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General Studies II

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Previous Year - 2013

Question
74 out of 80
 

A stout old lady was walking with her basket down thè middle of a street in Petrograd to the great confusion of the traffìc and no small peril to herself. It was pointed out to her that the pavement was the place for foot-passengers, but she replied, “I’m going to walk where I like. We’ve got liberty now.” It did not occur to the dear lady that if liberty entitled the foot-passenger to walk down the middle of the road it also entitled the taxi-driver to drive on the pavement, and that the end of such liberty would be universal chaos. Everything would be getting in everybody else’s way and nobody would get anywhere. Individual liberty would have become social anarchy.


The old lady failed to realise that



A she was not really free.

B her liberty was not unlimited.

C she was an old person.

D roads are made for motor vehicles only.

Ans. B

Previous Year - 2013 Flashcard List

80 flashcards
1)
निम्नलिखित चार परिच्छेदों को पढ़िए और उसके उपरांत प्रत्येक परिच्छेद के आधार पर दिए गए प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन प्रश्नांशों के आपके उत्तर केवल परिच्छेदों पर ही आधारित होने चाहिए। हाल के वर्षों में, लोकतंत्र के विषय को लेकर उसके आस-पास जिस प्रकार से शब्दाडंबर प्रयुक्त हुए हैं, उसके फलस्वरूप यह विषय अत्यंत संभ्रमपूर्ण हो गया है। गैर-पश्चिमी विश्व के देशों पर लोकतंत्र ‘अधिरोपित’ करने के समर्थकों (वस्तुतः इन देशों के ‘स्वहित’ में ही) और ऐसे ‘अधिरोपण’ के विरोधियों (उन देशों के ‘अपने तौर-तरीकों’ के लिए समादर होने के कारण) के बीच एक बढ़ता हुआ, विचित्र रूप से भ्रांत द्विभाजन बन गया है। किन्तु इन दोनों ही पक्षों के द्वारा प्रयुक्त ‘अधिरोपण’ की पूरी भाषा असाधारण रूप से असंगत है, क्योंकि इससे यह अस्पष्ट धारणा बनती है कि लोकतंत्र अनन्य रूप से पश्चिमी देशों से ही सम्बन्ध रखता है, यह मानते हुए, कि यह सर्वोत्कृष्टता से ‘पश्चिमी’ विचार है जो केवल पश्चिम में ही जन्मा और फला-फूला। किन्तु इस अभिधारणा को, और इससे विश्व में लोकतांत्रिक प्रथा की संभावना के बारे में जनित निराशावाद को, औचित्यपूर्ण ठहराना बहुत कठिन होगा। प्राचीन भारत में स्थानीय लोकतंत्र के अनेक प्रयोग किए गए है। सचमुच विश्व में लोकतंत्र की जड़ों को समझने के लिए हमें विश्व के विभिन्न भागों में हुई जन-सहभागिता और लोक-विवेचन के इतिहास में रुचि लेनी होगी। यूरोपीय और अमेरिकी क्रमविकास के आधार पर हमें मात्र लोकतंत्र के विचारण के परे देखना होगा। यदि हम लोकतंत्र को पश्चिम का एक प्रकार का विशेषीकृत सांस्कृतिक उत्पाद मान लें, तो अरस्तू ने दूरगामी अंतर्दृष्टि के साथ सहभागी जीवन की जिन व्यापक मांगों के विषय में बात की थी, उन्हें समझने में हम असफल हो जाएंगे। वास्तव में इस पर संदेह नहीं किया जा सकता कि लोकतंत्र की समकालीन प्रथा का सांस्थानिक ढ़ांचा अधिकांश रूप में यूरोप और अमेरिका के गत कुछ शताब्दियों में हुए अनुभवों की देन है। इसे पहचानना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि सांस्थानिक प्ररूपों में ये विकास अत्यधिक नवपरिवर्तनशील और अंततः प्रभावी हुए। इसमें कोई संशय नहीं हो सकता कि यहाँ एक प्रमुख पश्चिमी उपलब्धि है। उपर्युक्त परिच्छेद में यथा-उल्लिखित, निम्नलिखित में से कौन-सा, लोकतंत्र के दृष्टिकोण के सर्वाधिक निकट है? A लोकतंत्र का विषय, इसे गैर-पश्चिमी देशों के लिए ‘अन्यदेशीय’, पश्चिमी अवधारणा के रूप में चित्रित करने की इच्छा के कारण संभ्रमपूर्ण है। B लोकतंत्र के अधिरोपण की भाषा अनुपयुक्त है। तथापि, इस अवधारणा पर गैर-पश्चिमी समाज के ‘अपने तौर-तरीकों’ के सांस्कृतिक पृष्ठपट पर विचार करने की आवश्यकता है। C यद्यपि लोकतंत्र अनन्य रूप से पश्चिम से जुड़ा, मूलतः पश्चिमी विचार नहीं है, फिर भी, प्रचलित लोकतांत्रिक प्रथाओं की संस्थागत संरचना उन्हीं का योगदान है। D उपर्युक्त A, B और C में से कोई भी कथन सही नहीं है।
2)
निम्नलिखित चार परिच्छेदों को पढ़िए और उसके उपरांत प्रत्येक परिच्छेद के आधार पर दिए गए प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन प्रश्नांशों के आपके उत्तर केवल परिच्छेदों पर ही आधारित होने चाहिए। हाल के वर्षों में, लोकतंत्र के विषय को लेकर उसके आस-पास जिस प्रकार से शब्दाडंबर प्रयुक्त हुए हैं, उसके फलस्वरूप यह विषय अत्यंत संभ्रमपूर्ण हो गया है। गैर-पश्चिमी विश्व के देशों पर लोकतंत्र ‘अधिरोपित’ करने के समर्थकों (वस्तुतः इन देशों के ‘स्वहित’ में ही) और ऐसे ‘अधिरोपण’ के विरोधियों (उन देशों के ‘अपने तौर-तरीकों’ के लिए समादर होने के कारण) के बीच एक बढ़ता हुआ, विचित्र रूप से भ्रांत द्विभाजन बन गया है। किन्तु इन दोनों ही पक्षों के द्वारा प्रयुक्त ‘अधिरोपण’ की पूरी भाषा असाधारण रूप से असंगत है, क्योंकि इससे यह अस्पष्ट धारणा बनती है कि लोकतंत्र अनन्य रूप से पश्चिमी देशों से ही सम्बन्ध रखता है, यह मानते हुए, कि यह सर्वोत्कृष्टता से ‘पश्चिमी’ विचार है जो केवल पश्चिम में ही जन्मा और फला-फूला। किन्तु इस अभिधारणा को, और इससे विश्व में लोकतांत्रिक प्रथा की संभावना के बारे में जनित निराशावाद को, औचित्यपूर्ण ठहराना बहुत कठिन होगा। प्राचीन भारत में स्थानीय लोकतंत्र के अनेक प्रयोग किए गए है। सचमुच विश्व में लोकतंत्र की जड़ों को समझने के लिए हमें विश्व के विभिन्न भागों में हुई जन-सहभागिता और लोक-विवेचन के इतिहास में रुचि लेनी होगी। यूरोपीय और अमेरिकी क्रमविकास के आधार पर हमें मात्र लोकतंत्र के विचारण के परे देखना होगा। यदि हम लोकतंत्र को पश्चिम का एक प्रकार का विशेषीकृत सांस्कृतिक उत्पाद मान लें, तो अरस्तू ने दूरगामी अंतर्दृष्टि के साथ सहभागी जीवन की जिन व्यापक मांगों के विषय में बात की थी, उन्हें समझने में हम असफल हो जाएंगे। वास्तव में इस पर संदेह नहीं किया जा सकता कि लोकतंत्र की समकालीन प्रथा का सांस्थानिक ढ़ांचा अधिकांश रूप में यूरोप और अमेरिका के गत कुछ शताब्दियों में हुए अनुभवों की देन है। इसे पहचानना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि सांस्थानिक प्ररूपों में ये विकास अत्यधिक नवपरिवर्तनशील और अंततः प्रभावी हुए। इसमें कोई संशय नहीं हो सकता कि यहाँ एक प्रमुख पश्चिमी उपलब्धि है। परिच्छेद के संदर्भ में, निम्नलिखित धारणाएँ बनाई गई हैं: 1- अनेक गैर-पश्चिमी देश लोकतंत्र लाने में असफल रहे हैं, क्योंकि वे लोकतंत्र को पश्चिम का विशिष्ट सांस्कृतिक उत्पाद होने के रूप में देखते हैं। 2- पश्चिमी देश हमेशा गैर-पश्चिमी देशों पर लोकतंत्र अधिरोपित करने का प्रयास करते हैं। कौन-सी उपर्युक्त धारणा/धारणाएँ वैध है/हैं? A केवल1B केवल 2 C 1 और 2 दोनोंD न तो 1 और न ही 2
3)
  निगमित अभिशासन कुछ सिद्धांतों पर आधारित होता है, जैसे कि, समस्त निष्ठा और निष्पक्षता से कारोबार का संचालन करना, सभी संव्यवहारों में पारदर्शी होना, सभी आवश्यक प्रकटनों और निर्णयों को करना, देश के सभी कानूनों का अनुपालन करना, पणधारियों के प्रति जवाबदेह और जिम्मेदार होना तथा नैतिक रीति से कारोबार के संचालन की प्रतिबद्धता रखना। निगमित अभिशासन के विषय में जिस दूसरी बात पर विशेष बल दिया गया है, वह है, कम्पनी का प्रबंधन करते समय नियंत्रण करने वालों द्वारा व्यक्तिगत एवं निगमित निधियों के बीच भेद करने की क्षमता। मूलतः, जो कम्पनी अच्दे निगमित अभिशासन के लिए जानी जाती है, उसके साथ विश्वास का एक स्तर जुड़ा होता है। बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों के एक सक्रिय समूह का होना बाजार में विश्वास सुनिश्चित करने में बहुत बड़ा योगदान करता है। निगमित अभिशासन को उस एक मानदण्ड के रूप में जाना जाता है, जिस पर विदेशी संस्थागत निवेशक, यह निर्णय करते समय कि किन कम्पनियों में निवेश किया जाए, अधिकाधिक निर्भर होते जा रहे हैं। इसे उस कम्पनी की शेयर कीमतों पर सकारात्मक प्रभाव रखने वाले के रूप में भी जाना जाता है। निगमित अभिशासन के मोरचे पर स्वच्छ छवि का रखना कम्पनियों के लिए अपेक्षाकृत अधिक उचित लागतों पर पूँजी उद्गम करने को भी सुगमतर बना सकता है। दुर्भाग्यवश, निगमित अभिशासन बहुधा किसी बड़े घोटाले के प्रकटन के बाद ही चर्चा के केन्द्र में आता है। परिच्छेद के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा/से, अच्छे निगमित अभिशासन का/के व्यवहार होना/होने चाहिए? 1- कम्पनियों को हमेशा देश के श्रम व कर कानूनों का अनुपालन करना चाहिए। 2- देश की प्रत्येक कम्पनी के बोर्ड में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु, स्वतंत्र निदेशकों में से एक, सरकारी प्रतिनिधि होना चाहिए। 3- कम्पनी के प्रबंधक को अपनी व्यक्तिगत निधियों का कम्पनी में कभी भी निवेश नहीं करना चाहिए। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए। A केवल 1 B केवल 2 और 3 C केवल 1 और 3 D 1, 2 और 3
4)
  निगमित अभिशासन कुछ सिद्धांतों पर आधारित होता है, जैसे कि, समस्त निष्ठा और निष्पक्षता से कारोबार का संचालन करना, सभी संव्यवहारों में पारदर्शी होना, सभी आवश्यक प्रकटनों और निर्णयों को करना, देश के सभी कानूनों का अनुपालन करना, पणधारियों के प्रति जवाबदेह और जिम्मेदार होना तथा नैतिक रीति से कारोबार के संचालन की प्रतिबद्धता रखना। निगमित अभिशासन के विषय में जिस दूसरी बात पर विशेष बल दिया गया है, वह है, कम्पनी का प्रबंधन करते समय नियंत्रण करने वालों द्वारा व्यक्तिगत एवं निगमित निधियों के बीच भेद करने की क्षमता। मूलतः, जो कम्पनी अच्दे निगमित अभिशासन के लिए जानी जाती है, उसके साथ विश्वास का एक स्तर जुड़ा होता है। बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों के एक सक्रिय समूह का होना बाजार में विश्वास सुनिश्चित करने में बहुत बड़ा योगदान करता है। निगमित अभिशासन को उस एक मानदण्ड के रूप में जाना जाता है, जिस पर विदेशी संस्थागत निवेशक, यह निर्णय करते समय कि किन कम्पनियों में निवेश किया जाए, अधिकाधिक निर्भर होते जा रहे हैं। इसे उस कम्पनी की शेयर कीमतों पर सकारात्मक प्रभाव रखने वाले के रूप में भी जाना जाता है। निगमित अभिशासन के मोरचे पर स्वच्छ छवि का रखना कम्पनियों के लिए अपेक्षाकृत अधिक उचित लागतों पर पूँजी उद्गम करने को भी सुगमतर बना सकता है। दुर्भाग्यवश, निगमित अभिशासन बहुधा किसी बड़े घोटाले के प्रकटन के बाद ही चर्चा के केन्द्र में आता है। परिच्छेद के अनुसार, निम्नलिखित में से, अच्छे निगमित अभिशासन का/के प्रमुख लाभ क्या है/हैं? 1- अच्छा निगमित अभिशासन कम्पनी की शेयर कीमत में वृद्धि कर देता है। 2- अच्छा निगमित अभिशासन युक्त कम्पनी हमेशा अपने व्यवसाय आवर्त में तेजी से वृद्धि करती है। 3- अच्छा निगमित अभिशासन, विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा कम्पनी खरीदने में निर्णय लेने हेतु, प्रमुख मानदण्ड होता है। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए। A केवल1 B केवल 2 और 3 C केवल 1 और 3 D 1, 2 और 3
5)
  कुपोषण छह माह से दो साल की आयु के बीच होना सर्वाधिक आम है। बड़े बच्चे की तुलना में छोटे बच्चे की भोजन की आवश्यकता कम होने के बावजूद ऐसा होता है। बहुधा कुपोषण का कारण गरीबी मानी जाती है, परंतु यह पाया गया है कि ऐसे परिवारों में भी जहाँ वयस्क पर्याप्त मात्र में भोजन ग्रहण करते हैं, पाँच वर्ष से कम आयु के 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे पर्याप्त आहार नहीं लेते। किसी और द्वारा खाना खिलाने हेतु बच्चे की निर्भरता कुपोषण के लिए प्राथमिक रूप से उत्तरदायी है। बहुधा माँ कामकाजी होती है और छोटे बच्चे को खाना खिलाने की जिम्मेदारी उसके बड़े भाई-बहन पर छोड़ दी जाती है। इसलिए, बच्चे की खाद्य आवश्यकताओं के, और उन्हें कैसे पूरा किया जाए, इसके संबंध में जागरूकता को बढ़ाना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। परिच्छेद के अनुसार, बच्चों में कुपोषण कैसे घटाया जा सकता है? A यदि बच्चे भोजन की नियमित खुराक ग्रहण करें। B जब वे पाँच वर्ष की आयु पूरी कर लें। C यदि छोटे बच्चों की खाद्य आवश्यकताएँ ज्ञात हों। D यदि छोटे बच्चों को भोजन कराने की जिम्मेदारी वयस्कों को दे दी जाए।
6)
  कुपोषण छह माह से दो साल की आयु के बीच होना सर्वाधिक आम है। बड़े बच्चे की तुलना में छोटे बच्चे की भोजन की आवश्यकता कम होने के बावजूद ऐसा होता है। बहुधा कुपोषण का कारण गरीबी मानी जाती है, परंतु यह पाया गया है कि ऐसे परिवारों में भी जहाँ वयस्क पर्याप्त मात्र में भोजन ग्रहण करते हैं, पाँच वर्ष से कम आयु के 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे पर्याप्त आहार नहीं लेते। किसी और द्वारा खाना खिलाने हेतु बच्चे की निर्भरता कुपोषण के लिए प्राथमिक रूप से उत्तरदायी है। बहुधा माँ कामकाजी होती है और छोटे बच्चे को खाना खिलाने की जिम्मेदारी उसके बड़े भाई-बहन पर छोड़ दी जाती है। इसलिए, बच्चे की खाद्य आवश्यकताओं के, और उन्हें कैसे पूरा किया जाए, इसके संबंध में जागरूकता को बढ़ाना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। लेखक के अनुसार, कुपोषण का मुख्य कारण गरीबी नहीं है, बल्कि यह तथ्य कि 1- छोटे बच्चों की देखरेख करना कामकाजी माताओं की प्राथमिकता नहीं होती। 2- लोक स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा पोषण संबंधी जरूरतों की जानकारी का प्रचार नहीं किया जाता। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए। A केवल 1 B केवल 2 C 1 और 2 दोनों D न तो 1 और न ही 2
7)
  अनेक आनुभविक अध्ययनों से पता चलता है कि कृषक जोखिम उठाने के अनिच्छुक होते हैं, तद्यापि अनेक मामलों में ऐसा मामूली रूप से पाया जाता हैं। यह दर्शाने के भी प्रमाण हैं कि कृषकों की जोखिम उठाने की अनिच्छुकता ऐसे फसल प्रतिरूपों और निविष्टि उपयोग में परिणत होती है, जो आय को अधिकतम करने के स्थान पर जोखिम को कम करने हेतु अभिकल्पित हैं। कृषक, कृषिगत जोखिमो को संभालने और उनका सामना करने के लिए अनेक रणनीतियाँ अपनाते हैं। इनके अंतर्गत, फसल एवं जोतों का विविधीकरण, गैर-कृषि रोजगार, माल का भंडारण एवं परिवार के सदस्यों का रणनीतिक प्रवास, इत्यादि पद्धतियां सम्मिलित हैं। बँटाई काश्तकारी से लेकर नातेदारी, विस्तारित परिवार तथा अनौपचारिक ट्टण अभिकरण जैसी संस्थाएँ भी हैं। कृषकों द्वारा जोखिम उठाने में एक प्रमुख बाधा यह है कि एक ही प्रकार के जोखिम उस क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसानों को प्रभावित कर सकते हैं। आनुभविक अध्ययन यह दिखाते हैं कि परंपरागत तरीके पर्याप्त नहीं हैं। अतः नीतिगत हस्तक्षेप आवश्यक हैं, विशेषकर ऐसे उपाय जो विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रें में एकसमान कारगर हों। नीतियों का उद्देश्य प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से कृषिगत जोखिमों का मुकाबला करना हो सकता है। विशेषतः जोखिम को ध्यान में रखकर बनी नीतियों के उदाहरण हैं, फसलों का बीमा, कीमत स्थिरीकरण और ऐसी किस्मों का विकास जिनमें कीटों और बीमारियों के प्रति प्रतिरोधशक्ति हो। सिचाई, आर्थिक सहायता प्राप्त ट्टण एवं सूचना तक पहुँच ऐसी नीतियाँ हैं जो जोखिम को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं। विशेषतः जोखिम पर ध्यान देने वाली ऐसी कोई अकेली नीति नहीं है जो इसे घटाने हेतु पर्याप्त हो और जिसके पार्श्व-प्रभाव न हों, जबकि ऐसी नीतियाँ जो विशेष तौर पर जोखिम से सम्बन्ध न हों, सामान्य स्थिति पर प्रभाव डालती हैं एवं जोखिमों को केवल अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं। फसल बीमा पर, प्रत्यक्ष रूप से कृषिगत जोखिम को साधने के एक नीतिगत उपाय के रूप में, भारत एवं अन्य अनेक विकासशील देशों के संदर्भ में, सावधानीपूर्वक विचार करने की आवश्यकता है-क्योंकि बहुसंख्यक कृषक वर्षा-सिचित कृषि पर निर्भर हैं और अनेक क्षेत्रें में उनकी आय अस्थिरता का मुख्य कारण उपज में अस्थिरता है। कृषि में जोखिम घटाने हेतु नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता इसलिए है, क्योंकि A कृषक जोखिम उठाने के नितान्त अनिच्छुक होते हैं। B कृषक यह नहीं जानते कि जोखिमों को किस प्रकार घटाया जाए। C कृषकों द्वारा अपनाए गए तरीके और जोखिम में सहभागिता करने वाली वर्तमान संस्थाएँ पर्याप्त नहीं हैं। D बहुसंख्यक कृषक वर्षा-सिचित कृषि पर निर्भर हैं।
8)
  अनेक आनुभविक अध्ययनों से पता चलता है कि कृषक जोखिम उठाने के अनिच्छुक होते हैं, तद्यापि अनेक मामलों में ऐसा मामूली रूप से पाया जाता हैं। यह दर्शाने के भी प्रमाण हैं कि कृषकों की जोखिम उठाने की अनिच्छुकता ऐसे फसल प्रतिरूपों और निविष्टि उपयोग में परिणत होती है, जो आय को अधिकतम करने के स्थान पर जोखिम को कम करने हेतु अभिकल्पित हैं। कृषक, कृषिगत जोखिमो को संभालने और उनका सामना करने के लिए अनेक रणनीतियाँ अपनाते हैं। इनके अंतर्गत, फसल एवं जोतों का विविधीकरण, गैर-कृषि रोजगार, माल का भंडारण एवं परिवार के सदस्यों का रणनीतिक प्रवास, इत्यादि पद्धतियां सम्मिलित हैं। बँटाई काश्तकारी से लेकर नातेदारी, विस्तारित परिवार तथा अनौपचारिक ट्टण अभिकरण जैसी संस्थाएँ भी हैं। कृषकों द्वारा जोखिम उठाने में एक प्रमुख बाधा यह है कि एक ही प्रकार के जोखिम उस क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसानों को प्रभावित कर सकते हैं। आनुभविक अध्ययन यह दिखाते हैं कि परंपरागत तरीके पर्याप्त नहीं हैं। अतः नीतिगत हस्तक्षेप आवश्यक हैं, विशेषकर ऐसे उपाय जो विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रें में एकसमान कारगर हों। नीतियों का उद्देश्य प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से कृषिगत जोखिमों का मुकाबला करना हो सकता है। विशेषतः जोखिम को ध्यान में रखकर बनी नीतियों के उदाहरण हैं, फसलों का बीमा, कीमत स्थिरीकरण और ऐसी किस्मों का विकास जिनमें कीटों और बीमारियों के प्रति प्रतिरोधशक्ति हो। सिचाई, आर्थिक सहायता प्राप्त ट्टण एवं सूचना तक पहुँच ऐसी नीतियाँ हैं जो जोखिम को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं। विशेषतः जोखिम पर ध्यान देने वाली ऐसी कोई अकेली नीति नहीं है जो इसे घटाने हेतु पर्याप्त हो और जिसके पार्श्व-प्रभाव न हों, जबकि ऐसी नीतियाँ जो विशेष तौर पर जोखिम से सम्बन्ध न हों, सामान्य स्थिति पर प्रभाव डालती हैं एवं जोखिमों को केवल अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं। फसल बीमा पर, प्रत्यक्ष रूप से कृषिगत जोखिम को साधने के एक नीतिगत उपाय के रूप में, भारत एवं अन्य अनेक विकासशील देशों के संदर्भ में, सावधानीपूर्वक विचार करने की आवश्यकता है-क्योंकि बहुसंख्यक कृषक वर्षा-सिचित कृषि पर निर्भर हैं और अनेक क्षेत्रें में उनकी आय अस्थिरता का मुख्य कारण उपज में अस्थिरता है। उपर्युक्त परिच्छेद से निम्नलिखित प्रेक्षणों में से कौन-सा उभर कर सामने आता है? A एक अकेली ऐसी नीति की पहचान की जा सकती है जो बिना किसी पार्श्व-प्रभाव के जोखिम को घटा सके। B विशेषतः जोखिम को लेकर कोई ऐसी अकेली नीति नहीं हो सकती जो कृषिगत जोखिम को घटाने हेतु पर्याप्त हो। C जोखिम को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने वाली नीतियाँ इसका निराकरण कर सकती हैं। D सरकार का नीतिगत हस्तक्षेप कृषिगत जोखिमों को पूर्ण रूप से कम कर सकता है।
9)
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11)
12)
13)
14)
15)
निम्नलिखित परिच्छेद को पढ़िए और उसके बाद आने वाले तीन प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए: कोई टेनिस कोच आगे आने वाले टूर्नामेंट के लिए चार खिलाड़ियों की एक टीम इकट्ठी करना चाहता है। इसके लिए सात खिलाड़ी उपलब्ध हैं: पुरुष A, B और C; और महिलाएँ W, X, Y और Z । सभी खिलाड़ियों की क्षमताएँ समान हैं और टीम में कम से कम दो पुरुषों का होना जरूरी है। चार की टीम के लिए, सभी खिलाड़ियों का एक-दूसरे से खेलने के योग्य होना आवश्यक है। लेकिन B, W के साथ नहीं खेल सकता, C, Z के साथ नहीं खेल सकता और W, Y के साथ नहीं खेल सकती। यदि Y को चुना जाए और B न चुना जाए, तो टीम निम्नलिखित समूहों में से किस एक से मिलकर बनेगी? A A, C, W और Y B A, C, X और Y C A, C, Y और Z D A, W, Y और Z
16)
निम्नलिखित परिच्छेद को पढ़िए और उसके बाद आने वाले तीन प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए: कोई टेनिस कोच आगे आने वाले टूर्नामेंट के लिए चार खिलाड़ियों की एक टीम इकट्ठी करना चाहता है। इसके लिए सात खिलाड़ी उपलब्ध हैं: पुरुष A, B और C; और महिलाएँ W, X, Y और Z । सभी खिलाड़ियों की क्षमताएँ समान हैं और टीम में कम से कम दो पुरुषों का होना जरूरी है। चार की टीम के लिए, सभी खिलाड़ियों का एक-दूसरे से खेलने के योग्य होना आवश्यक है। लेकिन B, W के साथ नहीं खेल सकता, C, Z के साथ नहीं खेल सकता और W, Y के साथ नहीं खेल सकती। यदि B चुना जाए और Y न चुना जाए, तो टीम निम्नलिखित समूहों में से किस एक से मिलकर बनेगी? A A, B, C और W B A, B, C और Z C A, B, C और X D A, W, Y और Z
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18)
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पाँच व्यक्ति A, B, C, D और E एक गोल मेज के चारों ओर बैठे हैं। प्रत्येक कुर्सी सन्निकट कुर्सियों से समान दूरी पर स्थित है। (i) C, A के तुरंत बाद बैठा है। (ii) A, D से दो कुर्सी आगे बैठा है। (iii) B, A के तुरंत बाद नहीं बैठा है। निम्नलिखित में से कौन-सा/से अवश्य सत्य है/हैं? (I) D, B के तुरंत बाद बैठा है। (II) E, A के तुरंत बाद बैठा है। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए। A केवल I B केवल ii C I और II दोनों D न तो I और न ही II ###COMM0N###20###22### निम्नलिखित कथनों का सावधानी से परीक्षण कीजिए और उसके बाद आने वाले तीन प्रश्नांशों का उत्तर दीजिए: चार मित्रें A, B, C और D में से, A और B फुटबॉल और क्रिकेट खेलते हैं, B और C क्रिकेट और हॉकी खेलते हैं, A और D बास्केटबॉल और फुटबॉल खेलते हैं, C और D हॉकी और बास्केटबॉल खेलते हैं।
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22)
23)
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निम्नलिखित परिच्छेद को पढ़िए और आगे आने वाले चार प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन प्रश्नांशों के आपके उत्तर इस परिच्छेद पर ही आधारित होने चाहिये। पिछले कुछ वर्षों में भारत के वित्तीय बाजारों ने बृहत्तर गहनता और तरलता प्राप्त की है।1991 से हुए सतत सुधारों ने विश्व अर्थव्यवस्था के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था और इसकी वित्तीय व्यवस्था के अंतर्संबंधों और एकीकरण को आगे बढ़ाया है। इसीलिए अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में दुर्बल विश्व आर्थिक प्रत्याशाओं और अनवरत विद्यमान अनिश्चितताओं ने उभरती हुई बाजार अर्थव्यवस्थाओं पर स्पष्ट प्रभाव डाला है। सार्वभौम जोखिम से जुड़े सरोकारों ने, विशेषकर यूरो क्षेत्र में, ग्रीस की घोर ट्टण समस्या की संक्रामकता से प्रभावित होकर, जो कि अस्थिरता के सामान्य से अधिक ऊँचे स्तर के रूप में भारत और अन्य अर्थव्यवस्थाओं में फैल रही है, पूरे वर्ष के बृहत्तर हिस्से में वित्तीय बाजारों को प्रभावित किया है। अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय बाजारों की निधीयन बाधाएँ बैंकों और निगमों के लिए विदेशी निधीयन की उपलब्धता और लागत दोनों को प्रभावित कर सकती थीं। चूँकि, भारतीय वित्तीय तंत्र में बैंकों का प्रभुत्व है, बैंकों की तनाव को झेल पाने की क्षमता पूरी वित्तीय स्थिरता के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। हालांकि, भारतीय बैंक, हाल के वर्षों में पूँजी से जोखिम भारित परिसंपत्तियों के अनुपात में गिरावट और गैर-निष्पादन-पूर्ण परिसंपत्तियों के स्तरों में वृद्धि के बावजूद मजबूत बन रहे हैं। पूँजी पर्याप्तता स्तर नियामक आवश्यकताओं से ऊपर बने हुए हैं। वित्तीय बाजार की आधारिक संरचना बिना किसी बड़ी रुकावट के परिचालित हो रही है। आगे वित्तीय तंत्र का और अधिक विश्वव्यापीकरण, संघटन, विनियंत्रण और विविधीकरण होने पर बैंकिग कार्य और अधिक जटिल और जोखिमपूर्ण हो सकता है। इस परिप्रेक्ष्य में जोखिम और तरलता के प्रबंधन तथा कुशलता में वृद्धि जैसे मुद्दे और अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं। परिच्छेद के अनुसार, निम्नलिखित में से किसके कारण हाल के वर्षों में वित्तीय बाजारों ने भारत सहित अन्य उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं पर अपना प्रतिकूल प्रभाव छोड़ा है? 1- दुर्बल वैश्विक आर्थिक प्रत्याशाएँ। 2- अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय बाजारों की अनिश्चितताएँ 3- यूरो क्षेत्रें में सार्वभौम जोखिम के सरोकार 4- खराब मानसून और फलस्वरूप फसल में हानि। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए: A केवल 1 और 2 B 1, 2 और 3 C केवल 2 और 3 D 2, 3 और 4
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निम्नलिखित परिच्छेद को पढ़िए और आगे आने वाले चार प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन प्रश्नांशों के आपके उत्तर इस परिच्छेद पर ही आधारित होने चाहिये। पिछले कुछ वर्षों में भारत के वित्तीय बाजारों ने बृहत्तर गहनता और तरलता प्राप्त की है।1991 से हुए सतत सुधारों ने विश्व अर्थव्यवस्था के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था और इसकी वित्तीय व्यवस्था के अंतर्संबंधों और एकीकरण को आगे बढ़ाया है। इसीलिए अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में दुर्बल विश्व आर्थिक प्रत्याशाओं और अनवरत विद्यमान अनिश्चितताओं ने उभरती हुई बाजार अर्थव्यवस्थाओं पर स्पष्ट प्रभाव डाला है। सार्वभौम जोखिम से जुड़े सरोकारों ने, विशेषकर यूरो क्षेत्र में, ग्रीस की घोर ट्टण समस्या की संक्रामकता से प्रभावित होकर, जो कि अस्थिरता के सामान्य से अधिक ऊँचे स्तर के रूप में भारत और अन्य अर्थव्यवस्थाओं में फैल रही है, पूरे वर्ष के बृहत्तर हिस्से में वित्तीय बाजारों को प्रभावित किया है। अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय बाजारों की निधीयन बाधाएँ बैंकों और निगमों के लिए विदेशी निधीयन की उपलब्धता और लागत दोनों को प्रभावित कर सकती थीं। चूँकि, भारतीय वित्तीय तंत्र में बैंकों का प्रभुत्व है, बैंकों की तनाव को झेल पाने की क्षमता पूरी वित्तीय स्थिरता के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। हालांकि, भारतीय बैंक, हाल के वर्षों में पूँजी से जोखिम भारित परिसंपत्तियों के अनुपात में गिरावट और गैर-निष्पादन-पूर्ण परिसंपत्तियों के स्तरों में वृद्धि के बावजूद मजबूत बन रहे हैं। पूँजी पर्याप्तता स्तर नियामक आवश्यकताओं से ऊपर बने हुए हैं। वित्तीय बाजार की आधारिक संरचना बिना किसी बड़ी रुकावट के परिचालित हो रही है। आगे वित्तीय तंत्र का और अधिक विश्वव्यापीकरण, संघटन, विनियंत्रण और विविधीकरण होने पर बैंकिग कार्य और अधिक जटिल और जोखिमपूर्ण हो सकता है। इस परिप्रेक्ष्य में जोखिम और तरलता के प्रबंधन तथा कुशलता में वृद्धि जैसे मुद्दे और अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं। निम्नलिखित में से प्रमुखतः किसके कारण भारतीय वित्तीय बाजार विश्वव्यापी परिवर्तनों से प्रभावित हो रहे हैं? A विदेशों से प्रेषित राशि के बढ़े हुए अंतर्प्रवाह के कारण B विदेशी मुद्रा रिजर्व में अत्यधिक वृद्धि के कारण। C बढ़े हुए विश्व अंतर्संबंधों और भारतीय वित्तीय बाजारों के एकीकरण के कारण। D ग्रीस की घोर ट्टण समस्या के संक्रमण के कारण।
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निम्नलिखित परिच्छेद को पढ़िए और आगे आने वाले चार प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन प्रश्नांशों के आपके उत्तर इस परिच्छेद पर ही आधारित होने चाहिये। पिछले कुछ वर्षों में भारत के वित्तीय बाजारों ने बृहत्तर गहनता और तरलता प्राप्त की है।1991 से हुए सतत सुधारों ने विश्व अर्थव्यवस्था के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था और इसकी वित्तीय व्यवस्था के अंतर्संबंधों और एकीकरण को आगे बढ़ाया है। इसीलिए अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में दुर्बल विश्व आर्थिक प्रत्याशाओं और अनवरत विद्यमान अनिश्चितताओं ने उभरती हुई बाजार अर्थव्यवस्थाओं पर स्पष्ट प्रभाव डाला है। सार्वभौम जोखिम से जुड़े सरोकारों ने, विशेषकर यूरो क्षेत्र में, ग्रीस की घोर ट्टण समस्या की संक्रामकता से प्रभावित होकर, जो कि अस्थिरता के सामान्य से अधिक ऊँचे स्तर के रूप में भारत और अन्य अर्थव्यवस्थाओं में फैल रही है, पूरे वर्ष के बृहत्तर हिस्से में वित्तीय बाजारों को प्रभावित किया है। अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय बाजारों की निधीयन बाधाएँ बैंकों और निगमों के लिए विदेशी निधीयन की उपलब्धता और लागत दोनों को प्रभावित कर सकती थीं। चूँकि, भारतीय वित्तीय तंत्र में बैंकों का प्रभुत्व है, बैंकों की तनाव को झेल पाने की क्षमता पूरी वित्तीय स्थिरता के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। हालांकि, भारतीय बैंक, हाल के वर्षों में पूँजी से जोखिम भारित परिसंपत्तियों के अनुपात में गिरावट और गैर-निष्पादन-पूर्ण परिसंपत्तियों के स्तरों में वृद्धि के बावजूद मजबूत बन रहे हैं। पूँजी पर्याप्तता स्तर नियामक आवश्यकताओं से ऊपर बने हुए हैं। वित्तीय बाजार की आधारिक संरचना बिना किसी बड़ी रुकावट के परिचालित हो रही है। आगे वित्तीय तंत्र का और अधिक विश्वव्यापीकरण, संघटन, विनियंत्रण और विविधीकरण होने पर बैंकिग कार्य और अधिक जटिल और जोखिमपूर्ण हो सकता है। इस परिप्रेक्ष्य में जोखिम और तरलता के प्रबंधन तथा कुशलता में वृद्धि जैसे मुद्दे और अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं। परिच्छेद के अनुसार, भारतीय वित्तीय तंत्र में, पूर्ण वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बैंकों की तनाव झेलने की क्षमता महत्त्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय वित्तीय तंत्र - A भारत सरकार द्वारा नियंत्रित होता है। B बैंकों के साथ कम एकीकृत है। C भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नियंत्रित होता है। D पर बैंकों का प्रभुत्व है।
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निम्नलिखित परिच्छेद को पढ़िए और आगे आने वाले चार प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन प्रश्नांशों के आपके उत्तर इस परिच्छेद पर ही आधारित होने चाहिये। पिछले कुछ वर्षों में भारत के वित्तीय बाजारों ने बृहत्तर गहनता और तरलता प्राप्त की है।1991 से हुए सतत सुधारों ने विश्व अर्थव्यवस्था के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था और इसकी वित्तीय व्यवस्था के अंतर्संबंधों और एकीकरण को आगे बढ़ाया है। इसीलिए अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में दुर्बल विश्व आर्थिक प्रत्याशाओं और अनवरत विद्यमान अनिश्चितताओं ने उभरती हुई बाजार अर्थव्यवस्थाओं पर स्पष्ट प्रभाव डाला है। सार्वभौम जोखिम से जुड़े सरोकारों ने, विशेषकर यूरो क्षेत्र में, ग्रीस की घोर ट्टण समस्या की संक्रामकता से प्रभावित होकर, जो कि अस्थिरता के सामान्य से अधिक ऊँचे स्तर के रूप में भारत और अन्य अर्थव्यवस्थाओं में फैल रही है, पूरे वर्ष के बृहत्तर हिस्से में वित्तीय बाजारों को प्रभावित किया है। अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय बाजारों की निधीयन बाधाएँ बैंकों और निगमों के लिए विदेशी निधीयन की उपलब्धता और लागत दोनों को प्रभावित कर सकती थीं। चूँकि, भारतीय वित्तीय तंत्र में बैंकों का प्रभुत्व है, बैंकों की तनाव को झेल पाने की क्षमता पूरी वित्तीय स्थिरता के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है। हालांकि, भारतीय बैंक, हाल के वर्षों में पूँजी से जोखिम भारित परिसंपत्तियों के अनुपात में गिरावट और गैर-निष्पादन-पूर्ण परिसंपत्तियों के स्तरों में वृद्धि के बावजूद मजबूत बन रहे हैं। पूँजी पर्याप्तता स्तर नियामक आवश्यकताओं से ऊपर बने हुए हैं। वित्तीय बाजार की आधारिक संरचना बिना किसी बड़ी रुकावट के परिचालित हो रही है। आगे वित्तीय तंत्र का और अधिक विश्वव्यापीकरण, संघटन, विनियंत्रण और विविधीकरण होने पर बैंकिग कार्य और अधिक जटिल और जोखिमपूर्ण हो सकता है। इस परिप्रेक्ष्य में जोखिम और तरलता के प्रबंधन तथा कुशलता में वृद्धि जैसे मुद्दे और अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं। निम्नलिखित में से किसके कारण जोखिम और तरलता के प्रबंधन को भविष्य में भारतीय बैंकिग तंत्र में अधिक महत्त्व मिल सकता है। 1- और अधिक विश्वव्यापीकरण। 2- वित्तीय तंत्र का और अधिक संघटन और विनियंत्रण। 3- वित्तीय तंत्र का और अधिक विविधीकरण। 4- अर्थव्यवस्था में और अधिक वित्तीय समावेशन। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए। A 1, 2 और 3 B 2, 3 और 4 C केवल 1 और 2 D केवल 3 और 4
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निम्नलिखित परिच्छेद को पढ़िए और आगे आने वाले दो प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन प्रश्नांशों के आपके उत्तर इस परिच्छेद पर ही आधारित होने चाहिए। कच्चा खनिज तेल जमीन से एक तीखी गंध के साथ गाढ़े काले या भूरे तरल के रूप में बाहर आता है। यह अनेक विभिÂ पदार्थों का, जिनके प्रत्येक के अपने विशिष्ट गुण हैं, जटिल मिश्रण है। उन पदार्थों में से अधिकांश विभिÂ अनुपातों में हाइइªोजन और कार्बन के संयोग हैं। इस प्रकार के हाइड्रोकार्बन दूसरे रूपों जैसे अलकतरा (राल), डामर तथा प्राकृतिक गैस के रूप में भी पाए जाते हैं। खनिज तेल समुद्र में रहने वाले लघु जीवों के मृत शरीरों तथा पौधों से उद्गमित होता है। लाखों वर्षों के दौरान, समुद्र-तल में मृत जीवों का विशाल ढेर जमा हो जाता है, तथा समुद्री लहरें उन्हें बालू और गाद के आच्छादनों से ढ़क देती हैं। कड़ा होने के साथ यह खनिज अवसादी शैलों में बदल जाता है और प्रभावी रूप से ऑक्सीजन को बाहर रोक देता है, जिससे तल में इकट्ठा समुद्री जमावों का पूर्ण अपघटन निरुद्ध हो जाता है। अवसादी शैलों की परतें और मोटी तथा भारी हो जाती हैं। उनका दाब ऊष्मा उत्पÂ करता है, जो लघु मृत शरीरों को कच्चे तेल में परिवर्तित कर देता है, एक ऐसी प्रक्रिया के अंतर्गत जो आज भी जारी है। समुद्र तल के खनिज तेल जमाव पूर्णतया अपघटित नहीं हो पाते हैं क्योंकि वे - A समुद्री तरंगों से निरन्तर धुलते जाते हैं। B शैल बन जाते हैं और ऑक्सीजन को उनमें प्रवेश करने से रोक देते है। C हाइड्रोजन और कार्बन का मिश्रण समाहित करते हैं। D लवणीय दशाओं में पड़े रहने वाले जीवों के मृत शरीर हैं।
33)
निम्नलिखित परिच्छेद को पढ़िए और आगे आने वाले दो प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन प्रश्नांशों के आपके उत्तर इस परिच्छेद पर ही आधारित होने चाहिए। कच्चा खनिज तेल जमीन से एक तीखी गंध के साथ गाढ़े काले या भूरे तरल के रूप में बाहर आता है। यह अनेक विभिÂ पदार्थों का, जिनके प्रत्येक के अपने विशिष्ट गुण हैं, जटिल मिश्रण है। उन पदार्थों में से अधिकांश विभिÂ अनुपातों में हाइइªोजन और कार्बन के संयोग हैं। इस प्रकार के हाइड्रोकार्बन दूसरे रूपों जैसे अलकतरा (राल), डामर तथा प्राकृतिक गैस के रूप में भी पाए जाते हैं। खनिज तेल समुद्र में रहने वाले लघु जीवों के मृत शरीरों तथा पौधों से उद्गमित होता है। लाखों वर्षों के दौरान, समुद्र-तल में मृत जीवों का विशाल ढेर जमा हो जाता है, तथा समुद्री लहरें उन्हें बालू और गाद के आच्छादनों से ढ़क देती हैं। कड़ा होने के साथ यह खनिज अवसादी शैलों में बदल जाता है और प्रभावी रूप से ऑक्सीजन को बाहर रोक देता है, जिससे तल में इकट्ठा समुद्री जमावों का पूर्ण अपघटन निरुद्ध हो जाता है। अवसादी शैलों की परतें और मोटी तथा भारी हो जाती हैं। उनका दाब ऊष्मा उत्पÂ करता है, जो लघु मृत शरीरों को कच्चे तेल में परिवर्तित कर देता है, एक ऐसी प्रक्रिया के अंतर्गत जो आज भी जारी है। अवसादी शैल तेल जमावों के निर्माण के कारण बनते हैं क्योंकि A इसके नीचे कोई लवाीय दशाएँ नहीं होती B ये अपने नीचे जमा मृत जैव पदार्थों में कुछ घुली हुई ऑक्सीजन जाने देते हैं। C उपरिशायी अवसादी परतों का भार ऊष्मा उत्पादित करता है। D इनमें ऐसे पदार्थ होते हैं जो मृत जीवों को तेल में परिवर्तित करने हेतु आवश्यक रासायनिक प्रतिक्रियाओं का उत्प्रेरण करते हैं।
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निम्नलिखित दो परिच्छेदों में से प्रत्येक को पढ़िए और प्रत्येक परिच्छेद के उपरांत दिए गए प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन प्रश्नांशों के आपके उत्तर परिच्छेदो पर ही आधारित होने चाहिएं। विश्व के अनेक भागों में कानून कृषि-कर्दम (स्लरी) को जलमार्गों में छोड़ने को तेजी से प्रतिबंधित कर रहा है। सबसे सरल एवं प्रायः सबसे किफायती पद्धति पदार्थ को भूमि पर अर्ध-ठोस खाद अथवा छिड़काव योग्य कर्दम (स्लरी) के रूप में वापस कर देने की है। यह पर्यावरण में इसके गाढ़ापन को कम कर, जो एक अधिक आदिम एवं धारणीय प्रकार की कृषि में हो सकता था, प्रदूषक को उर्वरक में परिवर्तित कर देता है। मिट्टी के सूक्ष्मजीव गंदे पानी एवं कर्दम के जैविक संघटकों को अपघटित कर देते हैं और इस प्रकार अधिकतर खनिज पोषक तत्त्व वनस्पति द्वारा पुनः अवशोषित किए जाने हेतु उपलब्ध हो जाते हैं। कृषि-वाहित जल (और मानव मल-जल) के माध्यम से नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस दोनों आधार वाले पोषकों के अधिक निवेश ने अनेक ‘लाभप्रद’ मित-पोषणी झीलों (जिनमें निम्न पोषक सान्द्रण, निम्न पादक उत्पादकता और अधिक जलीय खरपतवार एवं स्वच्छ जल विद्यमान होता है) को सुपोषी दशाओं में बदल दिया है, जहाँ उच्च पोषक निवेश से उच्च पादकप्लवक उत्पादकता (कभी-कभी फुल्लिका निर्मात्री विषैली जातियों की प्रधानता के साथ) परिणामित हुए हैं। इससे जल गंदला हो जाता है, बड़े पादप विलुप्त हो जाते हैं तथा सबसे खराब स्थिति में अनॉक्सिता होकर मछलियों की मृत्यु हो जाती है। यह तथाकथित संवर्धनी सुपोषण है। इस प्रकार वन्य-शिकार मछलियों की संभारण सेवाओं ओर मनोरंजन से संबंधित सांस्कृतिक सेवाओं समेत, महत्त्वपूर्ण पारितंत्र सेवाएँ समाप्त हो जाती हैं। कुछ समय से, झीलों के संवर्धनी सुपोषण की प्रक्रिया समझी जा रही है। लेकिन वैज्ञानिकों का महासागरों में नदियों के मुहाने के समीप विशाल ‘मृत क्षेत्रें’, विशेषकर उत्तरी अमेरिका में मिसीसीपी एवं चीन में यांग्सी जैसे विशाल जलग्रहण क्षेत्रें के अपवाह पर, हाल ही में ध्यान गया है। पोषण-तत्त्वों से समृद्ध जल धाराओं, नदियों और झीलों के माध्यम से प्रवाहित होता है एवं अंततः मुहानों (एस्चुएरी) एवं महासागर में पहुँचता है जहाँ पारितंत्र प्रभाव बहुत अधिक हो सकता है, वस्तुतः70,000 वर्ग किमी- तक विस्तृत क्षेत्र, में सभी अकशेरूकी एवं मछलियो की मृत्यु हो जाती है। अब सम्पूर्ण विश्व में 150 से अधिक समुद्री-क्षेत्र कृषि-वाहित उर्वरक और बड़े नगरों के मल-जल से विशेषतः नाइट्रोजन से समृद्ध होने से शैवाल पुंजों के अपघटित होने के परिणामस्वरूप लगातार ऑक्सीजन से वंचित हो रहे हैं। महासागरी मृत क्षेत्र औद्योगिक राष्ट्रों से विशेष रूप से सम्बद्ध हैं, तथा ये क्षेत्र प्रायः उन देशों से लगे हुए हैं जो किसानों को उत्पादकता बढ़ाने और अधिक उर्वरक के प्रयोग के लिए उनको कृषि हेतु आर्थिक सहायता देकर प्रोत्साहित करते हैं। परिच्छेद के अनुसार, कृषि-कर्दम को जलमार्गों में छोड़ने पर क्यों प्रतिबंध लगाना चाहिए? 1- इस प्रकार से पोषकों की हानि आर्थिक दृष्टिकोण से अच्छी पद्धति नहीं है। 2- जलमार्गों में वे सूक्ष्मजीव नहीं होते जो कृषि-कर्दम के जैव तत्त्वों को अपघटित कर सकते हैं। 3- जलाशयों में कर्दम छोड़ने से उसके सुपोषण में वृद्धि हो सकती है। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए। A केवल1 B केवल 2 और 3 C केवल 1 और 3 D 1, 2 और 3
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निम्नलिखित दो परिच्छेदों में से प्रत्येक को पढ़िए और प्रत्येक परिच्छेद के उपरांत दिए गए प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन प्रश्नांशों के आपके उत्तर परिच्छेदो पर ही आधारित होने चाहिएं। विश्व के अनेक भागों में कानून कृषि-कर्दम (स्लरी) को जलमार्गों में छोड़ने को तेजी से प्रतिबंधित कर रहा है। सबसे सरल एवं प्रायः सबसे किफायती पद्धति पदार्थ को भूमि पर अर्ध-ठोस खाद अथवा छिड़काव योग्य कर्दम (स्लरी) के रूप में वापस कर देने की है। यह पर्यावरण में इसके गाढ़ापन को कम कर, जो एक अधिक आदिम एवं धारणीय प्रकार की कृषि में हो सकता था, प्रदूषक को उर्वरक में परिवर्तित कर देता है। मिट्टी के सूक्ष्मजीव गंदे पानी एवं कर्दम के जैविक संघटकों को अपघटित कर देते हैं और इस प्रकार अधिकतर खनिज पोषक तत्त्व वनस्पति द्वारा पुनः अवशोषित किए जाने हेतु उपलब्ध हो जाते हैं। कृषि-वाहित जल (और मानव मल-जल) के माध्यम से नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस दोनों आधार वाले पोषकों के अधिक निवेश ने अनेक ‘लाभप्रद’ मित-पोषणी झीलों (जिनमें निम्न पोषक सान्द्रण, निम्न पादक उत्पादकता और अधिक जलीय खरपतवार एवं स्वच्छ जल विद्यमान होता है) को सुपोषी दशाओं में बदल दिया है, जहाँ उच्च पोषक निवेश से उच्च पादकप्लवक उत्पादकता (कभी-कभी फुल्लिका निर्मात्री विषैली जातियों की प्रधानता के साथ) परिणामित हुए हैं। इससे जल गंदला हो जाता है, बड़े पादप विलुप्त हो जाते हैं तथा सबसे खराब स्थिति में अनॉक्सिता होकर मछलियों की मृत्यु हो जाती है। यह तथाकथित संवर्धनी सुपोषण है। इस प्रकार वन्य-शिकार मछलियों की संभारण सेवाओं ओर मनोरंजन से संबंधित सांस्कृतिक सेवाओं समेत, महत्त्वपूर्ण पारितंत्र सेवाएँ समाप्त हो जाती हैं। कुछ समय से, झीलों के संवर्धनी सुपोषण की प्रक्रिया समझी जा रही है। लेकिन वैज्ञानिकों का महासागरों में नदियों के मुहाने के समीप विशाल ‘मृत क्षेत्रें’, विशेषकर उत्तरी अमेरिका में मिसीसीपी एवं चीन में यांग्सी जैसे विशाल जलग्रहण क्षेत्रें के अपवाह पर, हाल ही में ध्यान गया है। पोषण-तत्त्वों से समृद्ध जल धाराओं, नदियों और झीलों के माध्यम से प्रवाहित होता है एवं अंततः मुहानों (एस्चुएरी) एवं महासागर में पहुँचता है जहाँ पारितंत्र प्रभाव बहुत अधिक हो सकता है, वस्तुतः70,000 वर्ग किमी- तक विस्तृत क्षेत्र, में सभी अकशेरूकी एवं मछलियो की मृत्यु हो जाती है। अब सम्पूर्ण विश्व में 150 से अधिक समुद्री-क्षेत्र कृषि-वाहित उर्वरक और बड़े नगरों के मल-जल से विशेषतः नाइट्रोजन से समृद्ध होने से शैवाल पुंजों के अपघटित होने के परिणामस्वरूप लगातार ऑक्सीजन से वंचित हो रहे हैं। महासागरी मृत क्षेत्र औद्योगिक राष्ट्रों से विशेष रूप से सम्बद्ध हैं, तथा ये क्षेत्र प्रायः उन देशों से लगे हुए हैं जो किसानों को उत्पादकता बढ़ाने और अधिक उर्वरक के प्रयोग के लिए उनको कृषि हेतु आर्थिक सहायता देकर प्रोत्साहित करते हैं। परिच्छेद में संदर्भित ‘प्रदूषक से उर्वरक’ में परिवर्तन के प्रसंग में प्रदूषक क्या है और उर्वरक क्या है? A कर्दम का अपघटित जैव तत्त्व प्रदूषक होता है और मिट्टी में सूक्ष्म जीव उर्वरक बनाते है। B छोड़ा गया कृषि-कर्दम प्रदूषक है और मिट्टी में अपघटित कर्दम उर्वरक है। C छिड़का गया कर्दम प्रदूषक है ओर जलमार्ग उर्वरक है। D इस संदर्भ में उपर्युक्त में से कोई भी अभिव्यक्ति सही नहीं है।
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निम्नलिखित दो परिच्छेदों में से प्रत्येक को पढ़िए और प्रत्येक परिच्छेद के उपरांत दिए गए प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन प्रश्नांशों के आपके उत्तर परिच्छेदो पर ही आधारित होने चाहिएं। विश्व के अनेक भागों में कानून कृषि-कर्दम (स्लरी) को जलमार्गों में छोड़ने को तेजी से प्रतिबंधित कर रहा है। सबसे सरल एवं प्रायः सबसे किफायती पद्धति पदार्थ को भूमि पर अर्ध-ठोस खाद अथवा छिड़काव योग्य कर्दम (स्लरी) के रूप में वापस कर देने की है। यह पर्यावरण में इसके गाढ़ापन को कम कर, जो एक अधिक आदिम एवं धारणीय प्रकार की कृषि में हो सकता था, प्रदूषक को उर्वरक में परिवर्तित कर देता है। मिट्टी के सूक्ष्मजीव गंदे पानी एवं कर्दम के जैविक संघटकों को अपघटित कर देते हैं और इस प्रकार अधिकतर खनिज पोषक तत्त्व वनस्पति द्वारा पुनः अवशोषित किए जाने हेतु उपलब्ध हो जाते हैं। कृषि-वाहित जल (और मानव मल-जल) के माध्यम से नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस दोनों आधार वाले पोषकों के अधिक निवेश ने अनेक ‘लाभप्रद’ मित-पोषणी झीलों (जिनमें निम्न पोषक सान्द्रण, निम्न पादक उत्पादकता और अधिक जलीय खरपतवार एवं स्वच्छ जल विद्यमान होता है) को सुपोषी दशाओं में बदल दिया है, जहाँ उच्च पोषक निवेश से उच्च पादकप्लवक उत्पादकता (कभी-कभी फुल्लिका निर्मात्री विषैली जातियों की प्रधानता के साथ) परिणामित हुए हैं। इससे जल गंदला हो जाता है, बड़े पादप विलुप्त हो जाते हैं तथा सबसे खराब स्थिति में अनॉक्सिता होकर मछलियों की मृत्यु हो जाती है। यह तथाकथित संवर्धनी सुपोषण है। इस प्रकार वन्य-शिकार मछलियों की संभारण सेवाओं ओर मनोरंजन से संबंधित सांस्कृतिक सेवाओं समेत, महत्त्वपूर्ण पारितंत्र सेवाएँ समाप्त हो जाती हैं। कुछ समय से, झीलों के संवर्धनी सुपोषण की प्रक्रिया समझी जा रही है। लेकिन वैज्ञानिकों का महासागरों में नदियों के मुहाने के समीप विशाल ‘मृत क्षेत्रें’, विशेषकर उत्तरी अमेरिका में मिसीसीपी एवं चीन में यांग्सी जैसे विशाल जलग्रहण क्षेत्रें के अपवाह पर, हाल ही में ध्यान गया है। पोषण-तत्त्वों से समृद्ध जल धाराओं, नदियों और झीलों के माध्यम से प्रवाहित होता है एवं अंततः मुहानों (एस्चुएरी) एवं महासागर में पहुँचता है जहाँ पारितंत्र प्रभाव बहुत अधिक हो सकता है, वस्तुतः70,000 वर्ग किमी- तक विस्तृत क्षेत्र, में सभी अकशेरूकी एवं मछलियो की मृत्यु हो जाती है। अब सम्पूर्ण विश्व में 150 से अधिक समुद्री-क्षेत्र कृषि-वाहित उर्वरक और बड़े नगरों के मल-जल से विशेषतः नाइट्रोजन से समृद्ध होने से शैवाल पुंजों के अपघटित होने के परिणामस्वरूप लगातार ऑक्सीजन से वंचित हो रहे हैं। महासागरी मृत क्षेत्र औद्योगिक राष्ट्रों से विशेष रूप से सम्बद्ध हैं, तथा ये क्षेत्र प्रायः उन देशों से लगे हुए हैं जो किसानों को उत्पादकता बढ़ाने और अधिक उर्वरक के प्रयोग के लिए उनको कृषि हेतु आर्थिक सहायता देकर प्रोत्साहित करते हैं। परिच्छेद के अनुसार, उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग के प्रभाव क्या हैं? 1- मिट्टी एवं जल में प्रदूषकों की वृद्धि। 2- मिट्टी में अपघटन करने वाले सूक्ष्मजीवों का विनाश। 3- जलाशयों में पोषकों का संवर्धन। 4- शैवाल पुंजों का बनना। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए। A केवल 1, 2 और 3 B केवल 1, 3 और 4 C केवल 2 और 4 D 1, 2, 3 और 4
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निम्नलिखित दो परिच्छेदों में से प्रत्येक को पढ़िए और प्रत्येक परिच्छेद के उपरांत दिए गए प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन प्रश्नांशों के आपके उत्तर परिच्छेदो पर ही आधारित होने चाहिएं। विश्व के अनेक भागों में कानून कृषि-कर्दम (स्लरी) को जलमार्गों में छोड़ने को तेजी से प्रतिबंधित कर रहा है। सबसे सरल एवं प्रायः सबसे किफायती पद्धति पदार्थ को भूमि पर अर्ध-ठोस खाद अथवा छिड़काव योग्य कर्दम (स्लरी) के रूप में वापस कर देने की है। यह पर्यावरण में इसके गाढ़ापन को कम कर, जो एक अधिक आदिम एवं धारणीय प्रकार की कृषि में हो सकता था, प्रदूषक को उर्वरक में परिवर्तित कर देता है। मिट्टी के सूक्ष्मजीव गंदे पानी एवं कर्दम के जैविक संघटकों को अपघटित कर देते हैं और इस प्रकार अधिकतर खनिज पोषक तत्त्व वनस्पति द्वारा पुनः अवशोषित किए जाने हेतु उपलब्ध हो जाते हैं। कृषि-वाहित जल (और मानव मल-जल) के माध्यम से नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस दोनों आधार वाले पोषकों के अधिक निवेश ने अनेक ‘लाभप्रद’ मित-पोषणी झीलों (जिनमें निम्न पोषक सान्द्रण, निम्न पादक उत्पादकता और अधिक जलीय खरपतवार एवं स्वच्छ जल विद्यमान होता है) को सुपोषी दशाओं में बदल दिया है, जहाँ उच्च पोषक निवेश से उच्च पादकप्लवक उत्पादकता (कभी-कभी फुल्लिका निर्मात्री विषैली जातियों की प्रधानता के साथ) परिणामित हुए हैं। इससे जल गंदला हो जाता है, बड़े पादप विलुप्त हो जाते हैं तथा सबसे खराब स्थिति में अनॉक्सिता होकर मछलियों की मृत्यु हो जाती है। यह तथाकथित संवर्धनी सुपोषण है। इस प्रकार वन्य-शिकार मछलियों की संभारण सेवाओं ओर मनोरंजन से संबंधित सांस्कृतिक सेवाओं समेत, महत्त्वपूर्ण पारितंत्र सेवाएँ समाप्त हो जाती हैं। कुछ समय से, झीलों के संवर्धनी सुपोषण की प्रक्रिया समझी जा रही है। लेकिन वैज्ञानिकों का महासागरों में नदियों के मुहाने के समीप विशाल ‘मृत क्षेत्रें’, विशेषकर उत्तरी अमेरिका में मिसीसीपी एवं चीन में यांग्सी जैसे विशाल जलग्रहण क्षेत्रें के अपवाह पर, हाल ही में ध्यान गया है। पोषण-तत्त्वों से समृद्ध जल धाराओं, नदियों और झीलों के माध्यम से प्रवाहित होता है एवं अंततः मुहानों (एस्चुएरी) एवं महासागर में पहुँचता है जहाँ पारितंत्र प्रभाव बहुत अधिक हो सकता है, वस्तुतः70,000 वर्ग किमी- तक विस्तृत क्षेत्र, में सभी अकशेरूकी एवं मछलियो की मृत्यु हो जाती है। अब सम्पूर्ण विश्व में 150 से अधिक समुद्री-क्षेत्र कृषि-वाहित उर्वरक और बड़े नगरों के मल-जल से विशेषतः नाइट्रोजन से समृद्ध होने से शैवाल पुंजों के अपघटित होने के परिणामस्वरूप लगातार ऑक्सीजन से वंचित हो रहे हैं। महासागरी मृत क्षेत्र औद्योगिक राष्ट्रों से विशेष रूप से सम्बद्ध हैं, तथा ये क्षेत्र प्रायः उन देशों से लगे हुए हैं जो किसानों को उत्पादकता बढ़ाने और अधिक उर्वरक के प्रयोग के लिए उनको कृषि हेतु आर्थिक सहायता देकर प्रोत्साहित करते हैं। संवर्धनी सुपोषण से युक्त जलाशय की विशेषता/विशेषताएँ क्या है/हैं? 1- पारिस्थितिक तंत्र की सेवाओं की हानि 2- वनस्पति और प्राणिजात की हानि 3- खनिज पोषकों की हानि नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए। A केवल1 B केवल 1 और 2 C केवल 2 और 3 D 1, 2 और 3
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निम्नलिखित दो परिच्छेदों में से प्रत्येक को पढ़िए और प्रत्येक परिच्छेद के उपरांत दिए गए प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन प्रश्नांशों के आपके उत्तर परिच्छेदो पर ही आधारित होने चाहिएं। विश्व के अनेक भागों में कानून कृषि-कर्दम (स्लरी) को जलमार्गों में छोड़ने को तेजी से प्रतिबंधित कर रहा है। सबसे सरल एवं प्रायः सबसे किफायती पद्धति पदार्थ को भूमि पर अर्ध-ठोस खाद अथवा छिड़काव योग्य कर्दम (स्लरी) के रूप में वापस कर देने की है। यह पर्यावरण में इसके गाढ़ापन को कम कर, जो एक अधिक आदिम एवं धारणीय प्रकार की कृषि में हो सकता था, प्रदूषक को उर्वरक में परिवर्तित कर देता है। मिट्टी के सूक्ष्मजीव गंदे पानी एवं कर्दम के जैविक संघटकों को अपघटित कर देते हैं और इस प्रकार अधिकतर खनिज पोषक तत्त्व वनस्पति द्वारा पुनः अवशोषित किए जाने हेतु उपलब्ध हो जाते हैं। कृषि-वाहित जल (और मानव मल-जल) के माध्यम से नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस दोनों आधार वाले पोषकों के अधिक निवेश ने अनेक ‘लाभप्रद’ मित-पोषणी झीलों (जिनमें निम्न पोषक सान्द्रण, निम्न पादक उत्पादकता और अधिक जलीय खरपतवार एवं स्वच्छ जल विद्यमान होता है) को सुपोषी दशाओं में बदल दिया है, जहाँ उच्च पोषक निवेश से उच्च पादकप्लवक उत्पादकता (कभी-कभी फुल्लिका निर्मात्री विषैली जातियों की प्रधानता के साथ) परिणामित हुए हैं। इससे जल गंदला हो जाता है, बड़े पादप विलुप्त हो जाते हैं तथा सबसे खराब स्थिति में अनॉक्सिता होकर मछलियों की मृत्यु हो जाती है। यह तथाकथित संवर्धनी सुपोषण है। इस प्रकार वन्य-शिकार मछलियों की संभारण सेवाओं ओर मनोरंजन से संबंधित सांस्कृतिक सेवाओं समेत, महत्त्वपूर्ण पारितंत्र सेवाएँ समाप्त हो जाती हैं। कुछ समय से, झीलों के संवर्धनी सुपोषण की प्रक्रिया समझी जा रही है। लेकिन वैज्ञानिकों का महासागरों में नदियों के मुहाने के समीप विशाल ‘मृत क्षेत्रें’, विशेषकर उत्तरी अमेरिका में मिसीसीपी एवं चीन में यांग्सी जैसे विशाल जलग्रहण क्षेत्रें के अपवाह पर, हाल ही में ध्यान गया है। पोषण-तत्त्वों से समृद्ध जल धाराओं, नदियों और झीलों के माध्यम से प्रवाहित होता है एवं अंततः मुहानों (एस्चुएरी) एवं महासागर में पहुँचता है जहाँ पारितंत्र प्रभाव बहुत अधिक हो सकता है, वस्तुतः70,000 वर्ग किमी- तक विस्तृत क्षेत्र, में सभी अकशेरूकी एवं मछलियो की मृत्यु हो जाती है। अब सम्पूर्ण विश्व में 150 से अधिक समुद्री-क्षेत्र कृषि-वाहित उर्वरक और बड़े नगरों के मल-जल से विशेषतः नाइट्रोजन से समृद्ध होने से शैवाल पुंजों के अपघटित होने के परिणामस्वरूप लगातार ऑक्सीजन से वंचित हो रहे हैं। महासागरी मृत क्षेत्र औद्योगिक राष्ट्रों से विशेष रूप से सम्बद्ध हैं, तथा ये क्षेत्र प्रायः उन देशों से लगे हुए हैं जो किसानों को उत्पादकता बढ़ाने और अधिक उर्वरक के प्रयोग के लिए उनको कृषि हेतु आर्थिक सहायता देकर प्रोत्साहित करते हैं। इस परिच्छेद में मूल विषय क्या है? A पर्यावरण की संरक्षा के लिए समुचित विधि-निर्माण अनिवार्य है। B आधुनिक कृषि पर्यावरण के विनाश के लिए उत्तरदायी है C कृषि से अनुचित अपशिष्ट निस्तारण, जलीय पारितंत्र को विनष्ट कर सकता है। D कृषि में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग अवांछनीय है।
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विश्व के दुखों को केवल भौतिक सहायता द्वारा मिटाया नहीं जा सकता। जब तक कि मनुष्य का स्वभाव न बदले, उसकी भौतिक आवश्यकताएँ सदैव बढ़ती रहेंगी, और दुखों को सदा अनुभव किया जाता रहेगा, और भौतिक सहायता की कोई भी मात्र उन्हें पूर्णतः दूर नहीं कर सकेगी। समस्या का एकमात्र समाधान यह है कि मानव जाति को विशुद्ध बनाया जाए। अज्ञानता बुराई की जननी है, और उन सभी दुखों की भी, जिन्हें हम देखते हैं। मनुष्य को प्रकाश मिले, वे विशुद्ध और आत्मिक रूप से सशक्त एवं शिक्षित हों, केवल तभी दुनिया से दुख कम होंगे। हम देश के प्रत्येक घर को धर्मार्थ-शरणस्थल में बदल सकते हैं, हम धरती को अस्पतालों से भर सकते हैं, परंतु जब तक मनुष्य का चरित्र परिवर्तित न होगा मानवीय दुख अनवरत बने रहेंगे। परिच्छेद के अनुसार, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा, मनुष्य के दुखों के कारण के रूप में सर्वाधिक संभावित सत्य है? A समाज में व्याप्त बुरी आर्थिक और सामाजिक दशाएँ। B मनुष्य का अपना चरित्र परिवर्तित करने से इंकार। C उसके समाज से भौतिक और सांसारिक सहायता की अनुपस्थिति। D परिवर्तनशील सामाजिक संरचना के कारण अनवरत बढ़ती हुई भौतिक आवश्यकताएँ।
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विश्व के दुखों को केवल भौतिक सहायता द्वारा मिटाया नहीं जा सकता। जब तक कि मनुष्य का स्वभाव न बदले, उसकी भौतिक आवश्यकताएँ सदैव बढ़ती रहेंगी, और दुखों को सदा अनुभव किया जाता रहेगा, और भौतिक सहायता की कोई भी मात्र उन्हें पूर्णतः दूर नहीं कर सकेगी। समस्या का एकमात्र समाधान यह है कि मानव जाति को विशुद्ध बनाया जाए। अज्ञानता बुराई की जननी है, और उन सभी दुखों की भी, जिन्हें हम देखते हैं। मनुष्य को प्रकाश मिले, वे विशुद्ध और आत्मिक रूप से सशक्त एवं शिक्षित हों, केवल तभी दुनिया से दुख कम होंगे। हम देश के प्रत्येक घर को धर्मार्थ-शरणस्थल में बदल सकते हैं, हम धरती को अस्पतालों से भर सकते हैं, परंतु जब तक मनुष्य का चरित्र परिवर्तित न होगा मानवीय दुख अनवरत बने रहेंगे। परिच्छेद के संदर्भ में, निम्नलिखित धारणाएँ बनाई गई हैः 1- लेखक मानवीय दुखों के उन्मूलन में भौतिक और सांसारिक सहायता को प्राथमिक महत्त्व देता है। 2- धर्मार्थ आवास, अस्पताल इत्यादि मानवीय दुःखों को एक बड़ी सीमा तक दूर कर सकते हैं? इन धारणाओं में कौन-सा/से वैध है/हैं? A केवल 1 B केवल 2 C 1 और 2 दोनों D न तो 1 न ही 2
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निम्नलिखित परिच्छेद को पढ़िए और आगे आने वाले दो प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन प्रश्नांशाें के आपके उत्तर इस परिच्छेद पर ही आधारित होने चाहिए। सदी के आखिरी 25 वर्षों के दौरान किए गए पारिस्थितिक अनुसंधानों ने खनन, राजमार्ग निर्माण और वन प्रदेशों में की जाने वाली ऐसी अन्य अन्तर्वेधी गतिविधियों के कारण हुए आवास खंडन के हानिकर प्रभावों को सिद्ध किया है। जब जंगलों का एक बड़ा खंड और छोटे टुकड़ों में विखण्डित हो जाता है, तो इन सभी टुकड़ों के कोर मानवीय क्रियाकलापों के संपर्क में आ जाते हैं इसका परिणाम होता है संपूर्ण वन प्रदेश का अपकर्ष। वनाच्छादित भू-प्रदेशों और गलियारों का सातत्य भंग हो जाता है जिससे वन्य जीवन की अनेक विलोप-प्रवण जातियाँ प्रभावित होती हैं। इस प्रकार जैव-विविधता संरक्षण को सबसे गंभीर खतरा आवास-खंडन से माना जाता है। खनन कम्पनियों को वन भूमि का तदर्थ अनुदान, साथ ही निरकुंश गैर-कानूनी खनन इस खतरे को और बढ़ा रहे हैं। इस परिच्छेद का केन्द्र बिन्दु क्या है? A वनों में गैर-कानूनी खनन B वन्य जीवन का विलोपन C प्रकृति का संरक्षण D आवास का विघटन
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निम्नलिखित परिच्छेद को पढ़िए और आगे आने वाले दो प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन प्रश्नांशाें के आपके उत्तर इस परिच्छेद पर ही आधारित होने चाहिए। सदी के आखिरी 25 वर्षों के दौरान किए गए पारिस्थितिक अनुसंधानों ने खनन, राजमार्ग निर्माण और वन प्रदेशों में की जाने वाली ऐसी अन्य अन्तर्वेधी गतिविधियों के कारण हुए आवास खंडन के हानिकर प्रभावों को सिद्ध किया है। जब जंगलों का एक बड़ा खंड और छोटे टुकड़ों में विखण्डित हो जाता है, तो इन सभी टुकड़ों के कोर मानवीय क्रियाकलापों के संपर्क में आ जाते हैं इसका परिणाम होता है संपूर्ण वन प्रदेश का अपकर्ष। वनाच्छादित भू-प्रदेशों और गलियारों का सातत्य भंग हो जाता है जिससे वन्य जीवन की अनेक विलोप-प्रवण जातियाँ प्रभावित होती हैं। इस प्रकार जैव-विविधता संरक्षण को सबसे गंभीर खतरा आवास-खंडन से माना जाता है। खनन कम्पनियों को वन भूमि का तदर्थ अनुदान, साथ ही निरकुंश गैर-कानूनी खनन इस खतरे को और बढ़ा रहे हैं। वनाच्छादित भू-प्रदेशों तथा गलियारों का सातत्य बनाए रखने का क्या प्रयोजन है? 1. जैव-विविधता का संरक्षण 2. खजिन संसाधनों का प्रबंधन 3. मानवीय क्रियाकलापों के लिए वन भूमि का अनुदान नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए। A केवल 1 B 1 और 2 C 2 और 3 D 1, 2 और 3
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नीचे छह प्रश्नांश दिए गए हैं। प्रत्येक प्रश्नांश में एक स्थिति का वर्णन है, जिसके पश्चात् उसके चार संभव उत्तर दिए गए हैं। जिस उत्तर को आप सर्वाधिक उपयुक्त मानते हैं, उसे आप अपने उत्तर के रूप में अंकित कीजिए। प्रत्येक प्रश्नांश के लिए केवल एक ही उत्तर चुनिए। उत्तरों का मूल्यांकन, दी गई स्थिति के लिए उपयुक्त्त्ता के स्तर के आधार पर किया जाएगा। कृपया सभी प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन छह प्रश्नांशों के लिए गलत उत्तरों के लिए कोई दंड नहीं है। आप कार्यालयाध्यक्ष हैं। कुछ मकान कार्यालय कर्मियों को आवंटित करने के लिए सुरक्षित रखे गए हैं और आपको इस मामले में विवेकाधिकार प्राप्त है। मकानों के आंवटन के लिए कुछ नियम आपके द्वारा बनाए गए हैं और उन्हें सार्वजनिक कर दिया गया है। आपका निजी सचिव, जो आपके बहुत निकट है, आपके पास आता है और पैरवी करता है कि उसके पिता गंभीर रूप से बीमार है, अतः उसे मकान के आबंटन में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कार्यालय सचिवालय नियमानुसार इस प्रार्थना का परीक्षण कर उसके अनुरोध को टुकरा देता है और नियमानुसार प्रक्रिया अपनाने की संस्तुति करता है। आप अपने निजी सचिव को नाराज नहीं करना चाहते। इन परिस्थितियो में, आप क्या करेंगी? A उसे अपने कमरे में बुलाऐंगे और व्यक्तिगत रूप से स्पष्ट करेंगे कि आवंटन क्यों नहीं किया जा सकता। B उसकी वफादारी जीतने के लिए उसे मकान आबंटित कर देंगे। C यह सिद्ध करने के लिए कि आप निष्पक्ष हैं और आप किसी के साथ पक्षपात नहीं करते, कार्यालय टिप्पणी से सहमति व्यक्त करेंगे। D फाइल अपने पास रहने देंगे और कोई आदेश नहीं देंगे।
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नीचे छह प्रश्नांश दिए गए हैं। प्रत्येक प्रश्नांश में एक स्थिति का वर्णन है, जिसके पश्चात् उसके चार संभव उत्तर दिए गए हैं। जिस उत्तर को आप सर्वाधिक उपयुक्त मानते हैं, उसे आप अपने उत्तर के रूप में अंकित कीजिए। प्रत्येक प्रश्नांश के लिए केवल एक ही उत्तर चुनिए। उत्तरों का मूल्यांकन, दी गई स्थिति के लिए उपयुक्त्त्ता के स्तर के आधार पर किया जाएगा। कृपया सभी प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन छह प्रश्नांशों के लिए गलत उत्तरों के लिए कोई दंड नहीं है। दिल्ली में पंजीकृत व्यावसायिक टैक्सी से (दूसरे राज्य के) करीबी शहर की ओर जाते हुए, आपका चालक आपको बताता है कि चूंकि उसके पास उस शहर में टैक्सी चलाने का परमिट नहीं है अतः वह उसके परिवहन कार्यालय पर रुकेगा और चालीस रुपए प्रतिदिन का निर्धारित शुल्क अदा करेगा। काउंटर पर शुल्क अदा करते समय आप पाते हैं कि परिवहन लिपिक पचास रुपए अतिरिक्त वसूल रहा है जिसके लिए कोई रसीद नहीं दी जा रही है। आप अपनी बैठक के लिए जल्दी में है। इन परिस्थितियों में, आप क्या करेंगे? A काउंटर पर जाएंगे और लिपिक से वह धन वापस माँगेेंगे जो उसने अवैध रूप से लिया है। B कोई हस्तक्षेप नहीं करेंगे क्योंकि यह मामला टैक्सी चालक और कर अधिकारियों के बीच का है। C घटना का संज्ञान लेंगे और बाद में सम्बन्धित अधिकारियों से इसकी रिपोर्ट करेंगे। D इसे एक साधारण मामला समझेंगे और भूल जाएंगे।
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नीचे छह प्रश्नांश दिए गए हैं। प्रत्येक प्रश्नांश में एक स्थिति का वर्णन है, जिसके पश्चात् उसके चार संभव उत्तर दिए गए हैं। जिस उत्तर को आप सर्वाधिक उपयुक्त मानते हैं, उसे आप अपने उत्तर के रूप में अंकित कीजिए। प्रत्येक प्रश्नांश के लिए केवल एक ही उत्तर चुनिए। उत्तरों का मूल्यांकन, दी गई स्थिति के लिए उपयुक्त्त्ता के स्तर के आधार पर किया जाएगा। कृपया सभी प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन छह प्रश्नांशों के लिए गलत उत्तरों के लिए कोई दंड नहीं है। एक व्यक्ति दूर दराज के एक गाँव में रहता है जहाँ पहुँचने के लिए बस से लगभग दो घंटे लगते हैं। इस ग्रामीण का पड़ोसी बहुत ताकतवार भूस्वामी है जो इस गरीब ग्रामीण की जमीन जबर्दस्ती हथियाना चाहता है। आप जिला मजिस्टेªट हैं और स्थानीय मंत्री द्वारा बुलाई गई बैठक में व्यस्त हैें। ग्रामीण बस से और पैदल चलकर इतनी दूर से आपसे मिलने और उस ताकतवर भूस्वामी जमींदार से सुरक्षा हासिल करने के लिए प्रार्थना-पत्र देने आया है। ग्रामीण सभा कक्ष के बाहर एक घंटे तक प्रतीक्षा करता रहा। आप बैठक से बाहर आते हैं और दूसरी बैठक के लिए जाने की शीघ्रता में है। ग्रामीण अपना प्रार्थना-पत्र देने के लिए आपके पीछे आने लगता है। आप क्या करेंगे? A उसे अगली बैठक से आपके लौटने तक दो घंटे और प्रतीक्षा करने के लिए कहेंगे। B उसे बताएँगे कि मामला वास्तव में एक कनिष्ठ अधिकारी द्वारा देखा जाना है अतः वह प्रार्थना-पत्र उसे दे दे। C अपने एक वरिष्ठ मातहत अधिकारी को बुलाकर निर्देश देंगे कि वह ग्रामीण की समस्या का हल निकाले। D उसका प्रार्थना-पत्र तेजी से लेकर उससे कुछ प्रासंगिक प्रश्न उसकी समस्या के बारे में पूछेंगे और बैठक के लिए चले जाएंगे।
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नीचे छह प्रश्नांश दिए गए हैं। प्रत्येक प्रश्नांश में एक स्थिति का वर्णन है, जिसके पश्चात् उसके चार संभव उत्तर दिए गए हैं। जिस उत्तर को आप सर्वाधिक उपयुक्त मानते हैं, उसे आप अपने उत्तर के रूप में अंकित कीजिए। प्रत्येक प्रश्नांश के लिए केवल एक ही उत्तर चुनिए। उत्तरों का मूल्यांकन, दी गई स्थिति के लिए उपयुक्त्त्ता के स्तर के आधार पर किया जाएगा। कृपया सभी प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन छह प्रश्नांशों के लिए गलत उत्तरों के लिए कोई दंड नहीं है। जिस जिले में आप जिला मजिस्टेªट हैं वहां चीनी की किल्लत है। सरकार ने आदेश निकाला है कि वैवाहिक उत्सवों पर अधिकतम 30 किलो चीनी जारी की जा सकती है। आपके एक करीबी दोस्त के बेटे का विवाह होने वाला है और आपका मित्र अपने बेटे के विवाह के लिए कम-से-कम 50 किलो चीनी जारी करने का अनुरोध करता है। जब आप इस मामलें में सरकारी नियंत्रण के बारे में बताते हैं तो वह नाराज हो जाता है। उसका विश्वास है कि चूँकि आप जिला मजिस्ट्रेट हैं आप कितनी भी मात्र में चीनी जारी कर सकते हैं। आप उससे अपनी मित्रता में बिगाड़ नहीं चाहते। इन परिस्थितियों में, आप इस स्थिति से कैसे निपटेंगे? A उसे अतिरिक्त मात्र में चीनी जारी कर देंगे जिसके लिए आपके मित्र ने अनुरोध किया है। B अपने मित्र को अतिरिक्त मात्र में चीनी जारी न करके नियमों का सख्ती से पालन करेंगे। C अपने मित्र को सरकारी आदेशों की प्रति दिखलाएंगे और उसे नियमानुसार चीनी की कम मात्र स्वीकार करने के लिए तैयार करेंगे। D उसे, आवंटन करने वाले अधिकारी को सीधे प्रार्थना-पत्र देने की सलाह देंगे और सूचित करेंगे कि आप ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं करते।
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नीचे छह प्रश्नांश दिए गए हैं। प्रत्येक प्रश्नांश में एक स्थिति का वर्णन है, जिसके पश्चात् उसके चार संभव उत्तर दिए गए हैं। जिस उत्तर को आप सर्वाधिक उपयुक्त मानते हैं, उसे आप अपने उत्तर के रूप में अंकित कीजिए। प्रत्येक प्रश्नांश के लिए केवल एक ही उत्तर चुनिए। उत्तरों का मूल्यांकन, दी गई स्थिति के लिए उपयुक्त्त्ता के स्तर के आधार पर किया जाएगा। कृपया सभी प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन छह प्रश्नांशों के लिए गलत उत्तरों के लिए कोई दंड नहीं है। आप एक ऐसे क्षेत्र में परिवार नियोजन कार्यक्रम लागू करने के प्रभारी हैं, जहाँ वर्तमान नीति का कड़ा विरोध हो रहा है। आप निवासियों को छोटे परविार रखने की आवश्यकता मनवाना चाहते हैं। इस संदेश को संप्रेषित करने का सर्वोत्तम तरीका क्या होगा? A निवासियों को स्वास्थ्य और जीवन स्तर सुधारने हेतु परिवार नियोजन की आवश्यकता तर्कसंगत रूप से समझाना। B देर से विवाह एवं बच्चों के बीच उचित अंतर को प्रोत्साहित करना। C परिवार नियोजन युक्तियाँ अपनाने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना। D ऐसे लोगों से, जिनका बंध्यकरण हो चुका है अथवा जो गर्भनिरोधक प्रयोग कर रहे हैं, निवासियों से प्रत्यक्षतः बातज करने का आग्रह करना।
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नीचे छह प्रश्नांश दिए गए हैं। प्रत्येक प्रश्नांश में एक स्थिति का वर्णन है, जिसके पश्चात् उसके चार संभव उत्तर दिए गए हैं। जिस उत्तर को आप सर्वाधिक उपयुक्त मानते हैं, उसे आप अपने उत्तर के रूप में अंकित कीजिए। प्रत्येक प्रश्नांश के लिए केवल एक ही उत्तर चुनिए। उत्तरों का मूल्यांकन, दी गई स्थिति के लिए उपयुक्त्त्ता के स्तर के आधार पर किया जाएगा। कृपया सभी प्रश्नांशों के उत्तर दीजिए। इन छह प्रश्नांशों के लिए गलत उत्तरों के लिए कोई दंड नहीं है। आप एक विश्वविद्यालय में शिक्षक हैं और एक विषय विशेष पर प्रश्न बना रहे हैं। आपके सहकर्मियों में से एक, जिसका पुत्र उसी विषय पर परीक्षा की तैयारी कर रहा है, आपके पास आता है और आपको सूचना देता है कि यह उसके पुत्र का परीक्षा को उत्तीर्ण करने का आखिरी अवसर है और आपसे, परीक्षा में आने वाले प्रश्नों के संकेत देकर, पुत्र की सहायता करने हेतु आग्रह करता है। अतीत में आपके उस सहकर्मी ने दूसरे मामले में आपकी सहायता की है। आपका सहकर्मी आपको सूचित करता है कि परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने पर उसका पुत्र अवसाद से ग्रस्त हो जाएगा। इन परिस्थितियों में आप क्या करेंगे ? A अतीत में उसके द्वारा दी गई सहायता को देखते हुए उसकी सहायता करेंगे। B खेद व्यक्त करेंगे कि आप उसकी कोई सहायता नहीं कर सकते। C अपने सहकर्मी को आप समझाएंगे कि ऐसा करने से विश्वविद्यालय के अधिकारियों का विश्वास भंग होगा और आप उसकी सहायता करने की स्थिति में नहीं हैं। D उच्चाधिकारियों को अपने सहकर्मी के आचार की शिकायत करेंगे।