से अभी दबा हुआ है।


निम्नलिखित में से क्या लेखक के उद्देश्य के रूप में माना जा सकता है?



A तार्किक

B आलोचनात्मक

C उत्साहित

D चिन्तित

Ans. D

Practice Test-2 Flashcard List

80 flashcards
1)
निम्नलिखित तीनों गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए। मूल्य नियंत्रण से कुछ विकृतियाँ उत्पन्न होती हैं। वस्तु के मूल्य में कमी करने से अमीर और गरीब दोनों को सब्सिडी मिलती है। डीजल या उर्वरकों के कम मूल्य का मतलब है कि बड़े कार मालिकों और बडे किसानों को भी लाभ होगा। यदि दोहरा मूल्य (गरीब के लिए कम और अमीर के लिए अधिक) रखा जाता है कि लालफीताशाही (अफसरशाही), धोखाधड़ी के अवसर और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। उदाहरण के लिए, सार्वजनिक वितरण प्रणाली युक्त दुकानो पर गरीबों को अक्सर नजरंअदाज कर दिया जाता है या फिर मिलावटी अनाज दिया जाता है। उपभोक्ताओं के लिए सरकार द्वारा मूल्य कम रखे जाने में एक और समस्या यह है कि इन चीजों का उत्पादन करने वाली फर्में घाटे में चली जाएंगी- तब सरकार को इन्हें बनाए रखने के लिए आर्थिक छूट देनी होगी। ऐसे में इन फर्मों की कुशल उत्पादन की चाह खत्म हो जाएगी क्योंकि उन्हें पता होगा कि आखिर में सरकार उनके घाटे की पूर्ति कर देगी। इसके अलावा, मूल्य उपभोक्ताओं (कम या अधिक उपभोग के लिए) और उत्पादकों (कम या अधिक उत्पादन के लिए) के लिए संकेत होते हैं। जब वस्तु की कमी होती है तो मूल्य बढ़ते हैं और जब भरमार होती है तो घट जाते हैं। यदि मूल्य नियंत्रित हो जाते हैं तो इन संकेतों के लिए कोई स्थान नहीं रह जाता। डीजल का ही उदाहरण लें। यदि मूल्यों को बाजार (अंतर्राष्ट्रीय) पर छोड़ दिया जाए तो प्रतिक्रिया स्वरूप डीजल के दाम बढ़ जाएंगे। सामान्य जनता डीजल का उपयोग किफायत से करेगी और मांग घट जायेगी (जैसा कि कमी के समय होना चाहिए)। भारत में यह यदा-कदा ही होता है क्योंकि कई ईंधनों और ऊर्जा संसाधनों के क्षेत्र में लागत में वृद्धि और माल की कमी के संकेतों को उपभोक्ताओं तक पहुँचने ही नही दिया जाता। गद्यांश से क्या निष्कर्ष निकलता है? (i) बड़ी कारों में, सामान्यतया ईंधन के रूप में डीजल का उपयोग होता है। (ii) गरीब लोग अपनी मूलभूत खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति हमेशा सार्वजनिक वितरण प्रणाली दुकानों से करते हैं। (iii) जिन फर्मों को आर्थिक छूट (सब्सिडी) दी जाती है वे उत्पादन में अकुशल हैं। कूट- A (i) और (ii) B (i) और (iii) C केवल (ii) D इनमें से कोई नहीं
2)
निम्नलिखित तीनों गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए। मूल्य नियंत्रण से कुछ विकृतियाँ उत्पन्न होती हैं। वस्तु के मूल्य में कमी करने से अमीर और गरीब दोनों को सब्सिडी मिलती है। डीजल या उर्वरकों के कम मूल्य का मतलब है कि बड़े कार मालिकों और बडे किसानों को भी लाभ होगा। यदि दोहरा मूल्य (गरीब के लिए कम और अमीर के लिए अधिक) रखा जाता है कि लालफीताशाही (अफसरशाही), धोखाधड़ी के अवसर और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। उदाहरण के लिए, सार्वजनिक वितरण प्रणाली युक्त दुकानो पर गरीबों को अक्सर नजरंअदाज कर दिया जाता है या फिर मिलावटी अनाज दिया जाता है। उपभोक्ताओं के लिए सरकार द्वारा मूल्य कम रखे जाने में एक और समस्या यह है कि इन चीजों का उत्पादन करने वाली फर्में घाटे में चली जाएंगी- तब सरकार को इन्हें बनाए रखने के लिए आर्थिक छूट देनी होगी। ऐसे में इन फर्मों की कुशल उत्पादन की चाह खत्म हो जाएगी क्योंकि उन्हें पता होगा कि आखिर में सरकार उनके घाटे की पूर्ति कर देगी। इसके अलावा, मूल्य उपभोक्ताओं (कम या अधिक उपभोग के लिए) और उत्पादकों (कम या अधिक उत्पादन के लिए) के लिए संकेत होते हैं। जब वस्तु की कमी होती है तो मूल्य बढ़ते हैं और जब भरमार होती है तो घट जाते हैं। यदि मूल्य नियंत्रित हो जाते हैं तो इन संकेतों के लिए कोई स्थान नहीं रह जाता। डीजल का ही उदाहरण लें। यदि मूल्यों को बाजार (अंतर्राष्ट्रीय) पर छोड़ दिया जाए तो प्रतिक्रिया स्वरूप डीजल के दाम बढ़ जाएंगे। सामान्य जनता डीजल का उपयोग किफायत से करेगी और मांग घट जायेगी (जैसा कि कमी के समय होना चाहिए)। भारत में यह यदा-कदा ही होता है क्योंकि कई ईंधनों और ऊर्जा संसाधनों के क्षेत्र में लागत में वृद्धि और माल की कमी के संकेतों को उपभोक्ताओं तक पहुँचने ही नही दिया जाता। कौन-से कथन असत्य है/हैं? (i) सरकार को गरीबों को खाद्य पदार्थों और ईंधन पर सब्सिडी देनी चाहिए। (ii) मुक्त बाजार प्रणाली से उपभोक्ता वस्तुओं का मूल्य तय होना चाहिए। (iii) जिन फर्मों को अपना माल सरकार द्वारा तय मूल्यों (कम मूल्य) पर बेचना होता है उन्हें अपना उत्पादन बनाए रखने के लिए सरकारी मदद की जरूरत पड़ती है। कूट- A (i) और (ii) B (i) और (iii) C केवल (iii) D इनमें से कोई नहीं
3)
निम्नलिखित तीनों गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए। मूल्य नियंत्रण से कुछ विकृतियाँ उत्पन्न होती हैं। वस्तु के मूल्य में कमी करने से अमीर और गरीब दोनों को सब्सिडी मिलती है। डीजल या उर्वरकों के कम मूल्य का मतलब है कि बड़े कार मालिकों और बडे किसानों को भी लाभ होगा। यदि दोहरा मूल्य (गरीब के लिए कम और अमीर के लिए अधिक) रखा जाता है कि लालफीताशाही (अफसरशाही), धोखाधड़ी के अवसर और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। उदाहरण के लिए, सार्वजनिक वितरण प्रणाली युक्त दुकानो पर गरीबों को अक्सर नजरंअदाज कर दिया जाता है या फिर मिलावटी अनाज दिया जाता है। उपभोक्ताओं के लिए सरकार द्वारा मूल्य कम रखे जाने में एक और समस्या यह है कि इन चीजों का उत्पादन करने वाली फर्में घाटे में चली जाएंगी- तब सरकार को इन्हें बनाए रखने के लिए आर्थिक छूट देनी होगी। ऐसे में इन फर्मों की कुशल उत्पादन की चाह खत्म हो जाएगी क्योंकि उन्हें पता होगा कि आखिर में सरकार उनके घाटे की पूर्ति कर देगी। इसके अलावा, मूल्य उपभोक्ताओं (कम या अधिक उपभोग के लिए) और उत्पादकों (कम या अधिक उत्पादन के लिए) के लिए संकेत होते हैं। जब वस्तु की कमी होती है तो मूल्य बढ़ते हैं और जब भरमार होती है तो घट जाते हैं। यदि मूल्य नियंत्रित हो जाते हैं तो इन संकेतों के लिए कोई स्थान नहीं रह जाता। डीजल का ही उदाहरण लें। यदि मूल्यों को बाजार (अंतर्राष्ट्रीय) पर छोड़ दिया जाए तो प्रतिक्रिया स्वरूप डीजल के दाम बढ़ जाएंगे। सामान्य जनता डीजल का उपयोग किफायत से करेगी और मांग घट जायेगी (जैसा कि कमी के समय होना चाहिए)। भारत में यह यदा-कदा ही होता है क्योंकि कई ईंधनों और ऊर्जा संसाधनों के क्षेत्र में लागत में वृद्धि और माल की कमी के संकेतों को उपभोक्ताओं तक पहुँचने ही नही दिया जाता। कुशल आर्थिक प्रबंधन के साथ गरीबों को आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित कराने के लिए क्या सुझाव दिए जा सकते हैं? (i) खाद्य पदार्थों एवं ईंधन पर सब्सिडी देने के बजाय गरीबों को सीधे नगद रुपए देना चाहिए। (ii) दोहरे मूल्य रखना। (iii) सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों की कड़ी निगरानी सुनिश्चित करना। कूट- A केवल (iii) B (i), (ii) और (iii) C केवल (ii) D इनमें से कोई नहीं
4)
निम्नलिखित तीनों गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए। मूल्य नियंत्रण से कुछ विकृतियाँ उत्पन्न होती हैं। वस्तु के मूल्य में कमी करने से अमीर और गरीब दोनों को सब्सिडी मिलती है। डीजल या उर्वरकों के कम मूल्य का मतलब है कि बड़े कार मालिकों और बडे किसानों को भी लाभ होगा। यदि दोहरा मूल्य (गरीब के लिए कम और अमीर के लिए अधिक) रखा जाता है कि लालफीताशाही (अफसरशाही), धोखाधड़ी के अवसर और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। उदाहरण के लिए, सार्वजनिक वितरण प्रणाली युक्त दुकानो पर गरीबों को अक्सर नजरंअदाज कर दिया जाता है या फिर मिलावटी अनाज दिया जाता है। उपभोक्ताओं के लिए सरकार द्वारा मूल्य कम रखे जाने में एक और समस्या यह है कि इन चीजों का उत्पादन करने वाली फर्में घाटे में चली जाएंगी- तब सरकार को इन्हें बनाए रखने के लिए आर्थिक छूट देनी होगी। ऐसे में इन फर्मों की कुशल उत्पादन की चाह खत्म हो जाएगी क्योंकि उन्हें पता होगा कि आखिर में सरकार उनके घाटे की पूर्ति कर देगी। इसके अलावा, मूल्य उपभोक्ताओं (कम या अधिक उपभोग के लिए) और उत्पादकों (कम या अधिक उत्पादन के लिए) के लिए संकेत होते हैं। जब वस्तु की कमी होती है तो मूल्य बढ़ते हैं और जब भरमार होती है तो घट जाते हैं। यदि मूल्य नियंत्रित हो जाते हैं तो इन संकेतों के लिए कोई स्थान नहीं रह जाता। डीजल का ही उदाहरण लें। यदि मूल्यों को बाजार (अंतर्राष्ट्रीय) पर छोड़ दिया जाए तो प्रतिक्रिया स्वरूप डीजल के दाम बढ़ जाएंगे। सामान्य जनता डीजल का उपयोग किफायत से करेगी और मांग घट जायेगी (जैसा कि कमी के समय होना चाहिए)। भारत में यह यदा-कदा ही होता है क्योंकि कई ईंधनों और ऊर्जा संसाधनों के क्षेत्र में लागत में वृद्धि और माल की कमी के संकेतों को उपभोक्ताओं तक पहुँचने ही नही दिया जाता। निम्नलिखित में से कौन-सा गलत है? A मूल्य नियंत्रण के परिणामस्वरूप अफसरशाही और भ्रष्टाचार पनपता है। B सामान्य तौर पर अर्थव्यवस्था में मूल्य बढ़ने से मांग में कमी आनी चाहिए। C भारत में डीजल के मूल्य बहुत कम हैं। D सभी सही हैं।
5)
निम्नलिखित तीनों गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए। उन्नत औद्योगिक समाज ने कुछ ऐसी नकली जरूरतों का सृजन किया है जिन्होंने जनसंचार, विज्ञापन, औद्योगिक प्रबंधन एवं समकालीन विचारधाराओं के जरिए लोगों को मौजूदा उत्पादन व उपभोक्ता प्रणाली से जोड़ दिया है। इससे ‘‘एक आयामी’’ विचार एवं व्यवहार की उत्पत्ति होती है जिससे आलोचनात्मक विचार एवं विपक्षी व्यवहार के प्रति अभिरुचि एवं योग्यता धूमिल सी पड़ जाती है। उपभोक्तावाद सामाजिक नियंत्रण का एक रूप है। जिस व्यवस्था में हम रहते हैं वह लोकतांत्रिक होने का दावा कर सकती है लेकिन वास्तव में यह सत्तावादी समाज है जिसमें चंद लोग हमें खुशियों को खरीदने का विकल्प देकर हमारी स्वतंत्रता के बोध पर कुठाराघात करते हैं। इस ‘‘पराधीनता’’ की परिस्थिति में, उपभोक्ता अतार्किक कृत्य करता है। वे जितना उनकी बुनियादी आवश्यकताएँ पूरी करने के लिये जरूरी हैं, उससे अधिक काम करते हैं। वे इस अवस्था से हुई मनोवैज्ञानिक क्षति को अनदेखा करते हैं तथा इससे उत्पन्न होने वाली पर्यावरणीय क्षति को भी अनदेखा करते हैं, और वे भौतिक वस्तुओं में सामाजिक लगाव ढूंढते हैं। यह इस अर्थ में इससे भी अधिक अतार्किक है जिसमें नये उत्पादो का सृजन अर्थव्यवस्था को चलाता है और अधिक क्रय के लिये अधिक कार्य करने को प्रोत्साहित करता है। इसके अतिरिक्त, विज्ञापन उपभोक्तावाद को शक्ति देता है, जो कि सामाजिक आचरण को विघटित करता है। विज्ञापन एक बड़ी संख्या में जन सामान्य को यह समझाते हैं कि सुख खरीदा जा सकता है। यह मनोवैज्ञानिक रूप से एक क्षतिकारक विचार है। उपभोक्तावाद विरोधी विचारधारा एक जीवनशैली है जो किसी भी अनावश्यक उपभोग के साथ-साथ अनावश्यक कार्य एवं बरबादी को निरुत्साहित करती है। लेकिन विज्ञापन एवं वस्तुकरण की चरम व्याख्या करने के कारण यह विकल्प भी जटिल हो जाता है क्योंकि सब कुछ वस्तु है, वे चीजें भी जो वास्तव में आवश्यक हैं। सही विकल्प चुनें- (i) उपभोक्तावाद पूंजीवादी समाज की प्रधान परंपरा है। (ii) जनसंचार, पूंजीवाद के साथ मिली भगत में काम करता है। (iii) ‘आवश्यकता’ (need) और ‘इच्छा’ (want) के बीच अंतर है। कूट- A (i) और (iii) B (i) और (ii) C केवल (iii) D इनमें से कोई नहीं
6)
निम्नलिखित तीनों गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए। उन्नत औद्योगिक समाज ने कुछ ऐसी नकली जरूरतों का सृजन किया है जिन्होंने जनसंचार, विज्ञापन, औद्योगिक प्रबंधन एवं समकालीन विचारधाराओं के जरिए लोगों को मौजूदा उत्पादन व उपभोक्ता प्रणाली से जोड़ दिया है। इससे ‘‘एक आयामी’’ विचार एवं व्यवहार की उत्पत्ति होती है जिससे आलोचनात्मक विचार एवं विपक्षी व्यवहार के प्रति अभिरुचि एवं योग्यता धूमिल सी पड़ जाती है। उपभोक्तावाद सामाजिक नियंत्रण का एक रूप है। जिस व्यवस्था में हम रहते हैं वह लोकतांत्रिक होने का दावा कर सकती है लेकिन वास्तव में यह सत्तावादी समाज है जिसमें चंद लोग हमें खुशियों को खरीदने का विकल्प देकर हमारी स्वतंत्रता के बोध पर कुठाराघात करते हैं। इस ‘‘पराधीनता’’ की परिस्थिति में, उपभोक्ता अतार्किक कृत्य करता है। वे जितना उनकी बुनियादी आवश्यकताएँ पूरी करने के लिये जरूरी हैं, उससे अधिक काम करते हैं। वे इस अवस्था से हुई मनोवैज्ञानिक क्षति को अनदेखा करते हैं तथा इससे उत्पन्न होने वाली पर्यावरणीय क्षति को भी अनदेखा करते हैं, और वे भौतिक वस्तुओं में सामाजिक लगाव ढूंढते हैं। यह इस अर्थ में इससे भी अधिक अतार्किक है जिसमें नये उत्पादो का सृजन अर्थव्यवस्था को चलाता है और अधिक क्रय के लिये अधिक कार्य करने को प्रोत्साहित करता है। इसके अतिरिक्त, विज्ञापन उपभोक्तावाद को शक्ति देता है, जो कि सामाजिक आचरण को विघटित करता है। विज्ञापन एक बड़ी संख्या में जन सामान्य को यह समझाते हैं कि सुख खरीदा जा सकता है। यह मनोवैज्ञानिक रूप से एक क्षतिकारक विचार है। उपभोक्तावाद विरोधी विचारधारा एक जीवनशैली है जो किसी भी अनावश्यक उपभोग के साथ-साथ अनावश्यक कार्य एवं बरबादी को निरुत्साहित करती है। लेकिन विज्ञापन एवं वस्तुकरण की चरम व्याख्या करने के कारण यह विकल्प भी जटिल हो जाता है क्योंकि सब कुछ वस्तु है, वे चीजें भी जो वास्तव में आवश्यक हैं। गलत विकल्प/विकल्पों को चुनिए- (i) उपभोक्ता समाज में लोकतंत्र यथार्थ नहीं है। (ii) उपभोक्तावाद पर्यावरण को क्षति पहुंचा रहा है। (iii) उपभोक्तावाद अतार्किक है। कूट- A (i) और (iii) B (i), (ii) और (iii) C केवल (iii) D इनमें से कोई नहीं
7)
निम्नलिखित तीनों गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए। उन्नत औद्योगिक समाज ने कुछ ऐसी नकली जरूरतों का सृजन किया है जिन्होंने जनसंचार, विज्ञापन, औद्योगिक प्रबंधन एवं समकालीन विचारधाराओं के जरिए लोगों को मौजूदा उत्पादन व उपभोक्ता प्रणाली से जोड़ दिया है। इससे ‘‘एक आयामी’’ विचार एवं व्यवहार की उत्पत्ति होती है जिससे आलोचनात्मक विचार एवं विपक्षी व्यवहार के प्रति अभिरुचि एवं योग्यता धूमिल सी पड़ जाती है। उपभोक्तावाद सामाजिक नियंत्रण का एक रूप है। जिस व्यवस्था में हम रहते हैं वह लोकतांत्रिक होने का दावा कर सकती है लेकिन वास्तव में यह सत्तावादी समाज है जिसमें चंद लोग हमें खुशियों को खरीदने का विकल्प देकर हमारी स्वतंत्रता के बोध पर कुठाराघात करते हैं। इस ‘‘पराधीनता’’ की परिस्थिति में, उपभोक्ता अतार्किक कृत्य करता है। वे जितना उनकी बुनियादी आवश्यकताएँ पूरी करने के लिये जरूरी हैं, उससे अधिक काम करते हैं। वे इस अवस्था से हुई मनोवैज्ञानिक क्षति को अनदेखा करते हैं तथा इससे उत्पन्न होने वाली पर्यावरणीय क्षति को भी अनदेखा करते हैं, और वे भौतिक वस्तुओं में सामाजिक लगाव ढूंढते हैं। यह इस अर्थ में इससे भी अधिक अतार्किक है जिसमें नये उत्पादो का सृजन अर्थव्यवस्था को चलाता है और अधिक क्रय के लिये अधिक कार्य करने को प्रोत्साहित करता है। इसके अतिरिक्त, विज्ञापन उपभोक्तावाद को शक्ति देता है, जो कि सामाजिक आचरण को विघटित करता है। विज्ञापन एक बड़ी संख्या में जन सामान्य को यह समझाते हैं कि सुख खरीदा जा सकता है। यह मनोवैज्ञानिक रूप से एक क्षतिकारक विचार है। उपभोक्तावाद विरोधी विचारधारा एक जीवनशैली है जो किसी भी अनावश्यक उपभोग के साथ-साथ अनावश्यक कार्य एवं बरबादी को निरुत्साहित करती है। लेकिन विज्ञापन एवं वस्तुकरण की चरम व्याख्या करने के कारण यह विकल्प भी जटिल हो जाता है क्योंकि सब कुछ वस्तु है, वे चीजें भी जो वास्तव में आवश्यक हैं। ‘‘एक आयामी’’ विश्व का क्या अर्थ है? A उपभोक्ता वस्तुओं का अंधानुकरण। B उपभोक्तावाद के कारण व्यक्ति का आध्यात्मिक आयाम विकसित नहीं हो पाता। C समझ-बूझ के क्षेत्र में संवाद एवं कल्पना को शिथिल कर देना। D इनमें से कोई नहीं
8)
निम्नलिखित तीनों गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए। उन्नत औद्योगिक समाज ने कुछ ऐसी नकली जरूरतों का सृजन किया है जिन्होंने जनसंचार, विज्ञापन, औद्योगिक प्रबंधन एवं समकालीन विचारधाराओं के जरिए लोगों को मौजूदा उत्पादन व उपभोक्ता प्रणाली से जोड़ दिया है। इससे ‘‘एक आयामी’’ विचार एवं व्यवहार की उत्पत्ति होती है जिससे आलोचनात्मक विचार एवं विपक्षी व्यवहार के प्रति अभिरुचि एवं योग्यता धूमिल सी पड़ जाती है। उपभोक्तावाद सामाजिक नियंत्रण का एक रूप है। जिस व्यवस्था में हम रहते हैं वह लोकतांत्रिक होने का दावा कर सकती है लेकिन वास्तव में यह सत्तावादी समाज है जिसमें चंद लोग हमें खुशियों को खरीदने का विकल्प देकर हमारी स्वतंत्रता के बोध पर कुठाराघात करते हैं। इस ‘‘पराधीनता’’ की परिस्थिति में, उपभोक्ता अतार्किक कृत्य करता है। वे जितना उनकी बुनियादी आवश्यकताएँ पूरी करने के लिये जरूरी हैं, उससे अधिक काम करते हैं। वे इस अवस्था से हुई मनोवैज्ञानिक क्षति को अनदेखा करते हैं तथा इससे उत्पन्न होने वाली पर्यावरणीय क्षति को भी अनदेखा करते हैं, और वे भौतिक वस्तुओं में सामाजिक लगाव ढूंढते हैं। यह इस अर्थ में इससे भी अधिक अतार्किक है जिसमें नये उत्पादो का सृजन अर्थव्यवस्था को चलाता है और अधिक क्रय के लिये अधिक कार्य करने को प्रोत्साहित करता है। इसके अतिरिक्त, विज्ञापन उपभोक्तावाद को शक्ति देता है, जो कि सामाजिक आचरण को विघटित करता है। विज्ञापन एक बड़ी संख्या में जन सामान्य को यह समझाते हैं कि सुख खरीदा जा सकता है। यह मनोवैज्ञानिक रूप से एक क्षतिकारक विचार है। उपभोक्तावाद विरोधी विचारधारा एक जीवनशैली है जो किसी भी अनावश्यक उपभोग के साथ-साथ अनावश्यक कार्य एवं बरबादी को निरुत्साहित करती है। लेकिन विज्ञापन एवं वस्तुकरण की चरम व्याख्या करने के कारण यह विकल्प भी जटिल हो जाता है क्योंकि सब कुछ वस्तु है, वे चीजें भी जो वास्तव में आवश्यक हैं। इससे (उपभोक्तावाद) मुक्ति पाने का राम बाण (सही उपाय) क्या है? A गैर उपभोक्तावाद B कोई भी वास्तविक हल नहीं दिया गया है। C यह महसूस करना कि खुशी खरीदी नहीं जा सकती। D साम्यवाद
9)
निम्नलिखित तीनों गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए। यदि स्त्रियां सत्ता में होती तो क्या विश्व अधिक शांतिपूर्ण होता? इतिहास में दीर्घकाल से स्त्रियां शांति स्थापित करने वाला बल रही हैं। परंपरागत युद्ध पुरुष का खेल रहा है। माता के रूप में स्त्रियों में यह विकासपरक प्रेरणा रहती है जिससे वे उन परिस्थितियों को बनाकर रखें जिसमें वे अपनी संतान का पालन-पोषण कर सकें और यह सुनिश्चित करना कि उनके जीन पीढ़ियों तक अस्तित्व में रहें। संशयी व्यक्ति तुरंत ही यह जवाब देगा कि स्त्रियों ने कभी भी युद्ध इसलिये नहीं किया क्योंकि वे विरले ही सत्ता में रही हैं। यदि उन्हें नेता के रूप में सशक्त किया जाता तो एक अराजक विश्व की परिस्थितियाँ उन्हें वही युद्धप्रिय निर्णय लेने के लिये मजबूर कर देती जो निर्णय पुरुष लेते हैं। मार्गरैट थैचर, गोल्डा मीर और इंदिरा गांधी शक्तिशाली महिलायें थी- और ये सभी अपने देशों को युद्ध की ओर ले गईं। किंतु यह भी सत्य है कि ये महिलाये ‘पुरुषों की दुनिया’ के राजनैतिक नियमों का अनुकरण करके ही सत्ता में आयी। पुरुष मान्यताओं का पालन करने के कारण ही इन्हें सत्ता में आने में सफलता मिली। एक ऐसी दुनिया जिसमें महिलाओं को नेतृत्व के स्थानों में आनुपातिक भागीदारी मिले, वहां उनका सत्ता में आचरण भिन्न हो सकता है। रूढ़िवादी परंपरा के अनुसार, भिन्न मनोवैज्ञानिक अध्ययन दर्शाते हैं कि पुरुष का झुकाव नियंत्रणकारी सत्ता की तरफ रहता है। जबकि महिलायें सहयोगी होती है और उन्हें आकर्षण और अनुनय की मृदु शक्ति का सहज ज्ञान होता है। सूचना (ज्ञान) पर आधारित समाज में नेटवर्क, पदानुक्रम आधारित संबंधों की जगह ले रहा है। बौद्धिक श्रमिक अब ‘कम आज्ञाकारी’ होते हैं। विभिन्न प्रकार की संस्थाओं में प्रबंधन ‘‘सहभागी नेतृत्व’’ और ‘‘विकेन्द्रीकृत नेतृत्व’’ की दिशा में बढ़ रहा है जिसमें नेता एक वृत्त के केन्द्र में है ना कि एक पिरामिड के शीर्ष पर। सही विकल्पों का चुनाव कीजिए- (i) विभिन्न देशों में राजनैतिक नेतृत्व में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम है। (ii) वैश्विक राजनीति की संरचना अराजक है। (iii) मार्गरैट थैचर एक ‘कठोर’ नेता थी। कूट- A (i) और (ii) B (ii) और (iii) C (i), (ii) और (iii) D इनमें से कोई नहीं
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निम्नलिखित तीनों गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए। यदि स्त्रियां सत्ता में होती तो क्या विश्व अधिक शांतिपूर्ण होता? इतिहास में दीर्घकाल से स्त्रियां शांति स्थापित करने वाला बल रही हैं। परंपरागत युद्ध पुरुष का खेल रहा है। माता के रूप में स्त्रियों में यह विकासपरक प्रेरणा रहती है जिससे वे उन परिस्थितियों को बनाकर रखें जिसमें वे अपनी संतान का पालन-पोषण कर सकें और यह सुनिश्चित करना कि उनके जीन पीढ़ियों तक अस्तित्व में रहें। संशयी व्यक्ति तुरंत ही यह जवाब देगा कि स्त्रियों ने कभी भी युद्ध इसलिये नहीं किया क्योंकि वे विरले ही सत्ता में रही हैं। यदि उन्हें नेता के रूप में सशक्त किया जाता तो एक अराजक विश्व की परिस्थितियाँ उन्हें वही युद्धप्रिय निर्णय लेने के लिये मजबूर कर देती जो निर्णय पुरुष लेते हैं। मार्गरैट थैचर, गोल्डा मीर और इंदिरा गांधी शक्तिशाली महिलायें थी- और ये सभी अपने देशों को युद्ध की ओर ले गईं। किंतु यह भी सत्य है कि ये महिलाये ‘पुरुषों की दुनिया’ के राजनैतिक नियमों का अनुकरण करके ही सत्ता में आयी। पुरुष मान्यताओं का पालन करने के कारण ही इन्हें सत्ता में आने में सफलता मिली। एक ऐसी दुनिया जिसमें महिलाओं को नेतृत्व के स्थानों में आनुपातिक भागीदारी मिले, वहां उनका सत्ता में आचरण भिन्न हो सकता है। रूढ़िवादी परंपरा के अनुसार, भिन्न मनोवैज्ञानिक अध्ययन दर्शाते हैं कि पुरुष का झुकाव नियंत्रणकारी सत्ता की तरफ रहता है। जबकि महिलायें सहयोगी होती है और उन्हें आकर्षण और अनुनय की मृदु शक्ति का सहज ज्ञान होता है। सूचना (ज्ञान) पर आधारित समाज में नेटवर्क, पदानुक्रम आधारित संबंधों की जगह ले रहा है। बौद्धिक श्रमिक अब ‘कम आज्ञाकारी’ होते हैं। विभिन्न प्रकार की संस्थाओं में प्रबंधन ‘‘सहभागी नेतृत्व’’ और ‘‘विकेन्द्रीकृत नेतृत्व’’ की दिशा में बढ़ रहा है जिसमें नेता एक वृत्त के केन्द्र में है ना कि एक पिरामिड के शीर्ष पर। ‘‘एक अराजक विश्व’’ का क्या अर्थ है? A कुछ देशों में कोई कानून व्यवस्था नहीं है। B विश्व में बहुत अधिक हिंसा हो रही है। C विश्व स्तर पर कोई ‘सार्वजनिक रूप से प्रवर्तित सरकार’ नहीं है। D इनमें से कोई नहीं
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निम्नलिखित तीनों गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए। यदि स्त्रियां सत्ता में होती तो क्या विश्व अधिक शांतिपूर्ण होता? इतिहास में दीर्घकाल से स्त्रियां शांति स्थापित करने वाला बल रही हैं। परंपरागत युद्ध पुरुष का खेल रहा है। माता के रूप में स्त्रियों में यह विकासपरक प्रेरणा रहती है जिससे वे उन परिस्थितियों को बनाकर रखें जिसमें वे अपनी संतान का पालन-पोषण कर सकें और यह सुनिश्चित करना कि उनके जीन पीढ़ियों तक अस्तित्व में रहें। संशयी व्यक्ति तुरंत ही यह जवाब देगा कि स्त्रियों ने कभी भी युद्ध इसलिये नहीं किया क्योंकि वे विरले ही सत्ता में रही हैं। यदि उन्हें नेता के रूप में सशक्त किया जाता तो एक अराजक विश्व की परिस्थितियाँ उन्हें वही युद्धप्रिय निर्णय लेने के लिये मजबूर कर देती जो निर्णय पुरुष लेते हैं। मार्गरैट थैचर, गोल्डा मीर और इंदिरा गांधी शक्तिशाली महिलायें थी- और ये सभी अपने देशों को युद्ध की ओर ले गईं। किंतु यह भी सत्य है कि ये महिलाये ‘पुरुषों की दुनिया’ के राजनैतिक नियमों का अनुकरण करके ही सत्ता में आयी। पुरुष मान्यताओं का पालन करने के कारण ही इन्हें सत्ता में आने में सफलता मिली। एक ऐसी दुनिया जिसमें महिलाओं को नेतृत्व के स्थानों में आनुपातिक भागीदारी मिले, वहां उनका सत्ता में आचरण भिन्न हो सकता है। रूढ़िवादी परंपरा के अनुसार, भिन्न मनोवैज्ञानिक अध्ययन दर्शाते हैं कि पुरुष का झुकाव नियंत्रणकारी सत्ता की तरफ रहता है। जबकि महिलायें सहयोगी होती है और उन्हें आकर्षण और अनुनय की मृदु शक्ति का सहज ज्ञान होता है। सूचना (ज्ञान) पर आधारित समाज में नेटवर्क, पदानुक्रम आधारित संबंधों की जगह ले रहा है। बौद्धिक श्रमिक अब ‘कम आज्ञाकारी’ होते हैं। विभिन्न प्रकार की संस्थाओं में प्रबंधन ‘‘सहभागी नेतृत्व’’ और ‘‘विकेन्द्रीकृत नेतृत्व’’ की दिशा में बढ़ रहा है जिसमें नेता एक वृत्त के केन्द्र में है ना कि एक पिरामिड के शीर्ष पर। गलत का चुनाव कीजिए- A यदि महिलाओं को नेतृत्व में आनुपातिक भागीदारी दी जाए तो वे सत्ता में अलग तरह से व्यवहार करेंगी। B महिलाएं ‘आनुवांशिक’ रूप से शांतिप्रिय होती हैं। C बहुराष्ट्रीय निगमों में आज कल साझा नेतृत्व होता है बजाय पदानुक्रम के। D सभी गलत हैं।
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निम्नलिखित तीनों गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए। यदि स्त्रियां सत्ता में होती तो क्या विश्व अधिक शांतिपूर्ण होता? इतिहास में दीर्घकाल से स्त्रियां शांति स्थापित करने वाला बल रही हैं। परंपरागत युद्ध पुरुष का खेल रहा है। माता के रूप में स्त्रियों में यह विकासपरक प्रेरणा रहती है जिससे वे उन परिस्थितियों को बनाकर रखें जिसमें वे अपनी संतान का पालन-पोषण कर सकें और यह सुनिश्चित करना कि उनके जीन पीढ़ियों तक अस्तित्व में रहें। संशयी व्यक्ति तुरंत ही यह जवाब देगा कि स्त्रियों ने कभी भी युद्ध इसलिये नहीं किया क्योंकि वे विरले ही सत्ता में रही हैं। यदि उन्हें नेता के रूप में सशक्त किया जाता तो एक अराजक विश्व की परिस्थितियाँ उन्हें वही युद्धप्रिय निर्णय लेने के लिये मजबूर कर देती जो निर्णय पुरुष लेते हैं। मार्गरैट थैचर, गोल्डा मीर और इंदिरा गांधी शक्तिशाली महिलायें थी- और ये सभी अपने देशों को युद्ध की ओर ले गईं। किंतु यह भी सत्य है कि ये महिलाये ‘पुरुषों की दुनिया’ के राजनैतिक नियमों का अनुकरण करके ही सत्ता में आयी। पुरुष मान्यताओं का पालन करने के कारण ही इन्हें सत्ता में आने में सफलता मिली। एक ऐसी दुनिया जिसमें महिलाओं को नेतृत्व के स्थानों में आनुपातिक भागीदारी मिले, वहां उनका सत्ता में आचरण भिन्न हो सकता है। रूढ़िवादी परंपरा के अनुसार, भिन्न मनोवैज्ञानिक अध्ययन दर्शाते हैं कि पुरुष का झुकाव नियंत्रणकारी सत्ता की तरफ रहता है। जबकि महिलायें सहयोगी होती है और उन्हें आकर्षण और अनुनय की मृदु शक्ति का सहज ज्ञान होता है। सूचना (ज्ञान) पर आधारित समाज में नेटवर्क, पदानुक्रम आधारित संबंधों की जगह ले रहा है। बौद्धिक श्रमिक अब ‘कम आज्ञाकारी’ होते हैं। विभिन्न प्रकार की संस्थाओं में प्रबंधन ‘‘सहभागी नेतृत्व’’ और ‘‘विकेन्द्रीकृत नेतृत्व’’ की दिशा में बढ़ रहा है जिसमें नेता एक वृत्त के केन्द्र में है ना कि एक पिरामिड के शीर्ष पर। ‘पुरुषों की दुनिया’ के राजनैतिक नियम क्या हैं? (i) शक्ति को बढ़ाने वाले (ii) नियंत्रणकारी सत्ता (iii) युद्ध A (i) और (ii) B (ii) और (iii) C (i), (ii) और (iii) D उपर्युक्त में से कोई नहीं
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निम्नलिखित दो गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिएं। कर्म के संबंध में एक मत यह है कि यह वास्तव में एक नैतिक सत्य, सार्वभौमिक मानवीय उत्तरदायित्व की एक सीख है। हमारे समस्त कर्म उसी प्रकार मानव भविष्य को प्रभावित करते हैं जिस प्रकार हम सभी का जीवन हमसे पहले जीवन बिताने वालों से प्रभावित होता आया है। कर्म के इतिहास में व्यक्तिगत सूत्रें के बजाय मानवता के कर्म का सार्वभौमिक संजाल है, जिसमें प्रत्येक मनुष्य का योगदान होता है और प्रत्येक उससे प्रभावित होता है। इस प्रकार मानव जाति एक संगठित इकाई है और प्रत्येक की उस संपूर्ण के प्रति जिम्मेदारी है, जिसका वह हिस्सा है। हमें विरासत में मिली दुनिया ने हमें बदला है और हम भी उस परिवेश का विकास कर रहे हैं, जिसमें हमारे बाद आने वाले लोग रहेंगे। इस प्रकार परिकल्पित कर्म के विचार का आज के समय में बहुत व्यावहारिक प्रभाव पड़ता है, जब विभिन्न देश मानव पर्यावरण के प्रदूषण की समस्याओं के साथ-साथ पर्यावरण नियोजन एवं संरक्षण की समस्याओं, परमाणु युद्ध पर रोक, जनसंख्या विस्फोट पर नियंत्रण, प्रजातीय संघर्ष तथा इस प्रकार की अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, जो उन तरीकों से संबंधित हैं, जिनके तहत प्रत्येक व्यक्ति और समूह की गतिविधियाँ सभी के कल्याण को प्रभावित करती हैं। इस प्रकार देखा जाये तो कर्म एक नैतिक सिद्धांत है और पीढ़ी दर पीढ़ी आत्मा के देहांतरण का प्रचलित विचार इस महान नैतिक सत्य का एक पौराणिक रूप माना जा सकता है। यह विचार मानव एकता की एक जीवंत पुष्टि है। आज की दुनिया कुछ ऐसी है कि यदि हम सब एक सामूहिक जीवन के लिए एकजुट नहीं हुए तो संभावना यह है कि हम अपने आप को एक साथ सामूहिक मृतावस्था में पाएंगें। लेकिन पुनर्जन्म के विचार की यह व्याख्या जो हजारों वर्षों से भारत के महान धर्मों की धारणा बनी हुई है- किस हद तक स्वीकार्य होगी- यह एक बड़ा प्रश्न है। सही विकल्प का चयन करें- (i) कर्म सिद्धांत का यह मत एक हिंदू को स्वीकार्य नहीं होगा। (ii) मानव जाति सामूहिक चुनौतियों का सामना कर रही है इसलिए सामूहिक प्रक्रिया की आवश्यकता है। (iii) एक परमाणु युद्ध मानव सभ्यता को नष्ट कर सकता है। कूट- A (i), (ii) और (iii) B (i) और (iii) C (ii) और (iii) D उपरोक्त में से कोई नहीं
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निम्नलिखित दो गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिएं। कर्म के संबंध में एक मत यह है कि यह वास्तव में एक नैतिक सत्य, सार्वभौमिक मानवीय उत्तरदायित्व की एक सीख है। हमारे समस्त कर्म उसी प्रकार मानव भविष्य को प्रभावित करते हैं जिस प्रकार हम सभी का जीवन हमसे पहले जीवन बिताने वालों से प्रभावित होता आया है। कर्म के इतिहास में व्यक्तिगत सूत्रें के बजाय मानवता के कर्म का सार्वभौमिक संजाल है, जिसमें प्रत्येक मनुष्य का योगदान होता है और प्रत्येक उससे प्रभावित होता है। इस प्रकार मानव जाति एक संगठित इकाई है और प्रत्येक की उस संपूर्ण के प्रति जिम्मेदारी है, जिसका वह हिस्सा है। हमें विरासत में मिली दुनिया ने हमें बदला है और हम भी उस परिवेश का विकास कर रहे हैं, जिसमें हमारे बाद आने वाले लोग रहेंगे। इस प्रकार परिकल्पित कर्म के विचार का आज के समय में बहुत व्यावहारिक प्रभाव पड़ता है, जब विभिन्न देश मानव पर्यावरण के प्रदूषण की समस्याओं के साथ-साथ पर्यावरण नियोजन एवं संरक्षण की समस्याओं, परमाणु युद्ध पर रोक, जनसंख्या विस्फोट पर नियंत्रण, प्रजातीय संघर्ष तथा इस प्रकार की अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, जो उन तरीकों से संबंधित हैं, जिनके तहत प्रत्येक व्यक्ति और समूह की गतिविधियाँ सभी के कल्याण को प्रभावित करती हैं। इस प्रकार देखा जाये तो कर्म एक नैतिक सिद्धांत है और पीढ़ी दर पीढ़ी आत्मा के देहांतरण का प्रचलित विचार इस महान नैतिक सत्य का एक पौराणिक रूप माना जा सकता है। यह विचार मानव एकता की एक जीवंत पुष्टि है। आज की दुनिया कुछ ऐसी है कि यदि हम सब एक सामूहिक जीवन के लिए एकजुट नहीं हुए तो संभावना यह है कि हम अपने आप को एक साथ सामूहिक मृतावस्था में पाएंगें। लेकिन पुनर्जन्म के विचार की यह व्याख्या जो हजारों वर्षों से भारत के महान धर्मों की धारणा बनी हुई है- किस हद तक स्वीकार्य होगी- यह एक बड़ा प्रश्न है। इनमें से क्या गलत है/हैं? (i) कर्म के बारे में दिया गया मत कर्म सिद्धांत की अपौराणिक व्याख्या है। (ii) हमारा विकास हमसे पहले की दुनिया द्वारा किया गया है और हम आने वाले भविष्य को आकार दे रहे हैं। (iii) पर्यावरण नियोजन के लिए मानव प्रजाति के संगठित प्रयास की आवश्यकता होती है। कूट- A केवल (i) B (i) और (ii) C (ii) और (iii) D इनमें से कोई नहीं
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निम्नलिखित दो गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिएं। कर्म के संबंध में एक मत यह है कि यह वास्तव में एक नैतिक सत्य, सार्वभौमिक मानवीय उत्तरदायित्व की एक सीख है। हमारे समस्त कर्म उसी प्रकार मानव भविष्य को प्रभावित करते हैं जिस प्रकार हम सभी का जीवन हमसे पहले जीवन बिताने वालों से प्रभावित होता आया है। कर्म के इतिहास में व्यक्तिगत सूत्रें के बजाय मानवता के कर्म का सार्वभौमिक संजाल है, जिसमें प्रत्येक मनुष्य का योगदान होता है और प्रत्येक उससे प्रभावित होता है। इस प्रकार मानव जाति एक संगठित इकाई है और प्रत्येक की उस संपूर्ण के प्रति जिम्मेदारी है, जिसका वह हिस्सा है। हमें विरासत में मिली दुनिया ने हमें बदला है और हम भी उस परिवेश का विकास कर रहे हैं, जिसमें हमारे बाद आने वाले लोग रहेंगे। इस प्रकार परिकल्पित कर्म के विचार का आज के समय में बहुत व्यावहारिक प्रभाव पड़ता है, जब विभिन्न देश मानव पर्यावरण के प्रदूषण की समस्याओं के साथ-साथ पर्यावरण नियोजन एवं संरक्षण की समस्याओं, परमाणु युद्ध पर रोक, जनसंख्या विस्फोट पर नियंत्रण, प्रजातीय संघर्ष तथा इस प्रकार की अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, जो उन तरीकों से संबंधित हैं, जिनके तहत प्रत्येक व्यक्ति और समूह की गतिविधियाँ सभी के कल्याण को प्रभावित करती हैं। इस प्रकार देखा जाये तो कर्म एक नैतिक सिद्धांत है और पीढ़ी दर पीढ़ी आत्मा के देहांतरण का प्रचलित विचार इस महान नैतिक सत्य का एक पौराणिक रूप माना जा सकता है। यह विचार मानव एकता की एक जीवंत पुष्टि है। आज की दुनिया कुछ ऐसी है कि यदि हम सब एक सामूहिक जीवन के लिए एकजुट नहीं हुए तो संभावना यह है कि हम अपने आप को एक साथ सामूहिक मृतावस्था में पाएंगें। लेकिन पुनर्जन्म के विचार की यह व्याख्या जो हजारों वर्षों से भारत के महान धर्मों की धारणा बनी हुई है- किस हद तक स्वीकार्य होगी- यह एक बड़ा प्रश्न है। इनमें से कौन-से गलत हैं? (i) भारतीय धर्मों के अनुसार कर्म एक नैतिक सत्य है। (ii) पर्यावरण प्रदूषण और क्षय के लिए मनुष्य जिम्मेदार हैं। (iii) कर्म के मत का पुनर्जन्म के विचार के साथ सामंजस्य स्थापित नहीं किया जा सकता है। कूट- A (i) और (ii) B (i), (ii) और (iii) C (i) और (iii) D उपरोक्त में से कोई नहीं
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निम्नलिखित दो गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नो के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिएं। हाल के दशकों में कुछ संस्कृतियों में दहेज के अपेक्षित मूल्य में वृद्धि हुई है। इस तथ्य ने1980 के दशक के बाद से ‘दहेज मौतों’ में तेजी से वृद्धि की है। ‘‘दहेज हत्या’’ तब होती है जब एक नवविवाहिता की, उसके पति या ससुराल वालों द्वारा उससे खुश न रहने के कारण उसके माता-पिता के पास वापस भेजने के बजाय, हत्या कर दी जाती है क्योंकि माता-पिता का दहेज वापस करने का दबाव पड़ेगा। भारत में आंकड़े बताते हैं कि इस प्रकार मारी गई विवाहिताओं में 90%  शिक्षित थीं, 30%  स्नातक थीं और 20%  महिलाएँ घर के बाहर काम करके परिवार के लिए आर्थिक रूप से योगदान करती थीं। दहेज हत्याओं को महिला अधिकार समूहों द्वारा ‘उभरते शहरी मध्यम वर्ग’ की समस्या के तौर पर वर्णित किया जाता है, जो अधिक भौतिक समृद्धि की इच्छा रखते हैं और पत्नी के साथ आने वाले दहेज को धन और उपभोक्ता वस्तुएँ प्राप्त करने के एक साधन है रूप में देखते हैं। दहेज हत्याएँ आमतौर पर वधु को जला कर की जाती हैं। यह सती की प्राचीन प्रथा से प्रभावित चलन है, जिसमें शोकाकुल विधवा अपने दिवंगत पति की चिता पर बैठकर मृत्यु का वरण कर लेती थी। हालांकि सती प्रथा को1829 में प्रतिबंधित कर दिया गया था, लेकिन कई भारतीयों ने अतीत में महान निष्ठा के एक संकेत के रूप में इसकी प्रशंसा की है। आज के कुछ उदाहरणों में वधु से उसके पति और ससुराल वालों द्वारा दुर्व्यवहार कर उसे आत्मदाह के लिए विवश किया जाता है। ऐसी मौतों को भी महिला अधिकार समूहों द्वारा ‘‘दहेज हत्या’’ माना जाता है। दहेज प्रथा को इन हत्याओं के कारण के रूप में इंगित किया गया है, लेकिन समस्या की जड़ तथा भावी समाधान इससे कहीं अधिक जटिल हैं। दक्षिण एशिया में नारीवादियों जैसे भारत में दिल्ली आधारित नारीवादी पत्रिका ‘मानुषी’ की संपादक मधु किश्वर का कहना है कि भारत में उत्तराधिकार कानून महिलाओं के खिलाफ भेदभाव करते हैं, जिसमें विरासत केवल पुत्रें के लिए छोड़ दी जाती है। ऐसे में महिलाएँ अपने पति और ससुराल वालों पर निर्भर हो जाती है, जो उसके विवाह के समय दिए गए दहेज को अपने पास रखते हैं। यह भी देखा गया है कि एक आधुनिक जटिल तथ्य यह है कि युवा, शिक्षित, मध्यम वर्गीय भारतीय महिलाओं को तब कुछ स्वतंत्रता का अनुभव होता है, जब वे काम करने के लिए घर से बाहर निकलती हैं और ऐसे में नए ससुराल वालों से तब विवाद होता है, जब वे उससे पूर्णतः आज्ञाकारी और अधीन होने की आशा करते हैं। सही विकल्प का चयन करें- (i) भारत के अलावा किसी अन्य दक्षिण एशियाई देश में दहेज की प्रथा नहीं है। (ii) भारतीय कानून के अनुसार ‘आत्मदाह’ दहेज हत्या का एक रूप है। (iii) दहेज हत्या की घटनाएँ ग्रामीण क्षेत्रें में बहुत कम होती हैं। कूट- A केवल (i) B केवल (ii) C केवल (iii) D इनमें से कोई नहीं
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निम्नलिखित दो गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नो के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिएं। हाल के दशकों में कुछ संस्कृतियों में दहेज के अपेक्षित मूल्य में वृद्धि हुई है। इस तथ्य ने1980 के दशक के बाद से ‘दहेज मौतों’ में तेजी से वृद्धि की है। ‘‘दहेज हत्या’’ तब होती है जब एक नवविवाहिता की, उसके पति या ससुराल वालों द्वारा उससे खुश न रहने के कारण उसके माता-पिता के पास वापस भेजने के बजाय, हत्या कर दी जाती है क्योंकि माता-पिता का दहेज वापस करने का दबाव पड़ेगा। भारत में आंकड़े बताते हैं कि इस प्रकार मारी गई विवाहिताओं में 90%  शिक्षित थीं, 30%  स्नातक थीं और 20%  महिलाएँ घर के बाहर काम करके परिवार के लिए आर्थिक रूप से योगदान करती थीं। दहेज हत्याओं को महिला अधिकार समूहों द्वारा ‘उभरते शहरी मध्यम वर्ग’ की समस्या के तौर पर वर्णित किया जाता है, जो अधिक भौतिक समृद्धि की इच्छा रखते हैं और पत्नी के साथ आने वाले दहेज को धन और उपभोक्ता वस्तुएँ प्राप्त करने के एक साधन है रूप में देखते हैं। दहेज हत्याएँ आमतौर पर वधु को जला कर की जाती हैं। यह सती की प्राचीन प्रथा से प्रभावित चलन है, जिसमें शोकाकुल विधवा अपने दिवंगत पति की चिता पर बैठकर मृत्यु का वरण कर लेती थी। हालांकि सती प्रथा को1829 में प्रतिबंधित कर दिया गया था, लेकिन कई भारतीयों ने अतीत में महान निष्ठा के एक संकेत के रूप में इसकी प्रशंसा की है। आज के कुछ उदाहरणों में वधु से उसके पति और ससुराल वालों द्वारा दुर्व्यवहार कर उसे आत्मदाह के लिए विवश किया जाता है। ऐसी मौतों को भी महिला अधिकार समूहों द्वारा ‘‘दहेज हत्या’’ माना जाता है। दहेज प्रथा को इन हत्याओं के कारण के रूप में इंगित किया गया है, लेकिन समस्या की जड़ तथा भावी समाधान इससे कहीं अधिक जटिल हैं। दक्षिण एशिया में नारीवादियों जैसे भारत में दिल्ली आधारित नारीवादी पत्रिका ‘मानुषी’ की संपादक मधु किश्वर का कहना है कि भारत में उत्तराधिकार कानून महिलाओं के खिलाफ भेदभाव करते हैं, जिसमें विरासत केवल पुत्रें के लिए छोड़ दी जाती है। ऐसे में महिलाएँ अपने पति और ससुराल वालों पर निर्भर हो जाती है, जो उसके विवाह के समय दिए गए दहेज को अपने पास रखते हैं। यह भी देखा गया है कि एक आधुनिक जटिल तथ्य यह है कि युवा, शिक्षित, मध्यम वर्गीय भारतीय महिलाओं को तब कुछ स्वतंत्रता का अनुभव होता है, जब वे काम करने के लिए घर से बाहर निकलती हैं और ऐसे में नए ससुराल वालों से तब विवाद होता है, जब वे उससे पूर्णतः आज्ञाकारी और अधीन होने की आशा करते हैं। सही विकल्प का चयन करें- A सती प्रथा अभी भी भारत में प्रचलित है। B सती प्रथा की कई भारतीयों द्वारा आज भी प्रशंसा की जाती है। C सती प्रथा वधुओं की मौत का मूल कारण है। D इनमें से कोई नहीं
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निम्नलिखित दो गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नो के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिएं। हाल के दशकों में कुछ संस्कृतियों में दहेज के अपेक्षित मूल्य में वृद्धि हुई है। इस तथ्य ने1980 के दशक के बाद से ‘दहेज मौतों’ में तेजी से वृद्धि की है। ‘‘दहेज हत्या’’ तब होती है जब एक नवविवाहिता की, उसके पति या ससुराल वालों द्वारा उससे खुश न रहने के कारण उसके माता-पिता के पास वापस भेजने के बजाय, हत्या कर दी जाती है क्योंकि माता-पिता का दहेज वापस करने का दबाव पड़ेगा। भारत में आंकड़े बताते हैं कि इस प्रकार मारी गई विवाहिताओं में 90%  शिक्षित थीं, 30%  स्नातक थीं और 20%  महिलाएँ घर के बाहर काम करके परिवार के लिए आर्थिक रूप से योगदान करती थीं। दहेज हत्याओं को महिला अधिकार समूहों द्वारा ‘उभरते शहरी मध्यम वर्ग’ की समस्या के तौर पर वर्णित किया जाता है, जो अधिक भौतिक समृद्धि की इच्छा रखते हैं और पत्नी के साथ आने वाले दहेज को धन और उपभोक्ता वस्तुएँ प्राप्त करने के एक साधन है रूप में देखते हैं। दहेज हत्याएँ आमतौर पर वधु को जला कर की जाती हैं। यह सती की प्राचीन प्रथा से प्रभावित चलन है, जिसमें शोकाकुल विधवा अपने दिवंगत पति की चिता पर बैठकर मृत्यु का वरण कर लेती थी। हालांकि सती प्रथा को1829 में प्रतिबंधित कर दिया गया था, लेकिन कई भारतीयों ने अतीत में महान निष्ठा के एक संकेत के रूप में इसकी प्रशंसा की है। आज के कुछ उदाहरणों में वधु से उसके पति और ससुराल वालों द्वारा दुर्व्यवहार कर उसे आत्मदाह के लिए विवश किया जाता है। ऐसी मौतों को भी महिला अधिकार समूहों द्वारा ‘‘दहेज हत्या’’ माना जाता है। दहेज प्रथा को इन हत्याओं के कारण के रूप में इंगित किया गया है, लेकिन समस्या की जड़ तथा भावी समाधान इससे कहीं अधिक जटिल हैं। दक्षिण एशिया में नारीवादियों जैसे भारत में दिल्ली आधारित नारीवादी पत्रिका ‘मानुषी’ की संपादक मधु किश्वर का कहना है कि भारत में उत्तराधिकार कानून महिलाओं के खिलाफ भेदभाव करते हैं, जिसमें विरासत केवल पुत्रें के लिए छोड़ दी जाती है। ऐसे में महिलाएँ अपने पति और ससुराल वालों पर निर्भर हो जाती है, जो उसके विवाह के समय दिए गए दहेज को अपने पास रखते हैं। यह भी देखा गया है कि एक आधुनिक जटिल तथ्य यह है कि युवा, शिक्षित, मध्यम वर्गीय भारतीय महिलाओं को तब कुछ स्वतंत्रता का अनुभव होता है, जब वे काम करने के लिए घर से बाहर निकलती हैं और ऐसे में नए ससुराल वालों से तब विवाद होता है, जब वे उससे पूर्णतः आज्ञाकारी और अधीन होने की आशा करते हैं। इनमें से कौन-सा गलत है- A दहेज का प्रचलन शहरी मध्यम वर्ग के बीच है। B सती को महिलाओं की अपने पति के प्रति निष्ठा के प्रतीक के रूप में देखा जाता था। C मधु किश्वर एक नारीवादी हैं। D इनमें से कोई नहीं
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निम्नलिखित दो गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नो के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिएं। हाल के दशकों में कुछ संस्कृतियों में दहेज के अपेक्षित मूल्य में वृद्धि हुई है। इस तथ्य ने1980 के दशक के बाद से ‘दहेज मौतों’ में तेजी से वृद्धि की है। ‘‘दहेज हत्या’’ तब होती है जब एक नवविवाहिता की, उसके पति या ससुराल वालों द्वारा उससे खुश न रहने के कारण उसके माता-पिता के पास वापस भेजने के बजाय, हत्या कर दी जाती है क्योंकि माता-पिता का दहेज वापस करने का दबाव पड़ेगा। भारत में आंकड़े बताते हैं कि इस प्रकार मारी गई विवाहिताओं में 90%  शिक्षित थीं, 30%  स्नातक थीं और 20%  महिलाएँ घर के बाहर काम करके परिवार के लिए आर्थिक रूप से योगदान करती थीं। दहेज हत्याओं को महिला अधिकार समूहों द्वारा ‘उभरते शहरी मध्यम वर्ग’ की समस्या के तौर पर वर्णित किया जाता है, जो अधिक भौतिक समृद्धि की इच्छा रखते हैं और पत्नी के साथ आने वाले दहेज को धन और उपभोक्ता वस्तुएँ प्राप्त करने के एक साधन है रूप में देखते हैं। दहेज हत्याएँ आमतौर पर वधु को जला कर की जाती हैं। यह सती की प्राचीन प्रथा से प्रभावित चलन है, जिसमें शोकाकुल विधवा अपने दिवंगत पति की चिता पर बैठकर मृत्यु का वरण कर लेती थी। हालांकि सती प्रथा को1829 में प्रतिबंधित कर दिया गया था, लेकिन कई भारतीयों ने अतीत में महान निष्ठा के एक संकेत के रूप में इसकी प्रशंसा की है। आज के कुछ उदाहरणों में वधु से उसके पति और ससुराल वालों द्वारा दुर्व्यवहार कर उसे आत्मदाह के लिए विवश किया जाता है। ऐसी मौतों को भी महिला अधिकार समूहों द्वारा ‘‘दहेज हत्या’’ माना जाता है। दहेज प्रथा को इन हत्याओं के कारण के रूप में इंगित किया गया है, लेकिन समस्या की जड़ तथा भावी समाधान इससे कहीं अधिक जटिल हैं। दक्षिण एशिया में नारीवादियों जैसे भारत में दिल्ली आधारित नारीवादी पत्रिका ‘मानुषी’ की संपादक मधु किश्वर का कहना है कि भारत में उत्तराधिकार कानून महिलाओं के खिलाफ भेदभाव करते हैं, जिसमें विरासत केवल पुत्रें के लिए छोड़ दी जाती है। ऐसे में महिलाएँ अपने पति और ससुराल वालों पर निर्भर हो जाती है, जो उसके विवाह के समय दिए गए दहेज को अपने पास रखते हैं। यह भी देखा गया है कि एक आधुनिक जटिल तथ्य यह है कि युवा, शिक्षित, मध्यम वर्गीय भारतीय महिलाओं को तब कुछ स्वतंत्रता का अनुभव होता है, जब वे काम करने के लिए घर से बाहर निकलती हैं और ऐसे में नए ससुराल वालों से तब विवाद होता है, जब वे उससे पूर्णतः आज्ञाकारी और अधीन होने की आशा करते हैं। गलत विकल्प/विकल्पों का चयन करें- (i) भारत में महिलाएँ संपत्ति की उत्तराधिकारी नहीं हो सकती हैं। (ii) राजा राम मोहन राय के प्रयासों से1829 में भारत में सती पर प्रतिबंध लगा दिया गया। (iii) वधु को उसके माता-पिता के पास वापस भेजने के बजाय दहेज चाहने वाले यदि उससे खुश नहीं होते तो उसकी हत्या करने पर उतारू हो जाते हैं। कूट- A (i) और (ii) B (ii) और (iii) C (i) और (iii) D केवल (ii)
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इसरो में वैज्ञानिक होने के लिए खगोल भौतिकी का ज्ञान होना अति आवश्यक है। इसरो के आधे वैज्ञानिक पदार्थ विज्ञान में स्नातक हैं। पदार्थ विज्ञान में स्नातक इसरो के कुछ वैज्ञानिक दर्शनशास्त्र का ज्ञान रखते हैं। उपर्युक्त युक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से वैध निष्कर्ष है/हैं? (i) इसरो के पदार्थ विज्ञान में स्नातक वैज्ञानिक खगोल भौतिकी का ज्ञान रखते हैं। (ii) सभी दर्शनशास्त्रीय खगोल भौतिकी का ज्ञान रखते हैं। (iii) सभी पदार्थ विज्ञानी स्नातकों को खगोल भौतिकी का ज्ञान है। (iv) कुछ दर्शनशास्त्रीय, जो इसरो में पदार्थ विज्ञान स्नातक वैज्ञानिक हैं को खगोल भौतिकी का ज्ञान है। कूट- A केवल (i) B केवल (iv) C दोनों (i) और (iv) D इनमें से कोई नहीं
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निम्न लिखित प्रश्नो में एक कथन और उसके बाद कार्रवाइयां दी गई हैं। कार्रवाई से अभिप्राय उन प्रशासनिक उपाय और निर्णय से है जो दी गई समस्या, नीति इत्यादि के सुधार या रणनीति के संदर्भ में लिए गए। आपको कथन में दिए गए तथ्यों को सही मानकर चलते हुए यह तय करना है कि दी गई कौन-सी कार्रवाई लागू करने के लिए सही है? उत्तर दें: पूर्वी उत्तर प्रदेश में मस्तिष्क ज्वर के हजारों मामले सामने आए हैं। इसकी रोकथाम, नियंत्रण और इससे निपटने के लिए संभावित कार्रवाई क्या हो सकती है- कार्रवाइयाँ (i) उच्च अधिकार प्राप्त मेडिकल जांच टीम का गठन किया जाए। (ii) ऐसे और मामले सामने आने से रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्र में चिकित्सा कर्मियों का दल भेजा जाए। A यदि केवल कार्रवाई (i) न्यायोचित है। B यदि केवल कार्रवाई (ii) न्यायोचित है। C यदि न तो (i) और न ही (ii) न्यायोचित है। D यदि (i) और (ii) दोनों न्यायोचित हैं।
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निम्न लिखित प्रश्नो में एक कथन और उसके बाद कार्रवाइयां दी गई हैं। कार्रवाई से अभिप्राय उन प्रशासनिक उपाय और निर्णय से है जो दी गई समस्या, नीति इत्यादि के सुधार या रणनीति के संदर्भ में लिए गए। आपको कथन में दिए गए तथ्यों को सही मानकर चलते हुए यह तय करना है कि दी गई कौन-सी कार्रवाई लागू करने के लिए सही है? उत्तर दें: किसी विशिष्ट क्षेत्र में ताप विद्युत संयंत्र परियोजना के कारण उस क्षेत्र की पारिस्थितिकी और पर्यावरण तेजी से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कार्रवाइयाँ (i) सभी प्रचालनीय ताप विद्युत संयंत्रें को बंद कर देना चाहिए। (ii) पारिस्थितिकीविदों और पर्यावरणविदों को ताप विद्युत संयंत्र की आवश्यकताओं से अवगत कराना चाहिए। A यदि केवल कार्रवाई (i) न्यायोचित है। B यदि केवल कार्रवाई (ii) न्यायोचित है। C यदि न तो (i) और न ही (ii) न्यायोचित है। D यदि (i) और (ii) दोनों न्यायोचित हैं।
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कथन ः हमारे देश की नौकरशाही और प्रशासन मे सुधार के लिए द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने ‘एक नियुक्ति, दो वर्ष’ मॉडल का सुझाव दिया है। पूर्वधारणाएँ i. मनुष्य के लिए अपने जीवन में एक से अधिक क्षेत्रें में सक्षम होना संभव नहीं है। ii. प्रशासनिक पद पर नियुक्त व्यक्ति तब अपने पद के साथ न्याय करने में सक्षम हो सकता है, जब उसके पास अपनी नीतियों को लागू करने के लिए पर्याप्त समय हो। A चिन्हित करें, यदि कथन में केवल (i) अन्तर्निहित है। B चिन्हित करें, यदि कथन में केवल (ii) अन्तर्निहित है। C चिन्हित करें, यदि कथन में (i) और न ही (ii) अन्तर्निहित है। D चिन्हित करें, यदि कथन में (i) और (ii) दोनों अन्तर्निहित हैं।
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सार्वजनिक संपत्ति पर पर्चे बाँटना और भाषण देना गैरकानूनी होना चाहिए। अतिवादियों और कट्टरपंथियों को उनके अतिवादी विचारों के चलते सार्वजनिक संपत्ति का उपयोग करने का कोई अधिकार नहीं है। उपरोक्त तर्क इस सिद्धांत या पूर्वधारणा पर आधारित है कि- A विभिन्न राजनीतिक मतों के मुक्त आदान-प्रदान को लेकर जनसामान्य में विशेष रुचि होती है। B अतिवादियों और कट्टरपंथियों द्वारा अपने मत का प्रचार करने के लिए सदैव सार्वजनिक संपत्ति का उपयोग किया जाता है। C प्रत्येक व्यक्ति जो पर्चे बाँटता है और भाषण देता है अतिवादी या कट्टरपंथी है। D आवश्यक नहीं कि जो वैधानिक प्रतिबंध एक समूह पर लागू होते हैं, वे सभी पर लागू हों।
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निम्नलिखित प्रश्नों में प्रश्न के नीचे तीन कथन (i), (ii) और (iii) दिये गये हैं। आपको यह तय करना है कि कथनों में दिये गये आंकड़े प्रश्नों के उत्तर देने के लिये पर्याप्त हैं अथवा नहीं। कथनों को ध्यानपूर्वक पढ़िये और उन संभावित जोड़ों का पता लगाइए जो प्रश्न का उत्तर देने के लिये पर्याप्त है। चार विषय भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित और जीव विज्ञान सुबह 8 बजे से शुरू होने वाली एक-एक घंटे की लगातार चार कक्षाओं में पढ़ाए जाते हैं। रसायन विज्ञान की कक्षा कब रखी गई? (i) गणित की कक्षा 10:00 बजे समाप्त हुई जो जीव विज्ञान की कक्षा के बाद हुई। (ii) भौतिकी की कक्षा सबसे अंत में रखी गई। (iii) गणित की कक्षा के तुरंत बाद रसायन विज्ञान की कक्षा हुई। कूट- A केवल (i) B केवल (i) और (ii) C केवल (i) और (iii) D (i) और (ii) एक साथ या (i) और (iii) एक साथ।
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अविनाश ने रु- 6 प्रति सेब के मूल्य से कुछ सेब और रु- 5 प्रति सन्तरे के मूल्य से कुछ सन्तरे खरीदे। यदि उसने कुल रु- 41 का भुगतान किया हो तो अविनाश ने कुल कितने सेब खरीदे? (i) अविनाश द्वारा खरीदे गए सेबों और सन्तरों की कुल संख्या 8 थी। (ii) अविनाश ने सब की तुलना में सात गुने संतरे खरीदे। A यदि प्रश्न का उत्तर किसी एक कथन के प्रयोग से दिया जा सके, लेकिन केवल दूसरे कथन के प्रयोग से न दिया जा सके। B यदि प्रश्न का उत्तर किसी भी एक कथन के प्रयोग से दिया जा सके। C यदि प्रश्न का उत्तर दोनों कथनों के एक साथ प्रयोग करने से दिया जा सके पंरतु किसी भी एक कथन का अकेले प्रयोग करके न दिया जा सके। D यदि दोनों कथनों का एक साथ प्रयोग करके भी प्रश्न का उत्तर न दिया जा सके।
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निम्नलिखित दो गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए। 2007 से भारत और चीन के बीच संबंध एक समान नहीं रहे हैं। सीमा विवाद को हल करने को लेकर वार्ता ठप पड़ी है, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी घुसपैठ में वृद्धि हुई है और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के उत्तरी क्षेत्र में चीनी गतिविधियाँ बढ़ गई हैं। इसके साथ-साथ चीन की ‘‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’’ का वास्तविक/कथित खतरा है, जिसका अर्थ चीन द्वारा भारत को चारों ओर से घेरना है। चीन की सैन्य शक्ति में हो रही सतत वृद्धि, तिब्बत में आधारभूत संरचना का विकास और चीन द्वारा की जा रही राष्ट्रवादी बयानबाजी के कारण चीन-भारत के बीच एक और टकराव की छाया मंडरा रही है। लेकिन 2012, 1962 नहीं है। सेना की तैनाती पर नजर रखने वाली विशेषज्ञ वेबसाइट Orbat.com के संपादक रवि रिखी के अनुसार, ‘‘चीनियों ने प्रहार, उकसाने और अपमान करने की जो भी हरकतें की हैं उसने लंबे समय से निष्क्रिय पड़े भारतीय हाथी को जगा दिया है। वह कहते हैं कि भारत अब ऐसे निर्माण की ओर अग्रसर है, जो तिब्बत में चीन के लिए ‘गंभीर भारतीय आक्रामक खतरा’ उत्पन्न कर देगा। मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) शेरू थपलियाल, जिन्होंने लद्दाख में सेना की एक डिविजन का नेतृत्व किया है और पूर्वी सेक्टर में तैनात रहे हैं, कहते हैं कि ‘‘चीनी रणनीति, युद्ध नीति और हथियार प्रणाली की जानकारी’’ होने के कारण भारत आज कहीं बेहतर रूप से तैयार है। उनके विचार से भारतीय सफलता की कुंजी सशस्त्र सेना होगी, जो‘‘1962 युद्ध के आघात से उबर चुकी है और लड़ने के लिए तैयार खड़ी होगी।’’ सबसे बड़ी चिंता यह है कि भारतीय आधुनिकीकरण कार्यक्रम अभी भी एक भावी संभावना ही बना हुआ है। तीनों सेनाओं का कहना है कि आज की परिस्थितियों के अनुसार आधुनिकीकरण का वर्तमान चरण2022 तक ही पूरा हो पाएगा। अर्थात पूरा एक दशक और 10 वर्ष अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में एक लंबा समय होता है। हालाँकि चीनी दृढ़ता या किसी अप्रत्याशित दुर्घटना से युद्ध की सम्भावना बन सकती है लेकिन कुछ अच्छे कारण है जो इस संभावना का विरोध करते हैं।1962 का युद्ध काफी हद तक कम्युनिस्ट पार्टी पर माओ द्वारा अपना नियंत्रण स्थापित करने की आवश्यकता का परिणाम था। यह स्थिति सांस्कृतिक क्रांति की त्रसदी और सोवियत संघ को पीछे छोड़ने की चीनी नीति का परिणाम थी। कुछ सीमा तक इसके लिए तिब्बत पर भारत के इरादों को ‘‘गलत समझना’’ और भारत की टकराव भरी ‘‘अग्रगामी नीति’’ भी जिम्मेदार थी। आज ये सब कारक नदारद हैं। गलत विकल्प का चयन करें- (i) यदि आज युद्ध होता है, चीन1962 की तरह भारत को आसानी से हराने में सक्षम नहीं होगा। (ii) भारत का रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम पिछड़ रहा है। (iii) निकट भविष्य में भारत-चीन संघर्ष होना अवश्यम्भावी है। कूट- A (i) और (ii) B (ii) और (iii) C (i) और (iii) D (i), (ii) और (iii)
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निम्नलिखित दो गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए। 2007 से भारत और चीन के बीच संबंध एक समान नहीं रहे हैं। सीमा विवाद को हल करने को लेकर वार्ता ठप पड़ी है, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी घुसपैठ में वृद्धि हुई है और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के उत्तरी क्षेत्र में चीनी गतिविधियाँ बढ़ गई हैं। इसके साथ-साथ चीन की ‘‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’’ का वास्तविक/कथित खतरा है, जिसका अर्थ चीन द्वारा भारत को चारों ओर से घेरना है। चीन की सैन्य शक्ति में हो रही सतत वृद्धि, तिब्बत में आधारभूत संरचना का विकास और चीन द्वारा की जा रही राष्ट्रवादी बयानबाजी के कारण चीन-भारत के बीच एक और टकराव की छाया मंडरा रही है। लेकिन 2012, 1962 नहीं है। सेना की तैनाती पर नजर रखने वाली विशेषज्ञ वेबसाइट Orbat.com के संपादक रवि रिखी के अनुसार, ‘‘चीनियों ने प्रहार, उकसाने और अपमान करने की जो भी हरकतें की हैं उसने लंबे समय से निष्क्रिय पड़े भारतीय हाथी को जगा दिया है। वह कहते हैं कि भारत अब ऐसे निर्माण की ओर अग्रसर है, जो तिब्बत में चीन के लिए ‘गंभीर भारतीय आक्रामक खतरा’ उत्पन्न कर देगा। मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) शेरू थपलियाल, जिन्होंने लद्दाख में सेना की एक डिविजन का नेतृत्व किया है और पूर्वी सेक्टर में तैनात रहे हैं, कहते हैं कि ‘‘चीनी रणनीति, युद्ध नीति और हथियार प्रणाली की जानकारी’’ होने के कारण भारत आज कहीं बेहतर रूप से तैयार है। उनके विचार से भारतीय सफलता की कुंजी सशस्त्र सेना होगी, जो‘‘1962 युद्ध के आघात से उबर चुकी है और लड़ने के लिए तैयार खड़ी होगी।’’ सबसे बड़ी चिंता यह है कि भारतीय आधुनिकीकरण कार्यक्रम अभी भी एक भावी संभावना ही बना हुआ है। तीनों सेनाओं का कहना है कि आज की परिस्थितियों के अनुसार आधुनिकीकरण का वर्तमान चरण2022 तक ही पूरा हो पाएगा। अर्थात पूरा एक दशक और 10 वर्ष अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में एक लंबा समय होता है। हालाँकि चीनी दृढ़ता या किसी अप्रत्याशित दुर्घटना से युद्ध की सम्भावना बन सकती है लेकिन कुछ अच्छे कारण है जो इस संभावना का विरोध करते हैं।1962 का युद्ध काफी हद तक कम्युनिस्ट पार्टी पर माओ द्वारा अपना नियंत्रण स्थापित करने की आवश्यकता का परिणाम था। यह स्थिति सांस्कृतिक क्रांति की त्रसदी और सोवियत संघ को पीछे छोड़ने की चीनी नीति का परिणाम थी। कुछ सीमा तक इसके लिए तिब्बत पर भारत के इरादों को ‘‘गलत समझना’’ और भारत की टकराव भरी ‘‘अग्रगामी नीति’’ भी जिम्मेदार थी। आज ये सब कारक नदारद हैं। गलत विकल्प/विकल्पों का चयन करें- (i) ‘‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’’ भारत के लिए वास्तविक खतरा है। (ii) 2007 के बाद से भारत-चीन संबंध सकारात्मक है और आगे बढ़ रहे हैं। (iii) 1962 के युद्ध में मिली हार से भारतीय सैनिक हतोत्साहित हो गये थे। कूट- A केवल (i) B (i) और (ii) C (ii) और (iii) D केवल (iii)
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निम्नलिखित दो गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए। 2007 से भारत और चीन के बीच संबंध एक समान नहीं रहे हैं। सीमा विवाद को हल करने को लेकर वार्ता ठप पड़ी है, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी घुसपैठ में वृद्धि हुई है और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के उत्तरी क्षेत्र में चीनी गतिविधियाँ बढ़ गई हैं। इसके साथ-साथ चीन की ‘‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’’ का वास्तविक/कथित खतरा है, जिसका अर्थ चीन द्वारा भारत को चारों ओर से घेरना है। चीन की सैन्य शक्ति में हो रही सतत वृद्धि, तिब्बत में आधारभूत संरचना का विकास और चीन द्वारा की जा रही राष्ट्रवादी बयानबाजी के कारण चीन-भारत के बीच एक और टकराव की छाया मंडरा रही है। लेकिन 2012, 1962 नहीं है। सेना की तैनाती पर नजर रखने वाली विशेषज्ञ वेबसाइट Orbat.com के संपादक रवि रिखी के अनुसार, ‘‘चीनियों ने प्रहार, उकसाने और अपमान करने की जो भी हरकतें की हैं उसने लंबे समय से निष्क्रिय पड़े भारतीय हाथी को जगा दिया है। वह कहते हैं कि भारत अब ऐसे निर्माण की ओर अग्रसर है, जो तिब्बत में चीन के लिए ‘गंभीर भारतीय आक्रामक खतरा’ उत्पन्न कर देगा। मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) शेरू थपलियाल, जिन्होंने लद्दाख में सेना की एक डिविजन का नेतृत्व किया है और पूर्वी सेक्टर में तैनात रहे हैं, कहते हैं कि ‘‘चीनी रणनीति, युद्ध नीति और हथियार प्रणाली की जानकारी’’ होने के कारण भारत आज कहीं बेहतर रूप से तैयार है। उनके विचार से भारतीय सफलता की कुंजी सशस्त्र सेना होगी, जो‘‘1962 युद्ध के आघात से उबर चुकी है और लड़ने के लिए तैयार खड़ी होगी।’’ सबसे बड़ी चिंता यह है कि भारतीय आधुनिकीकरण कार्यक्रम अभी भी एक भावी संभावना ही बना हुआ है। तीनों सेनाओं का कहना है कि आज की परिस्थितियों के अनुसार आधुनिकीकरण का वर्तमान चरण2022 तक ही पूरा हो पाएगा। अर्थात पूरा एक दशक और 10 वर्ष अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में एक लंबा समय होता है। हालाँकि चीनी दृढ़ता या किसी अप्रत्याशित दुर्घटना से युद्ध की सम्भावना बन सकती है लेकिन कुछ अच्छे कारण है जो इस संभावना का विरोध करते हैं।1962 का युद्ध काफी हद तक कम्युनिस्ट पार्टी पर माओ द्वारा अपना नियंत्रण स्थापित करने की आवश्यकता का परिणाम था। यह स्थिति सांस्कृतिक क्रांति की त्रसदी और सोवियत संघ को पीछे छोड़ने की चीनी नीति का परिणाम थी। कुछ सीमा तक इसके लिए तिब्बत पर भारत के इरादों को ‘‘गलत समझना’’ और भारत की टकराव भरी ‘‘अग्रगामी नीति’’ भी जिम्मेदार थी। आज ये सब कारक नदारद हैं। इनमें से क्या सही है? A रवि रिखी सेना की तैनाती पर नजर रखने वाले एक विशेषज्ञ हैं। B पाकिस्तान चीन के साथ मिलकर भारत के सामने रणनीतिक चुनौती पेश करने की साठ-गाँठ कर रहा है। C 1962 के युद्ध के लिए भारत उत्तरदायी नहीं था। D इनमें से कोई नहीं।
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निम्नलिखित दो गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए। 2007 से भारत और चीन के बीच संबंध एक समान नहीं रहे हैं। सीमा विवाद को हल करने को लेकर वार्ता ठप पड़ी है, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी घुसपैठ में वृद्धि हुई है और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के उत्तरी क्षेत्र में चीनी गतिविधियाँ बढ़ गई हैं। इसके साथ-साथ चीन की ‘‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’’ का वास्तविक/कथित खतरा है, जिसका अर्थ चीन द्वारा भारत को चारों ओर से घेरना है। चीन की सैन्य शक्ति में हो रही सतत वृद्धि, तिब्बत में आधारभूत संरचना का विकास और चीन द्वारा की जा रही राष्ट्रवादी बयानबाजी के कारण चीन-भारत के बीच एक और टकराव की छाया मंडरा रही है। लेकिन 2012, 1962 नहीं है। सेना की तैनाती पर नजर रखने वाली विशेषज्ञ वेबसाइट Orbat.com के संपादक रवि रिखी के अनुसार, ‘‘चीनियों ने प्रहार, उकसाने और अपमान करने की जो भी हरकतें की हैं उसने लंबे समय से निष्क्रिय पड़े भारतीय हाथी को जगा दिया है। वह कहते हैं कि भारत अब ऐसे निर्माण की ओर अग्रसर है, जो तिब्बत में चीन के लिए ‘गंभीर भारतीय आक्रामक खतरा’ उत्पन्न कर देगा। मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) शेरू थपलियाल, जिन्होंने लद्दाख में सेना की एक डिविजन का नेतृत्व किया है और पूर्वी सेक्टर में तैनात रहे हैं, कहते हैं कि ‘‘चीनी रणनीति, युद्ध नीति और हथियार प्रणाली की जानकारी’’ होने के कारण भारत आज कहीं बेहतर रूप से तैयार है। उनके विचार से भारतीय सफलता की कुंजी सशस्त्र सेना होगी, जो‘‘1962 युद्ध के आघात से उबर चुकी है और लड़ने के लिए तैयार खड़ी होगी।’’ सबसे बड़ी चिंता यह है कि भारतीय आधुनिकीकरण कार्यक्रम अभी भी एक भावी संभावना ही बना हुआ है। तीनों सेनाओं का कहना है कि आज की परिस्थितियों के अनुसार आधुनिकीकरण का वर्तमान चरण2022 तक ही पूरा हो पाएगा। अर्थात पूरा एक दशक और 10 वर्ष अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में एक लंबा समय होता है। हालाँकि चीनी दृढ़ता या किसी अप्रत्याशित दुर्घटना से युद्ध की सम्भावना बन सकती है लेकिन कुछ अच्छे कारण है जो इस संभावना का विरोध करते हैं।1962 का युद्ध काफी हद तक कम्युनिस्ट पार्टी पर माओ द्वारा अपना नियंत्रण स्थापित करने की आवश्यकता का परिणाम था। यह स्थिति सांस्कृतिक क्रांति की त्रसदी और सोवियत संघ को पीछे छोड़ने की चीनी नीति का परिणाम थी। कुछ सीमा तक इसके लिए तिब्बत पर भारत के इरादों को ‘‘गलत समझना’’ और भारत की टकराव भरी ‘‘अग्रगामी नीति’’ भी जिम्मेदार थी। आज ये सब कारक नदारद हैं। इनमें से क्या सही नहीं है? A दुर्घटनावश भारत और चीन के बीच युद्ध हो सकता है। B मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) शेरू थपलियाल ने1962 के युद्ध मे भाग लिया था। C 1962 के युद्ध के पीछे माओ की राजनीति भी थी। D सांस्कृतिक क्रांति एक असफलता थी।
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  निम्नलिखित दो गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए। पिछले 65 से ज्यादा वर्षों में भारत अपनी सभी विशेषताओं के साथ एक कार्यशील लोकतंत्र के रूप में जीवित रहा है। एक ऐसे देश में जहाँ 1 अरब से अधिक लोग अनेकों विभिन्न भाषाएँ बोलते हैं, ऐसा होना एक चमत्कार के समान है। वे दिन अब चले गये जब भारत को संपेरों और हाथियों का देश कहा जाता था। देश प्रत्यक्ष रूप से समृद्ध हुआ है। जनसंख्या वृद्धि के बावजूद पिछले 15 वर्षों में हर एक वर्ष में प्रति व्यक्ति आय पहले से कही अधिक बढ़ी है। तकनीकी मोर्चे पर भारत अपने स्वयं के उपग्रहों को प्रक्षेपित कर रहा है और हाल ही में उसने चंद्रमा पर एक अत्याधुनिक अंतरिक्षयान ‘चंद्रयान’ को भेजा है। भौगोलिक विस्तार के संदर्भ में भारतीय गणतंत्र दुनिया का साँतवा सबसे बड़ा देश है। यहां एक सिरे पर उत्तर में बर्फ से ढकी हिमाचल की पहाड़ियाँ हैं तो दक्षिण में हरित तटीय केरल भी हैं। उत्तर-पूर्व में ‘सात बहनों’ के वर्षाप्रधान वन हैं और पश्चिमी छोर पर राजस्थान की झुलसाने वाली रेत भी है। समकालीन भारत की एक सबसे महत्वपूर्ण विरासत यह है कि यह विश्व का सबसे बड़ा संसदीय लोकतंत्र है। इसके बावजूद यह जटिल नौकरशाही, भ्रष्टाचार और समाज में संचित तथा वंचित वर्ग के बीच विभाजन से अभी दबा हुआ है। निम्नलिखित में से क्या लेखक के उद्देश्य के रूप में माना जा सकता है? A तार्किक B आलोचनात्मक C उत्साहित D चिन्तित
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  निम्नलिखित दो गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए। पिछले 65 से ज्यादा वर्षों में भारत अपनी सभी विशेषताओं के साथ एक कार्यशील लोकतंत्र के रूप में जीवित रहा है। एक ऐसे देश में जहाँ 1 अरब से अधिक लोग अनेकों विभिन्न भाषाएँ बोलते हैं, ऐसा होना एक चमत्कार के समान है। वे दिन अब चले गये जब भारत को संपेरों और हाथियों का देश कहा जाता था। देश प्रत्यक्ष रूप से समृद्ध हुआ है। जनसंख्या वृद्धि के बावजूद पिछले 15 वर्षों में हर एक वर्ष में प्रति व्यक्ति आय पहले से कही अधिक बढ़ी है। तकनीकी मोर्चे पर भारत अपने स्वयं के उपग्रहों को प्रक्षेपित कर रहा है और हाल ही में उसने चंद्रमा पर एक अत्याधुनिक अंतरिक्षयान ‘चंद्रयान’ को भेजा है। भौगोलिक विस्तार के संदर्भ में भारतीय गणतंत्र दुनिया का साँतवा सबसे बड़ा देश है। यहां एक सिरे पर उत्तर में बर्फ से ढकी हिमाचल की पहाड़ियाँ हैं तो दक्षिण में हरित तटीय केरल भी हैं। उत्तर-पूर्व में ‘सात बहनों’ के वर्षाप्रधान वन हैं और पश्चिमी छोर पर राजस्थान की झुलसाने वाली रेत भी है। समकालीन भारत की एक सबसे महत्वपूर्ण विरासत यह है कि यह विश्व का सबसे बड़ा संसदीय लोकतंत्र है। इसके बावजूद यह जटिल नौकरशाही, भ्रष्टाचार और समाज में संचित तथा वंचित वर्ग के बीच विभाजन से अभी दबा हुआ है। गद्यांश के अनुसार इन दिनों भारत को सपेरो और हाथियों के साथ क्यों नहीं जोड़ा जाता है? A तकनीकी कौशल और आर्थिक समृद्धि के कारण। B बहुसांस्कृतिक और बहुभाषी समाज के कारण। C कार्यशील लोकतंत्र होने के कारण। D चंद्रयान मिशन, जनसंख्या वृद्धि और संसदीय लोकतंत्र के कारण
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  निम्नलिखित दो गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए। पिछले 65 से ज्यादा वर्षों में भारत अपनी सभी विशेषताओं के साथ एक कार्यशील लोकतंत्र के रूप में जीवित रहा है। एक ऐसे देश में जहाँ 1 अरब से अधिक लोग अनेकों विभिन्न भाषाएँ बोलते हैं, ऐसा होना एक चमत्कार के समान है। वे दिन अब चले गये जब भारत को संपेरों और हाथियों का देश कहा जाता था। देश प्रत्यक्ष रूप से समृद्ध हुआ है। जनसंख्या वृद्धि के बावजूद पिछले 15 वर्षों में हर एक वर्ष में प्रति व्यक्ति आय पहले से कही अधिक बढ़ी है। तकनीकी मोर्चे पर भारत अपने स्वयं के उपग्रहों को प्रक्षेपित कर रहा है और हाल ही में उसने चंद्रमा पर एक अत्याधुनिक अंतरिक्षयान ‘चंद्रयान’ को भेजा है। भौगोलिक विस्तार के संदर्भ में भारतीय गणतंत्र दुनिया का साँतवा सबसे बड़ा देश है। यहां एक सिरे पर उत्तर में बर्फ से ढकी हिमाचल की पहाड़ियाँ हैं तो दक्षिण में हरित तटीय केरल भी हैं। उत्तर-पूर्व में ‘सात बहनों’ के वर्षाप्रधान वन हैं और पश्चिमी छोर पर राजस्थान की झुलसाने वाली रेत भी है। समकालीन भारत की एक सबसे महत्वपूर्ण विरासत यह है कि यह विश्व का सबसे बड़ा संसदीय लोकतंत्र है। इसके बावजूद यह जटिल नौकरशाही, भ्रष्टाचार और समाज में संचित तथा वंचित वर्ग के बीच विभाजन से अभी दबा हुआ है। गद्यांश के अंत में लेखक ने क्या निष्कर्ष निकाला है? A लोकतंत्र के रूप में भारत की सफलता अद्भुत है, लेकिन ‘परिपक्वता से काफी’ दूर है। B नौकरशाही और भ्रष्टाचार उन मुख्य कारणों में से एक हैं, जो भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को गिरा रहे हैं। C भारत विरोधाभासों का देश है। D इनमें से कोई नहीं
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  निम्नलिखित दो गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उन पर आधारित प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर पूर्णतया इन गद्यांशों पर ही आधारित होने चाहिए। पिछले 65 से ज्यादा वर्षों में भारत अपनी सभी विशेषताओं के साथ एक कार्यशील लोकतंत्र के रूप में जीवित रहा है। एक ऐसे देश में जहाँ 1 अरब से अधिक लोग अनेकों विभिन्न भाषाएँ बोलते हैं, ऐसा होना एक चमत्कार के समान है। वे दिन अब चले गये जब भारत को संपेरों और हाथियों का देश कहा जाता था। देश प्रत्यक्ष रूप से समृद्ध हुआ है। जनसंख्या वृद्धि के बावजूद पिछले 15 वर्षों में हर एक वर्ष में प्रति व्यक्ति आय पहले से कही अधिक बढ़ी है। तकनीकी मोर्चे पर भारत अपने स्वयं के उपग्रहों को प्रक्षेपित कर रहा है और हाल ही में उसने चंद्रमा पर एक अत्याधुनिक अंतरिक्षयान ‘चंद्रयान’ को भेजा है। भौगोलिक विस्तार के संदर्भ में भारतीय गणतंत्र दुनिया का साँतवा सबसे बड़ा देश है। यहां एक सिरे पर उत्तर में बर्फ से ढकी हिमाचल की पहाड़ियाँ हैं तो दक्षिण में हरित तटीय केरल भी हैं। उत्तर-पूर्व में ‘सात बहनों’ के वर्षाप्रधान वन हैं और पश्चिमी छोर पर राजस्थान की झुलसाने वाली रेत भी है। समकालीन भारत की एक सबसे महत्वपूर्ण विरासत यह है कि यह विश्व का सबसे बड़ा संसदीय लोकतंत्र है। इसके बावजूद यह जटिल नौकरशाही, भ्रष्टाचार और समाज में संचित तथा वंचित वर्ग के बीच विभाजन से अभी दबा हुआ है। गद्यांश के अनुसार समाज में किसे क्रमशः संचित और वंचित कहा जा सकता है? A तकनीकी रूप से उन्नत और अशिक्षित समूहों को। B सरकार और आम नागरिकों को। C धनी वर्ग और निर्धन वर्ग को। D उपरोक्त सभी
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नीचे आठ प्रश्न दिए गए हैं। प्रत्येक प्रश्न में एक स्थिति का वर्णन किया गया है और उसकी चार संभव प्रतिक्रियाएँ दी गयी हैं। आपको जो प्रतिक्रिया सर्वाधिक उचित लगती है उसे चुनिए। प्रत्येक प्रश्न के लिए केवल एक एक प्रतिक्रिया चुननी है। प्रतिक्रियाओं का मूल्यांकन दी गयी स्थिति के अनुरूप प्रतिक्रिया की उपयुक्तता के स्तर पर आधारित होगा। कृपया सभी स्थितियों को हल कीजिए। इन आठ प्रश्नों में गलत उत्तर के लिए कोई नकारात्मक अंक नहीं होगा। अरविंद भेल (BHEL) के ट्रांसफॉर्मर विनिर्माण विभाग में एक इंजीनियर सह फ्रलोर इनफार्मेशन मैनेजर है। उसने देखा कि किन्हीं तीन मेकैनिकों में से एक ट्रांसफार्मर के रिपेयर कार्य में नया तार लगाने के अंतिम महत्वपूर्ण कार्य को नहीं करता है। अरविंद ने उन अन्य दो मेकैनिकों को यह कहते हुए सुना कि अच्छी तरह से तार न लगाने की स्थिति में आग लगने या विस्फोट होने की संभावना है। अरविंद जब इस बात का जिक्र उस मेकैनिक से करता है, तो वह इस पर हँसते हुए कहता है कि इसमें बहुत समय लगता है और यह आवश्यक भी नहीं है। नीचे कुछ विकल्प दिए गए हैं। अरविंद द्वारा किए जाने वाले कार्यों के आधार पर क्रमशः सबसे बेहतर और सबसे निकृष्ट विकल्प को चुनें? a. उस मेकैनिक से कहेगा कि वह ठीक से काम नहीं कर रहा है क्योंकि दूसरे मेकैनिक उसी काम को अलग तरह से करते हैं। b. चूंकि वह स्वयं एक इंजीनियर है अतः वह स्वयं ही इस समस्या का समाधान करने का प्रयास करेगा। c. उत्पादन प्रबंधक को तत्काल इसकी सूचना देगा। d. वह कुछ नहीं करेगा क्योंकि उत्पादन किसी भी कीमत पर नहीं रुकना चाहिए। e. डिजायन इंजीनियर के पास जाएगा और उससे पूछेगा कि वह अंतिम कार्य आवश्यक है या नहीं। कूट- A A और D B C और E C E और D D E और B
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नीचे आठ प्रश्न दिए गए हैं। प्रत्येक प्रश्न में एक स्थिति का वर्णन किया गया है और उसकी चार संभव प्रतिक्रियाएँ दी गयी हैं। आपको जो प्रतिक्रिया सर्वाधिक उचित लगती है उसे चुनिए। प्रत्येक प्रश्न के लिए केवल एक एक प्रतिक्रिया चुननी है। प्रतिक्रियाओं का मूल्यांकन दी गयी स्थिति के अनुरूप प्रतिक्रिया की उपयुक्तता के स्तर पर आधारित होगा। कृपया सभी स्थितियों को हल कीजिए। इन आठ प्रश्नों में गलत उत्तर के लिए कोई नकारात्मक अंक नहीं होगा। ड्यूटी की उपेक्षा करने के लिए हाल ही में हुए पुलिस के विरोध के मद्देनजर राज्य के पुलिस विभाग ने ‘‘पुलिस किस प्रकार आम नागरिकों के लिए सहायक हो सकती है?’’ विषय पर एक जागरूकता अभियान शुरू किया है। आपको इस अभियान के लिए जनसंपर्क अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है। निम्नलिखित में से इस अभियान में शामिल करने के लिए आप कौन-सी प्राथमिकताओं को चुनेंगे? a. ऑनलाइन एफ-आई-आर- किस प्रकार दर्ज कराई जाए? b. भारतीय दंड संहिता (आई-पी-सी-) के महत्वपूर्ण अधिनियम। c. दंगे की स्थिति में क्या करना चाहिए। d. महिला हेल्पलाइन नंबर का प्रयोग किस प्रकार किया जाए? e. ट्रैफिक नियमों का पालन किस प्रकार किया जाए? f. सामुदायिक पुलिस। g. स्थानीय पुलिस थाने पर होने वाले भ्रष्टाचार पर किस प्रकार रोक लगाई जाए? कूट- A A, B, D और E B B, D, E, F और G C A, D, E और F D उपरोक्त सभी
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नीचे आठ प्रश्न दिए गए हैं। प्रत्येक प्रश्न में एक स्थिति का वर्णन किया गया है और उसकी चार संभव प्रतिक्रियाएँ दी गयी हैं। आपको जो प्रतिक्रिया सर्वाधिक उचित लगती है उसे चुनिए। प्रत्येक प्रश्न के लिए केवल एक एक प्रतिक्रिया चुननी है। प्रतिक्रियाओं का मूल्यांकन दी गयी स्थिति के अनुरूप प्रतिक्रिया की उपयुक्तता के स्तर पर आधारित होगा। कृपया सभी स्थितियों को हल कीजिए। इन आठ प्रश्नों में गलत उत्तर के लिए कोई नकारात्मक अंक नहीं होगा। सूचना और प्रसारण मंत्रालय आपको ‘‘इलेक्ट्रॅानिक और प्रिंट मीडिया की सेंसरशिप पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन’’ में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए कहता है। मंत्रालय आपसे निम्नलिखित प्राथमिकताओं में से भारत के लिए पूर्व निर्धारित मतों को चुनने के लिए कहता हैः A- किसी भी तरह की पूर्ण सेंसरशिप का प्रावधान नहीं क्योंकि हम एक मुक्त दुनिया में रह रहे हैं। B- जैसा कि हमारे संविधान में कहा गया है वाक् एवं अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता का होना। C- सेंसरशिप आवश्यक है लेकिन सोशल नेटवर्किंग युग में संभव नहीं है। D- इलैक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया को अपनी विषयवस्तु की प्रकाशन संबंधी स्वतत्रता दी जाए लेकिन कुछ युक्तियुक्त निर्बन्धन आवश्यक हैं। उपरोक्त वर्णित पूर्व-निर्धारित मतों में से आपकी राय में कौन-सी सबसे बेहतर प्राथमिकता/प्राथमिकताएँ होगी/होंगी? A दोनों A और B B केवल D C दोनों C और D D इनमें से कोई नहीं
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नीचे आठ प्रश्न दिए गए हैं। प्रत्येक प्रश्न में एक स्थिति का वर्णन किया गया है और उसकी चार संभव प्रतिक्रियाएँ दी गयी हैं। आपको जो प्रतिक्रिया सर्वाधिक उचित लगती है उसे चुनिए। प्रत्येक प्रश्न के लिए केवल एक एक प्रतिक्रिया चुननी है। प्रतिक्रियाओं का मूल्यांकन दी गयी स्थिति के अनुरूप प्रतिक्रिया की उपयुक्तता के स्तर पर आधारित होगा। कृपया सभी स्थितियों को हल कीजिए। इन आठ प्रश्नों में गलत उत्तर के लिए कोई नकारात्मक अंक नहीं होगा। हाल ही में आपको एक जनजातीय जनसंख्या बाहुल्य क्षेत्र के जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है। आपको पता चलता है कि जनजातियों का साक्षरता स्तर राष्ट्रीय औसत की तुलना में कम है। इन जनजातियो को शिक्षित करने के लिए आप संप्रेषण के निम्नलिखित में से किन उपायों को अपनाएँगे? A- एक सामुदायिक शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन करेंगे। B- उन्हें शिक्षा के फायदों के बारे में बताएँगे। C- जनजातीय नेताओं से व्यक्तिगत रूप से बात करेंगे ताकि वे जनजातीय सदस्यों को शिक्षा का महत्व समझा सकें। D- एक सांस्कृतिक प्रशिक्षण कार्यशाला कैम्प लगाएँगे। E- जनजातीय क्षेत्र में कंप्यूटर प्रशिक्षण कार्यशाला कैम्प को शुरू करेंगे। कूट- A A, B, C और E B A, B और C C उपरोक्त सभी D कुछ नहीं करेंगे क्योंकि जनजातियाँ अपने तरीके से शिक्षित होंगी और उनके लिए औपचारिक शिक्षा की आवश्यकता नहीं है।
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नीचे आठ प्रश्न दिए गए हैं। प्रत्येक प्रश्न में एक स्थिति का वर्णन किया गया है और उसकी चार संभव प्रतिक्रियाएँ दी गयी हैं। आपको जो प्रतिक्रिया सर्वाधिक उचित लगती है उसे चुनिए। प्रत्येक प्रश्न के लिए केवल एक एक प्रतिक्रिया चुननी है। प्रतिक्रियाओं का मूल्यांकन दी गयी स्थिति के अनुरूप प्रतिक्रिया की उपयुक्तता के स्तर पर आधारित होगा। कृपया सभी स्थितियों को हल कीजिए। इन आठ प्रश्नों में गलत उत्तर के लिए कोई नकारात्मक अंक नहीं होगा। आप अपने एक साथी को एक नये कर्मचारी को अकेले में प्रताड़ित करते हुए देख लेते हैं। विभाग में उत्पीड़न के विरूद्ध कड़े नियम हैं, लेकिन आप पहले ऐसे हुए किसी भी मामले के बारे में नहीं जानते हैं। उस सहकर्मी की विभाग में अच्छी प्रतिष्ठा है और वह एक लंबे समय से सेवारत है। निम्नलिखित विकल्पों को पढ़ें और इस एकतरफा संप्रेषण को सुनने के बाद निम्नलिखित में से चुनें- A- इस बहस में हस्तक्षेप कर अपने साथी को उत्पीड़न बंद करने के लिये कहेंगे। B- उस नये कर्मचारी से बात कर जो आपने सुना वह उसे बतायेंगे और विभाग की उत्पीड़न के विरुद्ध नीति से उसे अवगत करेंगे। C- अपने साथी को जो आपने सुना उसके बारे में बाद में बताएंगे और विभाग की उत्पीड़न के विरुद्ध नीति से उसे अवगत करायँगे। D- विभागीय अनुशासन प्राधिकारी के पास जाकर जो आपने सुना और जो भी उसमें शामिल था, उसके बारे में बताएँगे। E- विभाग के प्रमुख के पास जाकर जो आपने सुना और जो भी उसमें शामिल था, उसके बारे में बताएंगे। इस संप्रेषण को सुनने के बाद आपके द्वारा की जाने वाली कार्यवाहियों में क्रमशः कौन सबसे बेहतर और कौन सबसे निकृष्ट हैं? A B और E B A और C C E और B D C और A
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Directions : Read the following passage carefully to answer these questions that follow in the content of the passage. Certain words are printed in bold in the passage to help you locate then while answering some of questions. Administration is, needed an art by itself, demanding on the part of the administrator's special knowledge, training and experience in the management of public affairs and a masterly technique and skill in handling people. Administration, ultimately, means the ability to handle people farily and firmly with understanding and sympathy. The more an administrator knows about the people, the better will be able to get along with them and the better will his administration. It is true that he rules best who rules lest. An able administrator will not rely so much on the powers and privileges vested in him to discharge his duties as on his moral strength, character, influence and example. He knows that he is a leader of men and must lead going infront and no drive them from behind. There is only one way to get anybody to do anything and that is by making the other person want to do it, i.e., by motivating him. You can make an employee you his co-operation by threatening to dismiss him but this is a crude method with undesirable repercussions. The desire for a feeling of importance is one of the chief distinguishing differences between man and animal. It is this feeling that inspires and encourages man to strive for  self-improvment and success in life. It an uneducated,k poverty-stricken, grovery clerk, Abraham Lincon, ultimately became president of the United State of America, the driving force was this desire for a feeling of importance. It was the same feeling that inspired Charles Dickens to write immortable  novels. Common goals are desriable, but these A do not ensure international co-operation B lead to unnecessary tension C encourage rivalry between super powers D lead to destruction of mankind
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Directions : Read the following passage carefully to answer these questions that follow in the content of the passage. Certain words are printed in bold in the passage to help you locate then while answering some of questions. Administration is, needed an art by itself, demanding on the part of the administrator's special knowledge, training and experience in the management of public affairs and a masterly technique and skill in handling people. Administration, ultimately, means the ability to handle people farily and firmly with understanding and sympathy. The more an administrator knows about the people, the better will be able to get along with them and the better will his administration. It is true that he rules best who rules lest. An able administrator will not rely so much on the powers and privileges vested in him to discharge his duties as on his moral strength, character, influence and example. He knows that he is a leader of men and must lead going infront and no drive them from behind. There is only one way to get anybody to do anything and that is by making the other person want to do it, i.e., by motivating him. You can make an employee you his co-operation by threatening to dismiss him but this is a crude method with undesirable repercussions. The desire for a feeling of importance is one of the chief distinguishing differences between man and animal. It is this feeling that inspires and encourages man to strive for  self-improvment and success in life. It an uneducated,k poverty-stricken, grovery clerk, Abraham Lincon, ultimately became president of the United State of America, the driving force was this desire for a feeling of importance. It was the same feeling that inspired Charles Dickens to write immortable  novels. The commonwealth is characterised by- A the failure of the constituents to work for the same goals B the racial nature of its membership C uniform lack of moral standards D constant redefining of objectives
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Directions : Read the following passage carefully to answer these questions that follow in the content of the passage. Certain words are printed in bold in the passage to help you locate then while answering some of questions. Administration is, needed an art by itself, demanding on the part of the administrator's special knowledge, training and experience in the management of public affairs and a masterly technique and skill in handling people. Administration, ultimately, means the ability to handle people farily and firmly with understanding and sympathy. The more an administrator knows about the people, the better will be able to get along with them and the better will his administration. It is true that he rules best who rules lest. An able administrator will not rely so much on the powers and privileges vested in him to discharge his duties as on his moral strength, character, influence and example. He knows that he is a leader of men and must lead going infront and no drive them from behind. There is only one way to get anybody to do anything and that is by making the other person want to do it, i.e., by motivating him. You can make an employee you his co-operation by threatening to dismiss him but this is a crude method with undesirable repercussions. The desire for a feeling of importance is one of the chief distinguishing differences between man and animal. It is this feeling that inspires and encourages man to strive for  self-improvment and success in life. It an uneducated,k poverty-stricken, grovery clerk, Abraham Lincon, ultimately became president of the United State of America, the driving force was this desire for a feeling of importance. It was the same feeling that inspired Charles Dickens to write immortable  novels. The super powers may claim to have the same laudable objectives, but- A do not work earnestly to achieve them B undo each other's efforts C still act against the interests of mankind D do not see them in the right perspective
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Directions : Read the following passage carefully to answer these questions that follow in the content of the passage. Certain words are printed in bold in the passage to help you locate then while answering some of questions. Administration is, needed an art by itself, demanding on the part of the administrator's special knowledge, training and experience in the management of public affairs and a masterly technique and skill in handling people. Administration, ultimately, means the ability to handle people farily and firmly with understanding and sympathy. The more an administrator knows about the people, the better will be able to get along with them and the better will his administration. It is true that he rules best who rules lest. An able administrator will not rely so much on the powers and privileges vested in him to discharge his duties as on his moral strength, character, influence and example. He knows that he is a leader of men and must lead going infront and no drive them from behind. There is only one way to get anybody to do anything and that is by making the other person want to do it, i.e., by motivating him. You can make an employee you his co-operation by threatening to dismiss him but this is a crude method with undesirable repercussions. The desire for a feeling of importance is one of the chief distinguishing differences between man and animal. It is this feeling that inspires and encourages man to strive for  self-improvment and success in life. It an uneducated,k poverty-stricken, grovery clerk, Abraham Lincon, ultimately became president of the United State of America, the driving force was this desire for a feeling of importance. It was the same feeling that inspired Charles Dickens to write immortable  novels. International co-operation can come about, if- A nations become aware of their own failings B charitable organisation are encouraged C different races are treated on the basis of equality D nations guility of immoral actions are exposed
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