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GS-II

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Practice Test-8

Question
63 out of 80
 

Read the following passage carefully and answer the questions that follow:

It would be a mistake if the house got into the habit of calling for explanations on varying episodes in this dangerous and widespread war and asked for an account to be given of when any action was lost or any part of the front was beaten in. In the first place no full explanation could possibly be given without revealing valuable information to the enemy.

The dictator governments are not under any such pressure to explain or excuse any ill success that may befall on them, unlike these formidable potentates, I am only a servant of the crown and parliament and I am always at the disposal of the house of commons. This house would not wish any servant whom it has entrusted with such duties to be at disadvantage against our antagonists.

I have not heard that Hitler had to attend the Reichstage and tell them why he sent the “Bismark”, on the disastrous cruise. Neither have I heard of any convincing statement by Mussolini of the reasons why the greatest part of his African Empire has been conquered and so many of his soldiers are prisoners in our hands. I should feel needless disadvantage if I were obliged to give an account of our operations irrespective of whether the time is suitable or not. It would be better if I am permitted on behalf of government to choose the occasion to make statements about the war.


What does the speaker mean by “Formidable potentates” and “our antagonists”?



A The enemies of the allied powers and the powerful rulers

B The powerful rulers and the enemies of the allied powers.

C The completely free person at the top and the opposition in the house

D None of these

Ans. B

Practice Test-8 Flashcard List

80 flashcards
1)
निम्नलिखित दो परिच्छेदों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए। हमें पारिस्थितिकी को समझना क्यों चाहते हैं इसके अध्ययन हेतु सामान्य तौर पर चार मौलिक कारण बताए गए हैं: पहला, यह कि चूंकि हम सभी एक स्तर तक प्राकृतिक अथवा आंशिक रूप से प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के अधीन रहते हैं अतः ऐसी स्थिति में हम अपने आस-पास के पर्यावरण का अध्ययन करके काफी आनन्द की प्राप्ति कर सकते हैं। जैसे कि कोई कला इतिहास कोर्स के माध्यम से बेहतर ढंग से कला की कद्र कर सकता है उसी प्रकार वह पारिस्थितिकी की बेहतर समझ-बूझ के साथ अपने आस-पास की प्रकृति को समझ सकता है। दूसरा, यह कि मानव अर्थव्यवस्थाएँ व्यापक तौर पर प्रकृति के दोहन एवं प्रबंधन पर आधारित हैं। व्यावहारिक(Applied) पारिस्थितिकी का प्रयोग हमें हमारी जरूरत का भोजन व वस्त्रदि प्रदान करने हेतु वानिकी, मत्स्यिकी, रेंज प्रबंधन, कृषि क्षेत्रें इत्यादि में प्रतिदिन होता है। उदाहरणार्थ, अर्जेण्टीना में कई क्षेत्रें में पारिस्थिति एवं कृषि के बीच कोई अंतर नहीं है, जो अनिवार्यतः फसलों एवं चरागाहों की पारिस्थितिकी है। तीसरा, मानव समाजों को हमारे द्वारा अध्ययन किए गए पारिस्थितिक दृष्टिकोणों, उदाहरणार्थ, हमारी अपनी प्रजातियों की जनसंख्या गतिशीलता (जनांकिकी), भोजन एवं हमारे समाज से प्रवहमान जीवाश्म ऊर्जा, से बहुत अच्छे ढंग से समझा जा सकता है। चौथा, मनुष्य कई तरीकों से वैश्विक (ग्लोबल) पर्यावरण को बदलता हुआ प्रतीत होता है। पारिस्थितिकी हमें यह समझने की दृष्टि से काफी उपयोगी है कि ये परिवर्तन वस्तुतः क्या हैं तथा इनके विभिन्न पारिस्थितिकी प्रणालियों पर क्या प्रभाव हो सकते हैं तथा प्रकृति में इन परिवर्तनों का शमन करने या इन्हें बदलने का प्रयास करने अथवा मानवीय अर्थव्यवस्थाओं में हम किस प्रकार हस्तक्षेप कर सकते हैं। बहुत से ऐसे पेशेवर पारिस्थितिकीविद् हैं जो यह विश्वास करते हैं कि मानवीय क्रियाकलापों से होने वाले ये प्रत्यक्ष परिवर्तन प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र एवं मानवीय अर्थव्यवस्थाओं दोनों को भारी नुकसान पहुँचाने में सक्षम है। इन मुद्दों को समझना, पूर्वानुमान लगाना और इनके अनुकूल बनना मनुष्य द्वारा चर्चा किए जा सकने वाले सभी संभावित मुद्दों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। इस मामले में पारिस्थितिकी एवं पर्यावरणवाद को एक ही माना जा सकता है। गद्यांश के संदर्भ मे निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए- (i) अर्जेण्टीना में पारिस्थितिकी और कृषि में कोई अंतर नहीं है। (ii) मानवीय क्रियाकलापों ने प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुंचाया है। नीचे दिये कूटों में से सही उत्तर का चुनाव करें: A केवल (i) B केवल (ii) C (i) और (ii) दोनों D न तो (i) न ही (ii)
2)
निम्नलिखित दो परिच्छेदों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए। हमें पारिस्थितिकी को समझना क्यों चाहते हैं इसके अध्ययन हेतु सामान्य तौर पर चार मौलिक कारण बताए गए हैं: पहला, यह कि चूंकि हम सभी एक स्तर तक प्राकृतिक अथवा आंशिक रूप से प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के अधीन रहते हैं अतः ऐसी स्थिति में हम अपने आस-पास के पर्यावरण का अध्ययन करके काफी आनन्द की प्राप्ति कर सकते हैं। जैसे कि कोई कला इतिहास कोर्स के माध्यम से बेहतर ढंग से कला की कद्र कर सकता है उसी प्रकार वह पारिस्थितिकी की बेहतर समझ-बूझ के साथ अपने आस-पास की प्रकृति को समझ सकता है। दूसरा, यह कि मानव अर्थव्यवस्थाएँ व्यापक तौर पर प्रकृति के दोहन एवं प्रबंधन पर आधारित हैं। व्यावहारिक(Applied) पारिस्थितिकी का प्रयोग हमें हमारी जरूरत का भोजन व वस्त्रदि प्रदान करने हेतु वानिकी, मत्स्यिकी, रेंज प्रबंधन, कृषि क्षेत्रें इत्यादि में प्रतिदिन होता है। उदाहरणार्थ, अर्जेण्टीना में कई क्षेत्रें में पारिस्थिति एवं कृषि के बीच कोई अंतर नहीं है, जो अनिवार्यतः फसलों एवं चरागाहों की पारिस्थितिकी है। तीसरा, मानव समाजों को हमारे द्वारा अध्ययन किए गए पारिस्थितिक दृष्टिकोणों, उदाहरणार्थ, हमारी अपनी प्रजातियों की जनसंख्या गतिशीलता (जनांकिकी), भोजन एवं हमारे समाज से प्रवहमान जीवाश्म ऊर्जा, से बहुत अच्छे ढंग से समझा जा सकता है। चौथा, मनुष्य कई तरीकों से वैश्विक (ग्लोबल) पर्यावरण को बदलता हुआ प्रतीत होता है। पारिस्थितिकी हमें यह समझने की दृष्टि से काफी उपयोगी है कि ये परिवर्तन वस्तुतः क्या हैं तथा इनके विभिन्न पारिस्थितिकी प्रणालियों पर क्या प्रभाव हो सकते हैं तथा प्रकृति में इन परिवर्तनों का शमन करने या इन्हें बदलने का प्रयास करने अथवा मानवीय अर्थव्यवस्थाओं में हम किस प्रकार हस्तक्षेप कर सकते हैं। बहुत से ऐसे पेशेवर पारिस्थितिकीविद् हैं जो यह विश्वास करते हैं कि मानवीय क्रियाकलापों से होने वाले ये प्रत्यक्ष परिवर्तन प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र एवं मानवीय अर्थव्यवस्थाओं दोनों को भारी नुकसान पहुँचाने में सक्षम है। इन मुद्दों को समझना, पूर्वानुमान लगाना और इनके अनुकूल बनना मनुष्य द्वारा चर्चा किए जा सकने वाले सभी संभावित मुद्दों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। इस मामले में पारिस्थितिकी एवं पर्यावरणवाद को एक ही माना जा सकता है। व्यावहारिक पारिस्थितिकी के घटक क्या हैं? (i) मानवीय अर्थव्यवस्थाएँ (ii) वानिकी (iii) पर्यावरणवाद नीचे दिये कूटों में से सही उत्तर का चुनाव करें: A केवल (ii) और (iii) B केवल (ii) C (i), (ii) D कोई नहीं
3)
निम्नलिखित दो परिच्छेदों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए। हमें पारिस्थितिकी को समझना क्यों चाहते हैं इसके अध्ययन हेतु सामान्य तौर पर चार मौलिक कारण बताए गए हैं: पहला, यह कि चूंकि हम सभी एक स्तर तक प्राकृतिक अथवा आंशिक रूप से प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के अधीन रहते हैं अतः ऐसी स्थिति में हम अपने आस-पास के पर्यावरण का अध्ययन करके काफी आनन्द की प्राप्ति कर सकते हैं। जैसे कि कोई कला इतिहास कोर्स के माध्यम से बेहतर ढंग से कला की कद्र कर सकता है उसी प्रकार वह पारिस्थितिकी की बेहतर समझ-बूझ के साथ अपने आस-पास की प्रकृति को समझ सकता है। दूसरा, यह कि मानव अर्थव्यवस्थाएँ व्यापक तौर पर प्रकृति के दोहन एवं प्रबंधन पर आधारित हैं। व्यावहारिक(Applied) पारिस्थितिकी का प्रयोग हमें हमारी जरूरत का भोजन व वस्त्रदि प्रदान करने हेतु वानिकी, मत्स्यिकी, रेंज प्रबंधन, कृषि क्षेत्रें इत्यादि में प्रतिदिन होता है। उदाहरणार्थ, अर्जेण्टीना में कई क्षेत्रें में पारिस्थिति एवं कृषि के बीच कोई अंतर नहीं है, जो अनिवार्यतः फसलों एवं चरागाहों की पारिस्थितिकी है। तीसरा, मानव समाजों को हमारे द्वारा अध्ययन किए गए पारिस्थितिक दृष्टिकोणों, उदाहरणार्थ, हमारी अपनी प्रजातियों की जनसंख्या गतिशीलता (जनांकिकी), भोजन एवं हमारे समाज से प्रवहमान जीवाश्म ऊर्जा, से बहुत अच्छे ढंग से समझा जा सकता है। चौथा, मनुष्य कई तरीकों से वैश्विक (ग्लोबल) पर्यावरण को बदलता हुआ प्रतीत होता है। पारिस्थितिकी हमें यह समझने की दृष्टि से काफी उपयोगी है कि ये परिवर्तन वस्तुतः क्या हैं तथा इनके विभिन्न पारिस्थितिकी प्रणालियों पर क्या प्रभाव हो सकते हैं तथा प्रकृति में इन परिवर्तनों का शमन करने या इन्हें बदलने का प्रयास करने अथवा मानवीय अर्थव्यवस्थाओं में हम किस प्रकार हस्तक्षेप कर सकते हैं। बहुत से ऐसे पेशेवर पारिस्थितिकीविद् हैं जो यह विश्वास करते हैं कि मानवीय क्रियाकलापों से होने वाले ये प्रत्यक्ष परिवर्तन प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र एवं मानवीय अर्थव्यवस्थाओं दोनों को भारी नुकसान पहुँचाने में सक्षम है। इन मुद्दों को समझना, पूर्वानुमान लगाना और इनके अनुकूल बनना मनुष्य द्वारा चर्चा किए जा सकने वाले सभी संभावित मुद्दों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। इस मामले में पारिस्थितिकी एवं पर्यावरणवाद को एक ही माना जा सकता है। निम्नलिखित में कौन-सा कथन असत्य है? A एक इतिहास विशेषज्ञ कला की बेहतर ढंग से कद्र कर सकता है। B अर्थव्यवस्था गहन रूप से पारिस्थितिकी से संबंधित है। C पर्यावरण प्रणाली में परिवर्तनों का शमन करने में पारिस्थितिकी का अध्ययन हमारी मदद करता है। D सभी सत्य है।
4)
निम्नलिखित दो परिच्छेदों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए। हमें पारिस्थितिकी को समझना क्यों चाहते हैं इसके अध्ययन हेतु सामान्य तौर पर चार मौलिक कारण बताए गए हैं: पहला, यह कि चूंकि हम सभी एक स्तर तक प्राकृतिक अथवा आंशिक रूप से प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के अधीन रहते हैं अतः ऐसी स्थिति में हम अपने आस-पास के पर्यावरण का अध्ययन करके काफी आनन्द की प्राप्ति कर सकते हैं। जैसे कि कोई कला इतिहास कोर्स के माध्यम से बेहतर ढंग से कला की कद्र कर सकता है उसी प्रकार वह पारिस्थितिकी की बेहतर समझ-बूझ के साथ अपने आस-पास की प्रकृति को समझ सकता है। दूसरा, यह कि मानव अर्थव्यवस्थाएँ व्यापक तौर पर प्रकृति के दोहन एवं प्रबंधन पर आधारित हैं। व्यावहारिक(Applied) पारिस्थितिकी का प्रयोग हमें हमारी जरूरत का भोजन व वस्त्रदि प्रदान करने हेतु वानिकी, मत्स्यिकी, रेंज प्रबंधन, कृषि क्षेत्रें इत्यादि में प्रतिदिन होता है। उदाहरणार्थ, अर्जेण्टीना में कई क्षेत्रें में पारिस्थिति एवं कृषि के बीच कोई अंतर नहीं है, जो अनिवार्यतः फसलों एवं चरागाहों की पारिस्थितिकी है। तीसरा, मानव समाजों को हमारे द्वारा अध्ययन किए गए पारिस्थितिक दृष्टिकोणों, उदाहरणार्थ, हमारी अपनी प्रजातियों की जनसंख्या गतिशीलता (जनांकिकी), भोजन एवं हमारे समाज से प्रवहमान जीवाश्म ऊर्जा, से बहुत अच्छे ढंग से समझा जा सकता है। चौथा, मनुष्य कई तरीकों से वैश्विक (ग्लोबल) पर्यावरण को बदलता हुआ प्रतीत होता है। पारिस्थितिकी हमें यह समझने की दृष्टि से काफी उपयोगी है कि ये परिवर्तन वस्तुतः क्या हैं तथा इनके विभिन्न पारिस्थितिकी प्रणालियों पर क्या प्रभाव हो सकते हैं तथा प्रकृति में इन परिवर्तनों का शमन करने या इन्हें बदलने का प्रयास करने अथवा मानवीय अर्थव्यवस्थाओं में हम किस प्रकार हस्तक्षेप कर सकते हैं। बहुत से ऐसे पेशेवर पारिस्थितिकीविद् हैं जो यह विश्वास करते हैं कि मानवीय क्रियाकलापों से होने वाले ये प्रत्यक्ष परिवर्तन प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र एवं मानवीय अर्थव्यवस्थाओं दोनों को भारी नुकसान पहुँचाने में सक्षम है। इन मुद्दों को समझना, पूर्वानुमान लगाना और इनके अनुकूल बनना मनुष्य द्वारा चर्चा किए जा सकने वाले सभी संभावित मुद्दों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। इस मामले में पारिस्थितिकी एवं पर्यावरणवाद को एक ही माना जा सकता है। पारिस्थितिकी को समझने के क्या लाभ हैं? (i) प्रकृति के सौंदर्य की बेहतर ढंग से कद्र करने में। (ii) वैश्विक जलवायु परिवर्तन को समझने में सहायक। (iii) प्रकृति के प्रबंधन में सहायक। नीचे दिये कूटों में से सही उत्तर का चुनाव करें- A केवल (i) और (ii) B केवल (ii) और (iii) C केवल (iii) D (i), (ii) और (iii)
5)
एक पूर्णतः भारतीय शोधकर्ता दल द्वारा भारतीय जनसंख्या में एक ऐसे नए जीन की खोज की गई है जो टाईप-2 मधुमेह का कारण है। इसने इस रोग की क्रियावधि की खोज को एक नई दिशा दी है जिससे हम अब तक अनभिज्ञ रहे हैं। ‘डायबिटीज’ के दिसंबर संस्करण में प्रकाशित शोधपत्र के अनुसार इस जीन की पहचान भारतीय उपमहाद्वीप में12,500 से अधिक व्यक्तियों के नमूनों के परीक्षण के बाद हुई। ‘‘पहचाना गया नया जीन एक न्यूरो जीन है, जिसका डायबिटीज से कोई ज्ञात संबंध नहीं है। तो फिर टाईप-2 डायबिटीज में यह क्या कर रहा है?’’ अध्ययन के प्रधान अन्वेषणकर्ता द्वैपायन भारद्वाज ने यह बात कही। आगे उन्होंने कहा कि ‘‘सामान्य रूपान्तरकों में यह भारतीय जनसंख्या में पाया जाने वाला एक प्रमुख रूपांतरक है। इसलिए निश्चित ही इसकी भूमिका है। मेरा अनुमान है कि संभवतः डायबिटीज बहुत हद तक एक तंत्रिका संबंधी विकृति है- संभवतः यह खाने के प्रति उस प्रलोभन का उल्लेख करता है जो अपने सामने अच्छे खाने की एक प्लेट देखकर आपको होता है?’’ यह जीन भारतीय जनसंख्या में टाईप-2 डायबिटीज होने के जोखिम को 1-6 गुना अधिक कर देता है। एम्स (AIIMS) में एंडोक्राइनोलॉजी के प्रोफेसर और शोधपत्र के लेखकों में से एक निखिल टंडन ने कहा कि न्यूरो जीन की संलिप्तता से एक नए क्षेत्र का पता चला है। इसने इस बीमारी की जाँच की क्रियाविधि को नई दिशा दी है। आगे उन्होंने कहा कि इसकी प्रक्रिया को समझने से इसकी पहचान और उपचार के तरीकों में सुधार आएगा, हालाँकि इसमें अभी वक्त लगेगा। भारतीय जनसंख्या में डायबिटीज के साथ पाए जाने की जितनी अधिक संभाव्यता इस जीन की है उतनी किसी अन्य जीन की नहीं। डॉ- भारद्वाज कहते हैं कि इस अध्ययन का एक अन्य मुख्य बिन्दु यह है कि यह पूरी तरह से भारतीय है जिसका सैम्पल आकार बहुत बड़ा है। जिन दो समूहों का अध्ययन किया गया उनमें उत्तर भारतीय और द्रविड़ शामिल हैं, दूसरा वाला नमूना चैन्नई स्थित मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन- इंडियन काउंसिल फॉर मैडिकल रिसर्च एडवांस्ड सेंटर फॉर जिनोमिक्स ऑफ डायबिटीज द्वारा दिए गए थे। निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए- (i) भारतीय शोधकर्ताओं द्वारा एक नए जीन की खोज की गई है जो टाईप-2 डायबिटीज का कारण है। (ii) जिस नए जीन की पहचान की गई है, वह एक न्यूरो जीन है जो भारतीय जनसंख्या में टाइप-2 डायबिटीज का प्रमुख रूपांतरक कारण हो सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? A केवल (i) B केवल (ii) C (i) और (ii) दोनों D न तो (i) न ही (ii)
6)
एक पूर्णतः भारतीय शोधकर्ता दल द्वारा भारतीय जनसंख्या में एक ऐसे नए जीन की खोज की गई है जो टाईप-2 मधुमेह का कारण है। इसने इस रोग की क्रियावधि की खोज को एक नई दिशा दी है जिससे हम अब तक अनभिज्ञ रहे हैं। ‘डायबिटीज’ के दिसंबर संस्करण में प्रकाशित शोधपत्र के अनुसार इस जीन की पहचान भारतीय उपमहाद्वीप में12,500 से अधिक व्यक्तियों के नमूनों के परीक्षण के बाद हुई। ‘‘पहचाना गया नया जीन एक न्यूरो जीन है, जिसका डायबिटीज से कोई ज्ञात संबंध नहीं है। तो फिर टाईप-2 डायबिटीज में यह क्या कर रहा है?’’ अध्ययन के प्रधान अन्वेषणकर्ता द्वैपायन भारद्वाज ने यह बात कही। आगे उन्होंने कहा कि ‘‘सामान्य रूपान्तरकों में यह भारतीय जनसंख्या में पाया जाने वाला एक प्रमुख रूपांतरक है। इसलिए निश्चित ही इसकी भूमिका है। मेरा अनुमान है कि संभवतः डायबिटीज बहुत हद तक एक तंत्रिका संबंधी विकृति है- संभवतः यह खाने के प्रति उस प्रलोभन का उल्लेख करता है जो अपने सामने अच्छे खाने की एक प्लेट देखकर आपको होता है?’’ यह जीन भारतीय जनसंख्या में टाईप-2 डायबिटीज होने के जोखिम को 1-6 गुना अधिक कर देता है। एम्स (AIIMS) में एंडोक्राइनोलॉजी के प्रोफेसर और शोधपत्र के लेखकों में से एक निखिल टंडन ने कहा कि न्यूरो जीन की संलिप्तता से एक नए क्षेत्र का पता चला है। इसने इस बीमारी की जाँच की क्रियाविधि को नई दिशा दी है। आगे उन्होंने कहा कि इसकी प्रक्रिया को समझने से इसकी पहचान और उपचार के तरीकों में सुधार आएगा, हालाँकि इसमें अभी वक्त लगेगा। भारतीय जनसंख्या में डायबिटीज के साथ पाए जाने की जितनी अधिक संभाव्यता इस जीन की है उतनी किसी अन्य जीन की नहीं। डॉ- भारद्वाज कहते हैं कि इस अध्ययन का एक अन्य मुख्य बिन्दु यह है कि यह पूरी तरह से भारतीय है जिसका सैम्पल आकार बहुत बड़ा है। जिन दो समूहों का अध्ययन किया गया उनमें उत्तर भारतीय और द्रविड़ शामिल हैं, दूसरा वाला नमूना चैन्नई स्थित मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन- इंडियन काउंसिल फॉर मैडिकल रिसर्च एडवांस्ड सेंटर फॉर जिनोमिक्स ऑफ डायबिटीज द्वारा दिए गए थे। गद्यांश के आधार पर नए जीन के बारे में निश्चित तौर पर क्या कहा जा सकता है? (i) यह डायबिटीज की क्रियाविधि से संबंधित शोध को एक नया आयाम प्रदान करता है। (ii) यह बहुत हद तक एक तंत्रिका संबंधी विकृति है जो डायबिटीज के मरीजों में अच्छा खाना देखकर प्रलोभन जगाने का कारण है। (iii) प्रमुख रूपांतरकों (variants) में से यह भारतीय जनसंख्या में पाया जाने वाला सामान्य रूपांतरक है। निम्नलिखित कूटों में से सही उत्तर चुनिए- A केवल (i) B केवल (ii) C केवल (i) और (ii) D (i), (ii) और (iii)
7)
एक पूर्णतः भारतीय शोधकर्ता दल द्वारा भारतीय जनसंख्या में एक ऐसे नए जीन की खोज की गई है जो टाईप-2 मधुमेह का कारण है। इसने इस रोग की क्रियावधि की खोज को एक नई दिशा दी है जिससे हम अब तक अनभिज्ञ रहे हैं। ‘डायबिटीज’ के दिसंबर संस्करण में प्रकाशित शोधपत्र के अनुसार इस जीन की पहचान भारतीय उपमहाद्वीप में12,500 से अधिक व्यक्तियों के नमूनों के परीक्षण के बाद हुई। ‘‘पहचाना गया नया जीन एक न्यूरो जीन है, जिसका डायबिटीज से कोई ज्ञात संबंध नहीं है। तो फिर टाईप-2 डायबिटीज में यह क्या कर रहा है?’’ अध्ययन के प्रधान अन्वेषणकर्ता द्वैपायन भारद्वाज ने यह बात कही। आगे उन्होंने कहा कि ‘‘सामान्य रूपान्तरकों में यह भारतीय जनसंख्या में पाया जाने वाला एक प्रमुख रूपांतरक है। इसलिए निश्चित ही इसकी भूमिका है। मेरा अनुमान है कि संभवतः डायबिटीज बहुत हद तक एक तंत्रिका संबंधी विकृति है- संभवतः यह खाने के प्रति उस प्रलोभन का उल्लेख करता है जो अपने सामने अच्छे खाने की एक प्लेट देखकर आपको होता है?’’ यह जीन भारतीय जनसंख्या में टाईप-2 डायबिटीज होने के जोखिम को 1-6 गुना अधिक कर देता है। एम्स (AIIMS) में एंडोक्राइनोलॉजी के प्रोफेसर और शोधपत्र के लेखकों में से एक निखिल टंडन ने कहा कि न्यूरो जीन की संलिप्तता से एक नए क्षेत्र का पता चला है। इसने इस बीमारी की जाँच की क्रियाविधि को नई दिशा दी है। आगे उन्होंने कहा कि इसकी प्रक्रिया को समझने से इसकी पहचान और उपचार के तरीकों में सुधार आएगा, हालाँकि इसमें अभी वक्त लगेगा। भारतीय जनसंख्या में डायबिटीज के साथ पाए जाने की जितनी अधिक संभाव्यता इस जीन की है उतनी किसी अन्य जीन की नहीं। डॉ- भारद्वाज कहते हैं कि इस अध्ययन का एक अन्य मुख्य बिन्दु यह है कि यह पूरी तरह से भारतीय है जिसका सैम्पल आकार बहुत बड़ा है। जिन दो समूहों का अध्ययन किया गया उनमें उत्तर भारतीय और द्रविड़ शामिल हैं, दूसरा वाला नमूना चैन्नई स्थित मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन- इंडियन काउंसिल फॉर मैडिकल रिसर्च एडवांस्ड सेंटर फॉर जिनोमिक्स ऑफ डायबिटीज द्वारा दिए गए थे। गद्यांश के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए- (i) भारतीय शोधकर्ता इस बात का दावा करते हैं कि उनके द्वारा खोजा गया जीन किसी अन्य जीन की अपेक्षा डायबिटीज के साथ भारतीयो में अधिक पाया जाता है। (ii) न्यूरो जीन की संलिप्तता के आधार पर डायबिटीज की क्रियाविधि को समझने से आने वाले दिनों में जाँच और उपचार की विधियों में सुधार होगा। (iii) यह शोध भारतीय जनसंख्या के आँकड़ों पर आधारित है जिनमें मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन द्वारा प्रदत्त द्रविड़ों के आँकड़े भी शामिल है। (iv) न्यूरो जीन के लक्षण वाले टाईप-2 डायबिटीज से ग्रस्त भारतीय उपमहाद्वीप के12,500 से अधिक व्यक्तियों का परीक्षण किया गया। (v) न्यूरो जीन के कारण टाईप-2 डायबिटीज होने का जोखिम भारतीयों में शेष विश्व में टाइप-2 डायबिटीज के पीड़ितों की तुलना में 1-6 गुना अधिक है। दिए गए कूटों में से सही उत्तर का चुनाव कीजिए- A केवल (i), (ii) और (iii) B केवल (i) और (iii) C केवल (i), (ii) और (iv) D केवल (i), (iii) और (v)
8)
एक पूर्णतः भारतीय शोधकर्ता दल द्वारा भारतीय जनसंख्या में एक ऐसे नए जीन की खोज की गई है जो टाईप-2 मधुमेह का कारण है। इसने इस रोग की क्रियावधि की खोज को एक नई दिशा दी है जिससे हम अब तक अनभिज्ञ रहे हैं। ‘डायबिटीज’ के दिसंबर संस्करण में प्रकाशित शोधपत्र के अनुसार इस जीन की पहचान भारतीय उपमहाद्वीप में12,500 से अधिक व्यक्तियों के नमूनों के परीक्षण के बाद हुई। ‘‘पहचाना गया नया जीन एक न्यूरो जीन है, जिसका डायबिटीज से कोई ज्ञात संबंध नहीं है। तो फिर टाईप-2 डायबिटीज में यह क्या कर रहा है?’’ अध्ययन के प्रधान अन्वेषणकर्ता द्वैपायन भारद्वाज ने यह बात कही। आगे उन्होंने कहा कि ‘‘सामान्य रूपान्तरकों में यह भारतीय जनसंख्या में पाया जाने वाला एक प्रमुख रूपांतरक है। इसलिए निश्चित ही इसकी भूमिका है। मेरा अनुमान है कि संभवतः डायबिटीज बहुत हद तक एक तंत्रिका संबंधी विकृति है- संभवतः यह खाने के प्रति उस प्रलोभन का उल्लेख करता है जो अपने सामने अच्छे खाने की एक प्लेट देखकर आपको होता है?’’ यह जीन भारतीय जनसंख्या में टाईप-2 डायबिटीज होने के जोखिम को 1-6 गुना अधिक कर देता है। एम्स (AIIMS) में एंडोक्राइनोलॉजी के प्रोफेसर और शोधपत्र के लेखकों में से एक निखिल टंडन ने कहा कि न्यूरो जीन की संलिप्तता से एक नए क्षेत्र का पता चला है। इसने इस बीमारी की जाँच की क्रियाविधि को नई दिशा दी है। आगे उन्होंने कहा कि इसकी प्रक्रिया को समझने से इसकी पहचान और उपचार के तरीकों में सुधार आएगा, हालाँकि इसमें अभी वक्त लगेगा। भारतीय जनसंख्या में डायबिटीज के साथ पाए जाने की जितनी अधिक संभाव्यता इस जीन की है उतनी किसी अन्य जीन की नहीं। डॉ- भारद्वाज कहते हैं कि इस अध्ययन का एक अन्य मुख्य बिन्दु यह है कि यह पूरी तरह से भारतीय है जिसका सैम्पल आकार बहुत बड़ा है। जिन दो समूहों का अध्ययन किया गया उनमें उत्तर भारतीय और द्रविड़ शामिल हैं, दूसरा वाला नमूना चैन्नई स्थित मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन- इंडियन काउंसिल फॉर मैडिकल रिसर्च एडवांस्ड सेंटर फॉर जिनोमिक्स ऑफ डायबिटीज द्वारा दिए गए थे। निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गद्यांश के मूल विचार को व्यक्त करता है? A एक नए जीन की खोज जो कि टाईप-2 डायबिटीज का कारण है। B एक नए जीन की खोज जो कि भारतीय जनसंख्या में टाईप-2 डायबिटीज का कारण हो सकता है। C न्यूरो जीन जीनों का एक नया रूपांतरक है जो भारतीयों में टाइप-2 डायबिटीज का कारण है। D भारतीय वैज्ञानिकों ने न्यूरो जोन के कारण होने वाले टाइप-2 डायबिटीज को सफलतापूर्वक खोज निकाला है।
9)
10)
11)
(i) A, B, C, D, E, F और G सात व्यक्ति हैं। जिन्होंने भिन्न-भिन्न रंगों-सफ़ेद, लाल, काले, हरे, पीले, नीले तथा क्रीम की कमीजें और भिन्न-भिन्न रंगों-नीले, लाल, सफ़ेद, काले, क्रीम, पीले और इंडिगो की पतलूनें पहन रखी हैं। व्यक्ति के कमीजों के रंग तथा पतलूनों के रंग उसी ÿम में होने आवश्यक नहीं है। कोई भी व्यक्ति एक जैसे रंग की कमीज व पतलून नहीं पहने हुए है। (ii) B ने लाल रंग की कमीज पहन रखी है तथा क्रीम या पीले रंग की पतलून नहीं पहन रखी है। D ने हरे रंग की कमीज तथा इंडिगो रंग की पतलून पहन रखी है। A की कमीज तथा F की पतलून का रंग एक जैसा है। E की कमीज तथा C की पतलून का रंग एक जैसा है। G ने नीली कमीज पहन रखी है। E ने काली पतलून पहन रखी है। F ने कोई पीली पोशाक नहीं पहन रखी है। लाल और नीली क्रमशः कमीज व पतलून का संयोजन किसी व्यक्ति का नहीं है। क्रीम रंग की कमीज कौन पहनता है? A C B F C C या F D जानकारी अधूरी है
12)
(i) A, B, C, D, E, F और G सात व्यक्ति हैं। जिन्होंने भिन्न-भिन्न रंगों-सफ़ेद, लाल, काले, हरे, पीले, नीले तथा क्रीम की कमीजें और भिन्न-भिन्न रंगों-नीले, लाल, सफ़ेद, काले, क्रीम, पीले और इंडिगो की पतलूनें पहन रखी हैं। व्यक्ति के कमीजों के रंग तथा पतलूनों के रंग उसी ÿम में होने आवश्यक नहीं है। कोई भी व्यक्ति एक जैसे रंग की कमीज व पतलून नहीं पहने हुए है। (ii) B ने लाल रंग की कमीज पहन रखी है तथा क्रीम या पीले रंग की पतलून नहीं पहन रखी है। D ने हरे रंग की कमीज तथा इंडिगो रंग की पतलून पहन रखी है। A की कमीज तथा F की पतलून का रंग एक जैसा है। E की कमीज तथा C की पतलून का रंग एक जैसा है। G ने नीली कमीज पहन रखी है। E ने काली पतलून पहन रखी है। F ने कोई पीली पोशाक नहीं पहन रखी है। लाल और नीली क्रमशः कमीज व पतलून का संयोजन किसी व्यक्ति का नहीं है। A की पतलून का कौन सा रंग है? A सफ़ेद B क्रीम C नीला D जानकारी अधूरी है
13)
(i) A, B, C, D, E, F और G सात व्यक्ति हैं। जिन्होंने भिन्न-भिन्न रंगों-सफ़ेद, लाल, काले, हरे, पीले, नीले तथा क्रीम की कमीजें और भिन्न-भिन्न रंगों-नीले, लाल, सफ़ेद, काले, क्रीम, पीले और इंडिगो की पतलूनें पहन रखी हैं। व्यक्ति के कमीजों के रंग तथा पतलूनों के रंग उसी ÿम में होने आवश्यक नहीं है। कोई भी व्यक्ति एक जैसे रंग की कमीज व पतलून नहीं पहने हुए है। (ii) B ने लाल रंग की कमीज पहन रखी है तथा क्रीम या पीले रंग की पतलून नहीं पहन रखी है। D ने हरे रंग की कमीज तथा इंडिगो रंग की पतलून पहन रखी है। A की कमीज तथा F की पतलून का रंग एक जैसा है। E की कमीज तथा C की पतलून का रंग एक जैसा है। G ने नीली कमीज पहन रखी है। E ने काली पतलून पहन रखी है। F ने कोई पीली पोशाक नहीं पहन रखी है। लाल और नीली क्रमशः कमीज व पतलून का संयोजन किसी व्यक्ति का नहीं है। B की पतलून का कौन सा रंग है? A लाल B सफ़ेद C इंडिगो D इनमें से कोई नहीं
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(i) A, B, C, D, E, F और G सात व्यक्ति हैं। जिन्होंने भिन्न-भिन्न रंगों-सफ़ेद, लाल, काले, हरे, पीले, नीले तथा क्रीम की कमीजें और भिन्न-भिन्न रंगों-नीले, लाल, सफ़ेद, काले, क्रीम, पीले और इंडिगो की पतलूनें पहन रखी हैं। व्यक्ति के कमीजों के रंग तथा पतलूनों के रंग उसी ÿम में होने आवश्यक नहीं है। कोई भी व्यक्ति एक जैसे रंग की कमीज व पतलून नहीं पहने हुए है। (ii) B ने लाल रंग की कमीज पहन रखी है तथा क्रीम या पीले रंग की पतलून नहीं पहन रखी है। D ने हरे रंग की कमीज तथा इंडिगो रंग की पतलून पहन रखी है। A की कमीज तथा F की पतलून का रंग एक जैसा है। E की कमीज तथा C की पतलून का रंग एक जैसा है। G ने नीली कमीज पहन रखी है। E ने काली पतलून पहन रखी है। F ने कोई पीली पोशाक नहीं पहन रखी है। लाल और नीली क्रमशः कमीज व पतलून का संयोजन किसी व्यक्ति का नहीं है। G की पतलून का रंग कौन सा है? A लाल B क्रीम C सफ़ेद D इंडिगो
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 निम्नलिखित दो परिच्छेदों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।   खाने-पीने की चीजें दिनोंदिन महंगी होती जा रही हैं, यह आम आदमी रोज ही महसूस करता है। पिछले वर्ष भी इन दिनों महंगाई की रफ्रतार काफी तेज थी, यानी इस वर्ष की दर को नापने के लिए जो आधार था, वह भी काफी ऊँचा था इस आधार पर अगर महंगाई इतनी बढ़ती है, तो यह सचमुच आम आदमी की जेब पर काफी भारी है। पिछले वर्ष भी इन दिनों यही उम्मीद लगाई जा रही थी कि मार्च2010 तक महंगाई कम होगी। तब तर्क यह था कि अच्छी बारिश की वजह से फसल अच्छी होगी, तो महंगाई कम होगी। गेहूँ की फसल सचमुच रिकॉर्ड तोड़ थी, लेकिन महंगाई कम नहीं हुई। मौसम और फसल का हाल इस बार भी वैसा ही है, जैसा पिछले साल था। इसलिए महंगाई घटने के आसार भी उससे बेहतर नहीं दिख रहे। रिजर्व बैंक की मुश्किल यह है कि उसके पास महंगाई घटाने के जितने उपाय हैं, वह कर चुका है। पिछले डेढ़ वर्ष में 13 बार ब्याज दरें बढ़ी हैं और इसका कोई असर महंगाई पर नहीं हुआ है। ब्याज दरें बढ़ने से विकास दर अलबत्ता कम हो गई है और रिजर्व बैंक ने भी यह संकेत दिया है कि अब ज्यादा ब्याज दरें नहीं बढ़ेगी, क्योंकि ब्याज दरें बढ़ाने व बाजार से नकदी घटाने की वजह से अगर अर्थव्यवस्था लंबे दौर के लिए धीमी हो गई, जैसे लगभग 15 वर्ष पहले हो गई थी, तो यह एक नई मुश्किल हो जाएगी। कुछ जानकारों का कहना है कि मौद्रिक नीति से महंगाई को थामने की कोशिश बेकार है, क्योंकि यह महंगाई मांग और पूर्ति के असंतुलन की वजह से है और कठोर मौद्रिक नीति से सिर्फ विकास दर ही कम होगी। यही रिजर्व बैंक भी कहता है कि खाने-पीने की चीजों की महंगाई मांग और पूर्ति के असंतुलन की वजह से है, लेकिन जाहिर है कि उसके बस में जो हैं, वे ही उपाय वह कर सकता है। समस्या यह है कि मांग और पूर्ति के बीच अंतर बहुत आसानी से नहीं पाटा जा सकता। इसके लिए उत्पादन बढ़ाने और वितरण सुधारने की जो कोशिशें की जानी हैं, उनका असर भी देर से ही दिखेगा। मुख्यतः दाम दूध, अंडे, मांस बगैर प्रोटीनयुक्त आहारों और सब्जियों व फलों के बढ़े हैं। दालों के दाम एकाध साल पहले बहुत तेजी से बढ़ रहे थे, लेकिन अब वे उतनी तेजी से नहीं बढ़ रहे हैं। दालों की आपूर्ति बढ़ाने की कोशिशों से बाजार में उनके दाम कुछ नियंत्रित हुए हैं, लेकिन जिस तेजी से दूध, अंडे, मांस वगैरह की खपत बढ़ी है, उसके मुकाबले उनका उत्पादन नहीं बढ़ा है। गरीबी बढ़ने की बहस को दरकिनार कर दें, तो यह मानना पड़ेगा कि देश में कुछ तबकों का जीवन-स्तर पिछले वर्षों में ऊपर उठा है और उसके आहार में प्रोटीनयुक्त चीजों खासकर दूध और दूध से बनी चीजों की खपत ज्यादा हुई है। इसीलिए दूध के सबसे बड़े उत्पादक होते हुए भी भारत में इनकी जरूरत और आपूर्ति के बीच बड़ा फर्क हो गया है। यह महंगाई इसी की वजह से है और इसीलिए रिजर्व बैंक के बस में इसे नियंत्रित करना नहीं है। रबी की फसल आने से इस महंगाई पर कुछ असर होगा, ऐसा नहीं लगता। यानी महंगाई इतनी आसानी से पीछा नहीं छोडे़गी। उपरोक्त लेखांश का मनन कर निम्न में से सही शीर्षक का चयन करे: A उत्पादन और वितरण B मांग और पूर्ति C मौद्रिक नीति और महंगाई D रिजर्व बैंक और महंगाई
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 निम्नलिखित दो परिच्छेदों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।   खाने-पीने की चीजें दिनोंदिन महंगी होती जा रही हैं, यह आम आदमी रोज ही महसूस करता है। पिछले वर्ष भी इन दिनों महंगाई की रफ्रतार काफी तेज थी, यानी इस वर्ष की दर को नापने के लिए जो आधार था, वह भी काफी ऊँचा था इस आधार पर अगर महंगाई इतनी बढ़ती है, तो यह सचमुच आम आदमी की जेब पर काफी भारी है। पिछले वर्ष भी इन दिनों यही उम्मीद लगाई जा रही थी कि मार्च2010 तक महंगाई कम होगी। तब तर्क यह था कि अच्छी बारिश की वजह से फसल अच्छी होगी, तो महंगाई कम होगी। गेहूँ की फसल सचमुच रिकॉर्ड तोड़ थी, लेकिन महंगाई कम नहीं हुई। मौसम और फसल का हाल इस बार भी वैसा ही है, जैसा पिछले साल था। इसलिए महंगाई घटने के आसार भी उससे बेहतर नहीं दिख रहे। रिजर्व बैंक की मुश्किल यह है कि उसके पास महंगाई घटाने के जितने उपाय हैं, वह कर चुका है। पिछले डेढ़ वर्ष में 13 बार ब्याज दरें बढ़ी हैं और इसका कोई असर महंगाई पर नहीं हुआ है। ब्याज दरें बढ़ने से विकास दर अलबत्ता कम हो गई है और रिजर्व बैंक ने भी यह संकेत दिया है कि अब ज्यादा ब्याज दरें नहीं बढ़ेगी, क्योंकि ब्याज दरें बढ़ाने व बाजार से नकदी घटाने की वजह से अगर अर्थव्यवस्था लंबे दौर के लिए धीमी हो गई, जैसे लगभग 15 वर्ष पहले हो गई थी, तो यह एक नई मुश्किल हो जाएगी। कुछ जानकारों का कहना है कि मौद्रिक नीति से महंगाई को थामने की कोशिश बेकार है, क्योंकि यह महंगाई मांग और पूर्ति के असंतुलन की वजह से है और कठोर मौद्रिक नीति से सिर्फ विकास दर ही कम होगी। यही रिजर्व बैंक भी कहता है कि खाने-पीने की चीजों की महंगाई मांग और पूर्ति के असंतुलन की वजह से है, लेकिन जाहिर है कि उसके बस में जो हैं, वे ही उपाय वह कर सकता है। समस्या यह है कि मांग और पूर्ति के बीच अंतर बहुत आसानी से नहीं पाटा जा सकता। इसके लिए उत्पादन बढ़ाने और वितरण सुधारने की जो कोशिशें की जानी हैं, उनका असर भी देर से ही दिखेगा। मुख्यतः दाम दूध, अंडे, मांस बगैर प्रोटीनयुक्त आहारों और सब्जियों व फलों के बढ़े हैं। दालों के दाम एकाध साल पहले बहुत तेजी से बढ़ रहे थे, लेकिन अब वे उतनी तेजी से नहीं बढ़ रहे हैं। दालों की आपूर्ति बढ़ाने की कोशिशों से बाजार में उनके दाम कुछ नियंत्रित हुए हैं, लेकिन जिस तेजी से दूध, अंडे, मांस वगैरह की खपत बढ़ी है, उसके मुकाबले उनका उत्पादन नहीं बढ़ा है। गरीबी बढ़ने की बहस को दरकिनार कर दें, तो यह मानना पड़ेगा कि देश में कुछ तबकों का जीवन-स्तर पिछले वर्षों में ऊपर उठा है और उसके आहार में प्रोटीनयुक्त चीजों खासकर दूध और दूध से बनी चीजों की खपत ज्यादा हुई है। इसीलिए दूध के सबसे बड़े उत्पादक होते हुए भी भारत में इनकी जरूरत और आपूर्ति के बीच बड़ा फर्क हो गया है। यह महंगाई इसी की वजह से है और इसीलिए रिजर्व बैंक के बस में इसे नियंत्रित करना नहीं है। रबी की फसल आने से इस महंगाई पर कुछ असर होगा, ऐसा नहीं लगता। यानी महंगाई इतनी आसानी से पीछा नहीं छोडे़गी। प्रस्तुत लेखांश में देश की किस समस्या की ओर ध्यान आकृष्ट कराया गया है? A बेरोजगारी और महंगाई B उत्पादन बढाने और वितरण सुधारने C महंगाई मांग और पूर्ति के बीच असंतुलन की वजह से है D रिजर्व बैंक की असफल मौद्रिक नीति
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 निम्नलिखित दो परिच्छेदों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।   खाने-पीने की चीजें दिनोंदिन महंगी होती जा रही हैं, यह आम आदमी रोज ही महसूस करता है। पिछले वर्ष भी इन दिनों महंगाई की रफ्रतार काफी तेज थी, यानी इस वर्ष की दर को नापने के लिए जो आधार था, वह भी काफी ऊँचा था इस आधार पर अगर महंगाई इतनी बढ़ती है, तो यह सचमुच आम आदमी की जेब पर काफी भारी है। पिछले वर्ष भी इन दिनों यही उम्मीद लगाई जा रही थी कि मार्च2010 तक महंगाई कम होगी। तब तर्क यह था कि अच्छी बारिश की वजह से फसल अच्छी होगी, तो महंगाई कम होगी। गेहूँ की फसल सचमुच रिकॉर्ड तोड़ थी, लेकिन महंगाई कम नहीं हुई। मौसम और फसल का हाल इस बार भी वैसा ही है, जैसा पिछले साल था। इसलिए महंगाई घटने के आसार भी उससे बेहतर नहीं दिख रहे। रिजर्व बैंक की मुश्किल यह है कि उसके पास महंगाई घटाने के जितने उपाय हैं, वह कर चुका है। पिछले डेढ़ वर्ष में 13 बार ब्याज दरें बढ़ी हैं और इसका कोई असर महंगाई पर नहीं हुआ है। ब्याज दरें बढ़ने से विकास दर अलबत्ता कम हो गई है और रिजर्व बैंक ने भी यह संकेत दिया है कि अब ज्यादा ब्याज दरें नहीं बढ़ेगी, क्योंकि ब्याज दरें बढ़ाने व बाजार से नकदी घटाने की वजह से अगर अर्थव्यवस्था लंबे दौर के लिए धीमी हो गई, जैसे लगभग 15 वर्ष पहले हो गई थी, तो यह एक नई मुश्किल हो जाएगी। कुछ जानकारों का कहना है कि मौद्रिक नीति से महंगाई को थामने की कोशिश बेकार है, क्योंकि यह महंगाई मांग और पूर्ति के असंतुलन की वजह से है और कठोर मौद्रिक नीति से सिर्फ विकास दर ही कम होगी। यही रिजर्व बैंक भी कहता है कि खाने-पीने की चीजों की महंगाई मांग और पूर्ति के असंतुलन की वजह से है, लेकिन जाहिर है कि उसके बस में जो हैं, वे ही उपाय वह कर सकता है। समस्या यह है कि मांग और पूर्ति के बीच अंतर बहुत आसानी से नहीं पाटा जा सकता। इसके लिए उत्पादन बढ़ाने और वितरण सुधारने की जो कोशिशें की जानी हैं, उनका असर भी देर से ही दिखेगा। मुख्यतः दाम दूध, अंडे, मांस बगैर प्रोटीनयुक्त आहारों और सब्जियों व फलों के बढ़े हैं। दालों के दाम एकाध साल पहले बहुत तेजी से बढ़ रहे थे, लेकिन अब वे उतनी तेजी से नहीं बढ़ रहे हैं। दालों की आपूर्ति बढ़ाने की कोशिशों से बाजार में उनके दाम कुछ नियंत्रित हुए हैं, लेकिन जिस तेजी से दूध, अंडे, मांस वगैरह की खपत बढ़ी है, उसके मुकाबले उनका उत्पादन नहीं बढ़ा है। गरीबी बढ़ने की बहस को दरकिनार कर दें, तो यह मानना पड़ेगा कि देश में कुछ तबकों का जीवन-स्तर पिछले वर्षों में ऊपर उठा है और उसके आहार में प्रोटीनयुक्त चीजों खासकर दूध और दूध से बनी चीजों की खपत ज्यादा हुई है। इसीलिए दूध के सबसे बड़े उत्पादक होते हुए भी भारत में इनकी जरूरत और आपूर्ति के बीच बड़ा फर्क हो गया है। यह महंगाई इसी की वजह से है और इसीलिए रिजर्व बैंक के बस में इसे नियंत्रित करना नहीं है। रबी की फसल आने से इस महंगाई पर कुछ असर होगा, ऐसा नहीं लगता। यानी महंगाई इतनी आसानी से पीछा नहीं छोडे़गी। विश्व में दूध का सर्वाधिक उत्पादन कहाँ होता है? A न्यूजीलैण्डB भारत C अमेरिकाD डेनमार्क
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 निम्नलिखित दो परिच्छेदों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।   खाने-पीने की चीजें दिनोंदिन महंगी होती जा रही हैं, यह आम आदमी रोज ही महसूस करता है। पिछले वर्ष भी इन दिनों महंगाई की रफ्रतार काफी तेज थी, यानी इस वर्ष की दर को नापने के लिए जो आधार था, वह भी काफी ऊँचा था इस आधार पर अगर महंगाई इतनी बढ़ती है, तो यह सचमुच आम आदमी की जेब पर काफी भारी है। पिछले वर्ष भी इन दिनों यही उम्मीद लगाई जा रही थी कि मार्च2010 तक महंगाई कम होगी। तब तर्क यह था कि अच्छी बारिश की वजह से फसल अच्छी होगी, तो महंगाई कम होगी। गेहूँ की फसल सचमुच रिकॉर्ड तोड़ थी, लेकिन महंगाई कम नहीं हुई। मौसम और फसल का हाल इस बार भी वैसा ही है, जैसा पिछले साल था। इसलिए महंगाई घटने के आसार भी उससे बेहतर नहीं दिख रहे। रिजर्व बैंक की मुश्किल यह है कि उसके पास महंगाई घटाने के जितने उपाय हैं, वह कर चुका है। पिछले डेढ़ वर्ष में 13 बार ब्याज दरें बढ़ी हैं और इसका कोई असर महंगाई पर नहीं हुआ है। ब्याज दरें बढ़ने से विकास दर अलबत्ता कम हो गई है और रिजर्व बैंक ने भी यह संकेत दिया है कि अब ज्यादा ब्याज दरें नहीं बढ़ेगी, क्योंकि ब्याज दरें बढ़ाने व बाजार से नकदी घटाने की वजह से अगर अर्थव्यवस्था लंबे दौर के लिए धीमी हो गई, जैसे लगभग 15 वर्ष पहले हो गई थी, तो यह एक नई मुश्किल हो जाएगी। कुछ जानकारों का कहना है कि मौद्रिक नीति से महंगाई को थामने की कोशिश बेकार है, क्योंकि यह महंगाई मांग और पूर्ति के असंतुलन की वजह से है और कठोर मौद्रिक नीति से सिर्फ विकास दर ही कम होगी। यही रिजर्व बैंक भी कहता है कि खाने-पीने की चीजों की महंगाई मांग और पूर्ति के असंतुलन की वजह से है, लेकिन जाहिर है कि उसके बस में जो हैं, वे ही उपाय वह कर सकता है। समस्या यह है कि मांग और पूर्ति के बीच अंतर बहुत आसानी से नहीं पाटा जा सकता। इसके लिए उत्पादन बढ़ाने और वितरण सुधारने की जो कोशिशें की जानी हैं, उनका असर भी देर से ही दिखेगा। मुख्यतः दाम दूध, अंडे, मांस बगैर प्रोटीनयुक्त आहारों और सब्जियों व फलों के बढ़े हैं। दालों के दाम एकाध साल पहले बहुत तेजी से बढ़ रहे थे, लेकिन अब वे उतनी तेजी से नहीं बढ़ रहे हैं। दालों की आपूर्ति बढ़ाने की कोशिशों से बाजार में उनके दाम कुछ नियंत्रित हुए हैं, लेकिन जिस तेजी से दूध, अंडे, मांस वगैरह की खपत बढ़ी है, उसके मुकाबले उनका उत्पादन नहीं बढ़ा है। गरीबी बढ़ने की बहस को दरकिनार कर दें, तो यह मानना पड़ेगा कि देश में कुछ तबकों का जीवन-स्तर पिछले वर्षों में ऊपर उठा है और उसके आहार में प्रोटीनयुक्त चीजों खासकर दूध और दूध से बनी चीजों की खपत ज्यादा हुई है। इसीलिए दूध के सबसे बड़े उत्पादक होते हुए भी भारत में इनकी जरूरत और आपूर्ति के बीच बड़ा फर्क हो गया है। यह महंगाई इसी की वजह से है और इसीलिए रिजर्व बैंक के बस में इसे नियंत्रित करना नहीं है। रबी की फसल आने से इस महंगाई पर कुछ असर होगा, ऐसा नहीं लगता। यानी महंगाई इतनी आसानी से पीछा नहीं छोडे़गी। देश में कुछ तबको के आहार में किसकी मात्र बढ़ गई है? A प्रोटीनB अनाज C खनिज लवणD विटामिन
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सूचना का अधिकार कानून लागू हुआ तो प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता आने और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की उम्मीद जगी थी। मगर सूचनाएँ उपलब्ध कराने में आनकानी और इसके लिए आवेदन करने वालों को डराने-धमकाने की घटनाओं, यहां तक कि उन पर होने वाले जानलेवा हमलों से यही जाहिर होता है कि इस कानून का रास्ता आसान नहीं है। भोपाल में एक सूचनाधिकार कार्यकर्ताओं के दल के एक सदस्य को दिन-दहाड़े गोली मार कर की गई हत्या इसका ताजा उदाहरण है। हालांकि पुलिस अभी तक इस घटना की असली वजह नहीं पता कर पाई है, शायद सीबीआई की जांच तह तक पहुँच सके। मगर मारी गई कार्यकर्ता की सक्रियता से जिस तरह कई वरिष्ठ अधिकारियों के लिए मुश्किलें पैदा हो गई थी उससे स्वाभाविक ही शक की सुई उनकी तरफ घूम जाती है। शेहला मसूद नाम की इस सामाजिक कार्यकर्ता ने बाघों के शिकार और विभिन्न विभागों में अनियमितताओं से जुड़े मामलों में सूचनाधिकार कानून के तहत उंगली उठाई थी। इसी तरह गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार आदि राज्यों में कई सूचनाधिकार कार्यकर्ता अपनी जान गंवा चुके हैं। दरअसल, हमारा प्रशासन तंत्र अभी अपने पुराने तौर-तरीके से बाहर निकलने को तैयार नहीं है। सरकार कामकाज में पारदर्शिता लाने के जो भी तरीके निकाले, जब तक प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी इसमें सहयोग नहीं करेंगे, इस दिशा में कामयाबी मिल पाना कठिन बना रहेगा। हकीकत यह है कि सरकारी विभागों के सूचनाधिकार प्रकोष्ठ में तैनात कर्मचारी संवेदनशील मसलों पर सूचनाएँ उपलब्ध कराने में टालमटोल करते देखे जाते हैं। ये अपने ही विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी की अनियमितताओं को उजागर नहीं करना चाहते। अगर आवेदन करने वाले कानून का सहारा लेकर उन पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं तो उन्हें डराया-धमकाया जाता है, जो हिम्मत नहीं हारते उन पर जानलेवा हमले किए जाते हैं। भोपाल में जिस तरह शेहला मसूद की हत्या की गई उससे साफ है कि इसके लिए किसी पेशेवर हत्यारे की मदद ली गई थी। हालांकि कुछ मामलों में सूचनाधिकार कानून के इस्तेमाल में अधिकारियों-कर्मचारियों को परेशान करने की नीयत भी हो सकती है, मगर इससे अनियमितताएँ उजागर करने वालों की मंशा पर शक नहीं जताया जा सकता। इस कानून का दुरूपयोग करने वालों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधान है, इसलिए अधिकारी और कर्मचारी कार्यकर्ताओं की नीयत पर शक की आड़ लेकर बचने का रास्ता नहीं निकाल सकते। सूचना का अधिकार के प्रभावी न होने के प्रमुख कारण हैं - A प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों का असहयोग B प्रशासनिक अधिकारियों की अनुपस्थिति C प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार D उपरोक्त सभी
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सूचना का अधिकार कानून लागू हुआ तो प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता आने और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की उम्मीद जगी थी। मगर सूचनाएँ उपलब्ध कराने में आनकानी और इसके लिए आवेदन करने वालों को डराने-धमकाने की घटनाओं, यहां तक कि उन पर होने वाले जानलेवा हमलों से यही जाहिर होता है कि इस कानून का रास्ता आसान नहीं है। भोपाल में एक सूचनाधिकार कार्यकर्ताओं के दल के एक सदस्य को दिन-दहाड़े गोली मार कर की गई हत्या इसका ताजा उदाहरण है। हालांकि पुलिस अभी तक इस घटना की असली वजह नहीं पता कर पाई है, शायद सीबीआई की जांच तह तक पहुँच सके। मगर मारी गई कार्यकर्ता की सक्रियता से जिस तरह कई वरिष्ठ अधिकारियों के लिए मुश्किलें पैदा हो गई थी उससे स्वाभाविक ही शक की सुई उनकी तरफ घूम जाती है। शेहला मसूद नाम की इस सामाजिक कार्यकर्ता ने बाघों के शिकार और विभिन्न विभागों में अनियमितताओं से जुड़े मामलों में सूचनाधिकार कानून के तहत उंगली उठाई थी। इसी तरह गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार आदि राज्यों में कई सूचनाधिकार कार्यकर्ता अपनी जान गंवा चुके हैं। दरअसल, हमारा प्रशासन तंत्र अभी अपने पुराने तौर-तरीके से बाहर निकलने को तैयार नहीं है। सरकार कामकाज में पारदर्शिता लाने के जो भी तरीके निकाले, जब तक प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी इसमें सहयोग नहीं करेंगे, इस दिशा में कामयाबी मिल पाना कठिन बना रहेगा। हकीकत यह है कि सरकारी विभागों के सूचनाधिकार प्रकोष्ठ में तैनात कर्मचारी संवेदनशील मसलों पर सूचनाएँ उपलब्ध कराने में टालमटोल करते देखे जाते हैं। ये अपने ही विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी की अनियमितताओं को उजागर नहीं करना चाहते। अगर आवेदन करने वाले कानून का सहारा लेकर उन पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं तो उन्हें डराया-धमकाया जाता है, जो हिम्मत नहीं हारते उन पर जानलेवा हमले किए जाते हैं। भोपाल में जिस तरह शेहला मसूद की हत्या की गई उससे साफ है कि इसके लिए किसी पेशेवर हत्यारे की मदद ली गई थी। हालांकि कुछ मामलों में सूचनाधिकार कानून के इस्तेमाल में अधिकारियों-कर्मचारियों को परेशान करने की नीयत भी हो सकती है, मगर इससे अनियमितताएँ उजागर करने वालों की मंशा पर शक नहीं जताया जा सकता। इस कानून का दुरूपयोग करने वालों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधान है, इसलिए अधिकारी और कर्मचारी कार्यकर्ताओं की नीयत पर शक की आड़ लेकर बचने का रास्ता नहीं निकाल सकते। प्रस्तुत लेखांश में किस क्षेत्र में सूचना के अधिकार को लेकर मसूद नामक कार्यकर्ता ने सूचना मांगी थी? A वन की कटाई B सरकारी कार्यालयों में अनियमितता C सूचना प्रौद्योगिकी D बाघों के शिकार पर
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सूचना का अधिकार कानून लागू हुआ तो प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता आने और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की उम्मीद जगी थी। मगर सूचनाएँ उपलब्ध कराने में आनकानी और इसके लिए आवेदन करने वालों को डराने-धमकाने की घटनाओं, यहां तक कि उन पर होने वाले जानलेवा हमलों से यही जाहिर होता है कि इस कानून का रास्ता आसान नहीं है। भोपाल में एक सूचनाधिकार कार्यकर्ताओं के दल के एक सदस्य को दिन-दहाड़े गोली मार कर की गई हत्या इसका ताजा उदाहरण है। हालांकि पुलिस अभी तक इस घटना की असली वजह नहीं पता कर पाई है, शायद सीबीआई की जांच तह तक पहुँच सके। मगर मारी गई कार्यकर्ता की सक्रियता से जिस तरह कई वरिष्ठ अधिकारियों के लिए मुश्किलें पैदा हो गई थी उससे स्वाभाविक ही शक की सुई उनकी तरफ घूम जाती है। शेहला मसूद नाम की इस सामाजिक कार्यकर्ता ने बाघों के शिकार और विभिन्न विभागों में अनियमितताओं से जुड़े मामलों में सूचनाधिकार कानून के तहत उंगली उठाई थी। इसी तरह गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार आदि राज्यों में कई सूचनाधिकार कार्यकर्ता अपनी जान गंवा चुके हैं। दरअसल, हमारा प्रशासन तंत्र अभी अपने पुराने तौर-तरीके से बाहर निकलने को तैयार नहीं है। सरकार कामकाज में पारदर्शिता लाने के जो भी तरीके निकाले, जब तक प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी इसमें सहयोग नहीं करेंगे, इस दिशा में कामयाबी मिल पाना कठिन बना रहेगा। हकीकत यह है कि सरकारी विभागों के सूचनाधिकार प्रकोष्ठ में तैनात कर्मचारी संवेदनशील मसलों पर सूचनाएँ उपलब्ध कराने में टालमटोल करते देखे जाते हैं। ये अपने ही विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी की अनियमितताओं को उजागर नहीं करना चाहते। अगर आवेदन करने वाले कानून का सहारा लेकर उन पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं तो उन्हें डराया-धमकाया जाता है, जो हिम्मत नहीं हारते उन पर जानलेवा हमले किए जाते हैं। भोपाल में जिस तरह शेहला मसूद की हत्या की गई उससे साफ है कि इसके लिए किसी पेशेवर हत्यारे की मदद ली गई थी। हालांकि कुछ मामलों में सूचनाधिकार कानून के इस्तेमाल में अधिकारियों-कर्मचारियों को परेशान करने की नीयत भी हो सकती है, मगर इससे अनियमितताएँ उजागर करने वालों की मंशा पर शक नहीं जताया जा सकता। इस कानून का दुरूपयोग करने वालों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधान है, इसलिए अधिकारी और कर्मचारी कार्यकर्ताओं की नीयत पर शक की आड़ लेकर बचने का रास्ता नहीं निकाल सकते। प्रस्तुत लेखांश का शीर्षक क्या हो सकता है? A भ्रष्टाचारB प्रशासन की कमियाँ C सूचना का अधिकारD इनमें से कोई नहीं
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सूचना का अधिकार कानून लागू हुआ तो प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता आने और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की उम्मीद जगी थी। मगर सूचनाएँ उपलब्ध कराने में आनकानी और इसके लिए आवेदन करने वालों को डराने-धमकाने की घटनाओं, यहां तक कि उन पर होने वाले जानलेवा हमलों से यही जाहिर होता है कि इस कानून का रास्ता आसान नहीं है। भोपाल में एक सूचनाधिकार कार्यकर्ताओं के दल के एक सदस्य को दिन-दहाड़े गोली मार कर की गई हत्या इसका ताजा उदाहरण है। हालांकि पुलिस अभी तक इस घटना की असली वजह नहीं पता कर पाई है, शायद सीबीआई की जांच तह तक पहुँच सके। मगर मारी गई कार्यकर्ता की सक्रियता से जिस तरह कई वरिष्ठ अधिकारियों के लिए मुश्किलें पैदा हो गई थी उससे स्वाभाविक ही शक की सुई उनकी तरफ घूम जाती है। शेहला मसूद नाम की इस सामाजिक कार्यकर्ता ने बाघों के शिकार और विभिन्न विभागों में अनियमितताओं से जुड़े मामलों में सूचनाधिकार कानून के तहत उंगली उठाई थी। इसी तरह गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार आदि राज्यों में कई सूचनाधिकार कार्यकर्ता अपनी जान गंवा चुके हैं। दरअसल, हमारा प्रशासन तंत्र अभी अपने पुराने तौर-तरीके से बाहर निकलने को तैयार नहीं है। सरकार कामकाज में पारदर्शिता लाने के जो भी तरीके निकाले, जब तक प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी इसमें सहयोग नहीं करेंगे, इस दिशा में कामयाबी मिल पाना कठिन बना रहेगा। हकीकत यह है कि सरकारी विभागों के सूचनाधिकार प्रकोष्ठ में तैनात कर्मचारी संवेदनशील मसलों पर सूचनाएँ उपलब्ध कराने में टालमटोल करते देखे जाते हैं। ये अपने ही विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी की अनियमितताओं को उजागर नहीं करना चाहते। अगर आवेदन करने वाले कानून का सहारा लेकर उन पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं तो उन्हें डराया-धमकाया जाता है, जो हिम्मत नहीं हारते उन पर जानलेवा हमले किए जाते हैं। भोपाल में जिस तरह शेहला मसूद की हत्या की गई उससे साफ है कि इसके लिए किसी पेशेवर हत्यारे की मदद ली गई थी। हालांकि कुछ मामलों में सूचनाधिकार कानून के इस्तेमाल में अधिकारियों-कर्मचारियों को परेशान करने की नीयत भी हो सकती है, मगर इससे अनियमितताएँ उजागर करने वालों की मंशा पर शक नहीं जताया जा सकता। इस कानून का दुरूपयोग करने वालों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधान है, इसलिए अधिकारी और कर्मचारी कार्यकर्ताओं की नीयत पर शक की आड़ लेकर बचने का रास्ता नहीं निकाल सकते। ‘शेहला मसूद’ थी एक - A राजनीतिक कार्यकर्ताB धार्मिक नेता C सामाजिक कार्यकर्ताD एक प्राथमिक शिक्षक नीचे दिए गए प्रत्येक प्रश्न में एक आकृति दी गई है। इस आकृति के नीचे चार वैकल्पिक आकृतिया दी गई है, प्रत्येक में दी गई आकृति के प्रतिरूप में से एक स्थान रिक्त है जो वैकल्पिक आकृतियों में से किसी एक में है। वह वैकल्पिक आकृति कौन सी है?
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निम्नलिखित दो परिच्छेदों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।   नए विचार न केवल ज्ञान की सीमाओ को विस्तार देने अथवा अन्वेषण तथा आविष्कार के लिए आवश्यक होते है, बल्कि वे वस्तुओं और प्रक्रियाओ में सुधार लाने, व्यवसाय को बढ़ाने, कार्य कुशलता में वृद्धि, कीमतों को कम करने, सामान को हल्का, छोटा और सस्ता बनाने, समस्याओं को हल करने, अवरोधो को समाप्त करने, रेागो का उपचार ढूँढने, भुटटे की बाली के स्थान पर दो बालियाँ उगाने, या संक्षेप में कहे कि सभी के जीवन को सरल तथा खुशहाल बनाने के लिए आवश्यक होते हैं। नए विचारों की खोज के लिए पहला कदम है, हाथ में ली गई समस्या के समाधान के लिए दिल और जान लगा देना। रूचि वह पेट्रोल होती है, जो मस्तिष्क रूपी इंजन को शक्ति देती है। इस प्रेरक ईंधन के बिना शरीर और मस्तिष्क की शक्तियाँ अधिकतर निष्क्रिय और अविकसित रहेंगी। रूचि, मस्तिष्क के तीन सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्यों का आधार है। ये कार्य हैं एकाग्रता, स्मरण शक्ति तथा कल्पना अथवा मौलिकता। भावात्मक प्रेरणा के रूप में रूचि किसी कार्य को करने के लिए आवश्यक ऊर्जा संचारित करती है तथा कठिनाइयों और विफलताओं के बावजूद उस कार्य में रूचि बनाए रखती है। एक औसत मनुष्य के मस्तिष्क में विचार अस्त-व्यस्त तथा उलझी हुई अवस्था में होते हैं। मनुष्य के जीवन में प्रधानता रखने वाली शक्तिशाली रूचि उसके मस्ष्तिक का ध्रुवीकरण करके उसकी सुषुप्त शक्तियों को जागृत कर सकती है। इस तरह से मस्तिष्क मनुष्य के कार्यों को चुबंक की तरह प्रभावित करता है और अपनी स्मृति तथा अनुभवों के खजाने में से चुने गए विषय से संबंधित हर प्रकार की सामग्री लगातार प्राप्त करता रहता है। किसी समस्या की स्पष्ट तस्वीर प्राप्त करने के पश्चात मनुष्य उसका समाधान चाहता है। वह पुस्तकों, पत्रिकाओ और आपसी विचार-विमर्श के माध्यम से विषय से संबंधित जितनी अधिक जानकारी प्राप्त कर सकता है, प्राप्त करता है। वह अपनी समस्या से संबंधित हर प्रकार के तथ्य और आँकड़ें जुटाता है और इन सबके पश्चात अपनी समस्या पर विचार करता है_ मनन करता है। तथ्य उसके मस्तिष्क रूपी कारखाने के लिए कच्चे माल का काम करते हैं। नए विचार शून्य से जन्म नही लेते, बल्कि उन तथ्यों से उपजते हैं, जिनको विभिन्न क्रम परिवर्तनों और समुच्चयों में ढालकर पूरी तरह आत्मसात् करने के बाद जाँचा परखा गया हो। नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक इवान पैवलाव के शब्दो में ‘‘पक्षियों के पंख अपने आप में परिपूर्ण होते हैं, पंरतु वायु का सहारा लिए बिना ये पक्षी को नहीं उडा सकते। वैज्ञानिक के लिए तथ्य वायु के समान होते हैं। उनके बिना आप कभी भी उड़ नहीं सकते।’’ इवान पैवलॉव ने एक वैज्ञानिक को सुझाव दिया, ‘‘तथ्य वायु की तरह हैं और उनके बिना आप कभी भी उड़ नहीं सकते’’ इससे क्या निष्कर्ष निकलता है? A वैज्ञानिकों को अपने आस-आस के वातावरण एवं चीजों का अच्छा पर्यवेक्षक होना चाहिए ताकि वे एकदम नए आविष्कार कर सकें। B वैज्ञानिकों को कठोर नहीं होना चाहिए और उन्हें एक ही तरीके से भी नहीं सोचना चाहिए। C अपने ज्ञान के विस्तार को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिकों को जिस समस्या का समाधान निकालना है, उन्हें उसका गहन अध्ययन करना चाहिए। D उपरोक्त सभी
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निम्नलिखित दो परिच्छेदों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।   नए विचार न केवल ज्ञान की सीमाओ को विस्तार देने अथवा अन्वेषण तथा आविष्कार के लिए आवश्यक होते है, बल्कि वे वस्तुओं और प्रक्रियाओ में सुधार लाने, व्यवसाय को बढ़ाने, कार्य कुशलता में वृद्धि, कीमतों को कम करने, सामान को हल्का, छोटा और सस्ता बनाने, समस्याओं को हल करने, अवरोधो को समाप्त करने, रेागो का उपचार ढूँढने, भुटटे की बाली के स्थान पर दो बालियाँ उगाने, या संक्षेप में कहे कि सभी के जीवन को सरल तथा खुशहाल बनाने के लिए आवश्यक होते हैं। नए विचारों की खोज के लिए पहला कदम है, हाथ में ली गई समस्या के समाधान के लिए दिल और जान लगा देना। रूचि वह पेट्रोल होती है, जो मस्तिष्क रूपी इंजन को शक्ति देती है। इस प्रेरक ईंधन के बिना शरीर और मस्तिष्क की शक्तियाँ अधिकतर निष्क्रिय और अविकसित रहेंगी। रूचि, मस्तिष्क के तीन सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्यों का आधार है। ये कार्य हैं एकाग्रता, स्मरण शक्ति तथा कल्पना अथवा मौलिकता। भावात्मक प्रेरणा के रूप में रूचि किसी कार्य को करने के लिए आवश्यक ऊर्जा संचारित करती है तथा कठिनाइयों और विफलताओं के बावजूद उस कार्य में रूचि बनाए रखती है। एक औसत मनुष्य के मस्तिष्क में विचार अस्त-व्यस्त तथा उलझी हुई अवस्था में होते हैं। मनुष्य के जीवन में प्रधानता रखने वाली शक्तिशाली रूचि उसके मस्ष्तिक का ध्रुवीकरण करके उसकी सुषुप्त शक्तियों को जागृत कर सकती है। इस तरह से मस्तिष्क मनुष्य के कार्यों को चुबंक की तरह प्रभावित करता है और अपनी स्मृति तथा अनुभवों के खजाने में से चुने गए विषय से संबंधित हर प्रकार की सामग्री लगातार प्राप्त करता रहता है। किसी समस्या की स्पष्ट तस्वीर प्राप्त करने के पश्चात मनुष्य उसका समाधान चाहता है। वह पुस्तकों, पत्रिकाओ और आपसी विचार-विमर्श के माध्यम से विषय से संबंधित जितनी अधिक जानकारी प्राप्त कर सकता है, प्राप्त करता है। वह अपनी समस्या से संबंधित हर प्रकार के तथ्य और आँकड़ें जुटाता है और इन सबके पश्चात अपनी समस्या पर विचार करता है_ मनन करता है। तथ्य उसके मस्तिष्क रूपी कारखाने के लिए कच्चे माल का काम करते हैं। नए विचार शून्य से जन्म नही लेते, बल्कि उन तथ्यों से उपजते हैं, जिनको विभिन्न क्रम परिवर्तनों और समुच्चयों में ढालकर पूरी तरह आत्मसात् करने के बाद जाँचा परखा गया हो। नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक इवान पैवलाव के शब्दो में ‘‘पक्षियों के पंख अपने आप में परिपूर्ण होते हैं, पंरतु वायु का सहारा लिए बिना ये पक्षी को नहीं उडा सकते। वैज्ञानिक के लिए तथ्य वायु के समान होते हैं। उनके बिना आप कभी भी उड़ नहीं सकते।’’ निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा से सही है/हैं? (i) एक औसत व्यक्ति के मस्तिष्क में विचार नहीं होते हैं। (ii) नए विचार दुर्ग्राह्य अथवा विदेशी नहीं होते लेकिन हमेशा तात्कालिक परिस्थिति में उपस्थित रहते हैं। (iii) सिर्फ रूचि मात्र ही एक व्यक्ति को नई तकनीक एवं आविष्कारों के बारे में सोचने के योग्य बना सकती है। कूट- A केवल (i) और (iii)B केवल (i) C केवल (iii)D (i), (ii) और (iii)
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निम्नलिखित दो परिच्छेदों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।   नए विचार न केवल ज्ञान की सीमाओ को विस्तार देने अथवा अन्वेषण तथा आविष्कार के लिए आवश्यक होते है, बल्कि वे वस्तुओं और प्रक्रियाओ में सुधार लाने, व्यवसाय को बढ़ाने, कार्य कुशलता में वृद्धि, कीमतों को कम करने, सामान को हल्का, छोटा और सस्ता बनाने, समस्याओं को हल करने, अवरोधो को समाप्त करने, रेागो का उपचार ढूँढने, भुटटे की बाली के स्थान पर दो बालियाँ उगाने, या संक्षेप में कहे कि सभी के जीवन को सरल तथा खुशहाल बनाने के लिए आवश्यक होते हैं। नए विचारों की खोज के लिए पहला कदम है, हाथ में ली गई समस्या के समाधान के लिए दिल और जान लगा देना। रूचि वह पेट्रोल होती है, जो मस्तिष्क रूपी इंजन को शक्ति देती है। इस प्रेरक ईंधन के बिना शरीर और मस्तिष्क की शक्तियाँ अधिकतर निष्क्रिय और अविकसित रहेंगी। रूचि, मस्तिष्क के तीन सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्यों का आधार है। ये कार्य हैं एकाग्रता, स्मरण शक्ति तथा कल्पना अथवा मौलिकता। भावात्मक प्रेरणा के रूप में रूचि किसी कार्य को करने के लिए आवश्यक ऊर्जा संचारित करती है तथा कठिनाइयों और विफलताओं के बावजूद उस कार्य में रूचि बनाए रखती है। एक औसत मनुष्य के मस्तिष्क में विचार अस्त-व्यस्त तथा उलझी हुई अवस्था में होते हैं। मनुष्य के जीवन में प्रधानता रखने वाली शक्तिशाली रूचि उसके मस्ष्तिक का ध्रुवीकरण करके उसकी सुषुप्त शक्तियों को जागृत कर सकती है। इस तरह से मस्तिष्क मनुष्य के कार्यों को चुबंक की तरह प्रभावित करता है और अपनी स्मृति तथा अनुभवों के खजाने में से चुने गए विषय से संबंधित हर प्रकार की सामग्री लगातार प्राप्त करता रहता है। किसी समस्या की स्पष्ट तस्वीर प्राप्त करने के पश्चात मनुष्य उसका समाधान चाहता है। वह पुस्तकों, पत्रिकाओ और आपसी विचार-विमर्श के माध्यम से विषय से संबंधित जितनी अधिक जानकारी प्राप्त कर सकता है, प्राप्त करता है। वह अपनी समस्या से संबंधित हर प्रकार के तथ्य और आँकड़ें जुटाता है और इन सबके पश्चात अपनी समस्या पर विचार करता है_ मनन करता है। तथ्य उसके मस्तिष्क रूपी कारखाने के लिए कच्चे माल का काम करते हैं। नए विचार शून्य से जन्म नही लेते, बल्कि उन तथ्यों से उपजते हैं, जिनको विभिन्न क्रम परिवर्तनों और समुच्चयों में ढालकर पूरी तरह आत्मसात् करने के बाद जाँचा परखा गया हो। नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक इवान पैवलाव के शब्दो में ‘‘पक्षियों के पंख अपने आप में परिपूर्ण होते हैं, पंरतु वायु का सहारा लिए बिना ये पक्षी को नहीं उडा सकते। वैज्ञानिक के लिए तथ्य वायु के समान होते हैं। उनके बिना आप कभी भी उड़ नहीं सकते।’’ एक मनुष्य का मस्तिष्क नए विचारों को उत्पन्न करने में किस तरह उसकी मदद कर सकता है? A तीन महत्त्वपूर्ण कार्यों के द्वारा, जैसे एकाग्रता, स्मरण शक्ति तथा कल्पना B चूँकि विचार पहले से ही मस्तिष्क में मौजूद होते हैं। अतः जब भी इन विचारों को सही तरह से व्यवस्थित किया जाता है असाधारण प्रकृति के आविष्कार का सृजन होता है। C समस्या से संबंधित सभी तथ्यों एवं आंकड़ों को याद करके। D समस्या का समाधान खोजने के लिए हृदय और जान के साथ लगा देना
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निम्नलिखित दो परिच्छेदों को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।   नए विचार न केवल ज्ञान की सीमाओ को विस्तार देने अथवा अन्वेषण तथा आविष्कार के लिए आवश्यक होते है, बल्कि वे वस्तुओं और प्रक्रियाओ में सुधार लाने, व्यवसाय को बढ़ाने, कार्य कुशलता में वृद्धि, कीमतों को कम करने, सामान को हल्का, छोटा और सस्ता बनाने, समस्याओं को हल करने, अवरोधो को समाप्त करने, रेागो का उपचार ढूँढने, भुटटे की बाली के स्थान पर दो बालियाँ उगाने, या संक्षेप में कहे कि सभी के जीवन को सरल तथा खुशहाल बनाने के लिए आवश्यक होते हैं। नए विचारों की खोज के लिए पहला कदम है, हाथ में ली गई समस्या के समाधान के लिए दिल और जान लगा देना। रूचि वह पेट्रोल होती है, जो मस्तिष्क रूपी इंजन को शक्ति देती है। इस प्रेरक ईंधन के बिना शरीर और मस्तिष्क की शक्तियाँ अधिकतर निष्क्रिय और अविकसित रहेंगी। रूचि, मस्तिष्क के तीन सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्यों का आधार है। ये कार्य हैं एकाग्रता, स्मरण शक्ति तथा कल्पना अथवा मौलिकता। भावात्मक प्रेरणा के रूप में रूचि किसी कार्य को करने के लिए आवश्यक ऊर्जा संचारित करती है तथा कठिनाइयों और विफलताओं के बावजूद उस कार्य में रूचि बनाए रखती है। एक औसत मनुष्य के मस्तिष्क में विचार अस्त-व्यस्त तथा उलझी हुई अवस्था में होते हैं। मनुष्य के जीवन में प्रधानता रखने वाली शक्तिशाली रूचि उसके मस्ष्तिक का ध्रुवीकरण करके उसकी सुषुप्त शक्तियों को जागृत कर सकती है। इस तरह से मस्तिष्क मनुष्य के कार्यों को चुबंक की तरह प्रभावित करता है और अपनी स्मृति तथा अनुभवों के खजाने में से चुने गए विषय से संबंधित हर प्रकार की सामग्री लगातार प्राप्त करता रहता है। किसी समस्या की स्पष्ट तस्वीर प्राप्त करने के पश्चात मनुष्य उसका समाधान चाहता है। वह पुस्तकों, पत्रिकाओ और आपसी विचार-विमर्श के माध्यम से विषय से संबंधित जितनी अधिक जानकारी प्राप्त कर सकता है, प्राप्त करता है। वह अपनी समस्या से संबंधित हर प्रकार के तथ्य और आँकड़ें जुटाता है और इन सबके पश्चात अपनी समस्या पर विचार करता है_ मनन करता है। तथ्य उसके मस्तिष्क रूपी कारखाने के लिए कच्चे माल का काम करते हैं। नए विचार शून्य से जन्म नही लेते, बल्कि उन तथ्यों से उपजते हैं, जिनको विभिन्न क्रम परिवर्तनों और समुच्चयों में ढालकर पूरी तरह आत्मसात् करने के बाद जाँचा परखा गया हो। नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक इवान पैवलाव के शब्दो में ‘‘पक्षियों के पंख अपने आप में परिपूर्ण होते हैं, पंरतु वायु का सहारा लिए बिना ये पक्षी को नहीं उडा सकते। वैज्ञानिक के लिए तथ्य वायु के समान होते हैं। उनके बिना आप कभी भी उड़ नहीं सकते।’’ नवाचारों के सम्बन्ध मे निम्न में कौन सा/से कथन सत्य हैं। (i) ये सभी के जीवन को खुशहाल और सरल बनाने के लिए आवश्यक होते हैं। (ii) ये समस्याओं को हल करने मे सहायक होते हैं। (iii) ये अन्वेषण तथा अविष्कार हेतु आवश्यक होते है। (iv) ये वस्तुओं व प्रक्रियाओं में सुधार तो करते है परन्तु कीमतों में भी वृद्धि करते है। A (i), (ii) और (iii) B (ii), (iii) और (iv) C (i), (iii) और (iv) D (i), (ii) और (iv)
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सारी दुनिया में होने वाली हाल की घटनाओं ने इसे साबित कर दिया है कि यह ख्याल गलत है कि वैश्वीकरण और जनता के आंदोलनों के आगे राष्ट्रीयता खत्म हो रही है। सच यह है कि राष्ट्रीयता की भावना लोगों में अब भी एक जोरदार भावना है और इसके साथ परंपरा, मिल जुलकर रहने और समान मकसद की भावनाएँ जुड़ी हुई है। यद्यपि मध्यम वर्ग के विचारशील लोग रफ्रता-रफ्रता राष्ट्रीयता की भावना से अलग छूट रहे हैं या कम से कम समझते हैं कि हट रहे हैं। मजदूर वर्ग और जनता के आंदोलन, जो जानबूझकर राष्ट्रीयता की नींव पर कायम हुए थे, अब राष्ट्रीयता की तरफ झुकते जा रहे हैं और इस युद्ध की शुरूआत ने तो सब जगह और सभी को राष्ट्रीयता के जाल में ढकेल दिया है। राष्ट्रीयता की इस अचरज भरी उठान ने, या यों कहिए कि एक नई ही शक्ल में उसे देखने और उसकी अहमियत को जान लेने के कारण ने, नए-नए मुद्दे खड़े कर दिए हैं या पुराने मुददों की शक्ल बदल दी है। पुरानी और जमी हुई परंपराएँ आसानी से हटाई या मिटाई नहीं जा सकती, नाजुक वक्तों में वे उठ खड़ी होती है और लोगों के दिमागों पर छा जाती हैं। और अक्सर, जैसा कि हमने देखा है, जानबूझकर इस बात की कोशिश होती है कि उनके जरिये लोगों को काम में लगने के लिए या कुर्बानियों के लिए उकसाया जाए। पुरानी परंपराओ को बहुत हद तक स्वीकार करना पड़ता है और उन्हें नए विचारों और नई परंपराओं को स्थापित करना भी जरूरी है। राष्ट्रीयता का आदर्श एक गहरा और मजबूत आदर्श है और यह बात नहीं कि इसका जमाना बीत चुका हो और आगे के लिए इसका महत्व न रह गया हो_ लेकिन और भी आदर्श, जैसे- वैश्वीकरण और श्रमजीवी वर्ग के आदर्श, जो मौजूदा जमाने की असलियतों की बुनियाद पर ज्यादा कायम है, उठ खड़े हुए हैं और अगर हम दुनिया की कशमकश को बंद कर शांति स्थापित करना चाहते हैं, तो हमें इन भिन्न-भिन्न आदर्शों के बीच एक समझौता कायम करना होगा, आदमी की आत्मा के लिए राष्ट्रीयता का जो आकर्षण है, इसका लिहाज करना पड़ेगा, चाहे उसके दायरे को कुछ सीमित ही करना पड़े। लेखक के अनुसार कौन-सी हालिया घटना इस बात को गलत साबित कर सकती है कि राष्ट्रीयता का अंत हो रहा है? A दुनिया भर में बढ़ती हुई आतंकवादी गतिविधियाँ। B दुनिया भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रें के मध्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आदान-प्रदान में हुई वृद्धि। C श्रमिक वर्ग द्वारा अपने अधिकारों की माँग करना। D अपने लोकतांत्रिक एवं राजनैतिक अधिकारों को बचाने के लिए नागरिकों का संगठित होना।
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सारी दुनिया में होने वाली हाल की घटनाओं ने इसे साबित कर दिया है कि यह ख्याल गलत है कि वैश्वीकरण और जनता के आंदोलनों के आगे राष्ट्रीयता खत्म हो रही है। सच यह है कि राष्ट्रीयता की भावना लोगों में अब भी एक जोरदार भावना है और इसके साथ परंपरा, मिल जुलकर रहने और समान मकसद की भावनाएँ जुड़ी हुई है। यद्यपि मध्यम वर्ग के विचारशील लोग रफ्रता-रफ्रता राष्ट्रीयता की भावना से अलग छूट रहे हैं या कम से कम समझते हैं कि हट रहे हैं। मजदूर वर्ग और जनता के आंदोलन, जो जानबूझकर राष्ट्रीयता की नींव पर कायम हुए थे, अब राष्ट्रीयता की तरफ झुकते जा रहे हैं और इस युद्ध की शुरूआत ने तो सब जगह और सभी को राष्ट्रीयता के जाल में ढकेल दिया है। राष्ट्रीयता की इस अचरज भरी उठान ने, या यों कहिए कि एक नई ही शक्ल में उसे देखने और उसकी अहमियत को जान लेने के कारण ने, नए-नए मुद्दे खड़े कर दिए हैं या पुराने मुददों की शक्ल बदल दी है। पुरानी और जमी हुई परंपराएँ आसानी से हटाई या मिटाई नहीं जा सकती, नाजुक वक्तों में वे उठ खड़ी होती है और लोगों के दिमागों पर छा जाती हैं। और अक्सर, जैसा कि हमने देखा है, जानबूझकर इस बात की कोशिश होती है कि उनके जरिये लोगों को काम में लगने के लिए या कुर्बानियों के लिए उकसाया जाए। पुरानी परंपराओ को बहुत हद तक स्वीकार करना पड़ता है और उन्हें नए विचारों और नई परंपराओं को स्थापित करना भी जरूरी है। राष्ट्रीयता का आदर्श एक गहरा और मजबूत आदर्श है और यह बात नहीं कि इसका जमाना बीत चुका हो और आगे के लिए इसका महत्व न रह गया हो_ लेकिन और भी आदर्श, जैसे- वैश्वीकरण और श्रमजीवी वर्ग के आदर्श, जो मौजूदा जमाने की असलियतों की बुनियाद पर ज्यादा कायम है, उठ खड़े हुए हैं और अगर हम दुनिया की कशमकश को बंद कर शांति स्थापित करना चाहते हैं, तो हमें इन भिन्न-भिन्न आदर्शों के बीच एक समझौता कायम करना होगा, आदमी की आत्मा के लिए राष्ट्रीयता का जो आकर्षण है, इसका लिहाज करना पड़ेगा, चाहे उसके दायरे को कुछ सीमित ही करना पड़े। निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा राष्ट्रीयता के संबंध में सही नहीं है? A राष्ट्रीयता सांस्कृतिक और परंपरा की पृष्ठभूमि को और अधिक मजबूती प्रदान करती है। B वर्तमान समय में राष्ट्रीयता अपने मूल्यों को गवां रही है और दूसरी विचारधाराओं ने इसे प्रतिस्थापित कर दिया है। C राष्ट्रीयता लोगों को एक समान कारण के लिए एक-साथ लाती है। D लोगों में राष्ट्रीयता की भावना को पूर्णतः समाप्त नहीं किया जा सकता
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सारी दुनिया में होने वाली हाल की घटनाओं ने इसे साबित कर दिया है कि यह ख्याल गलत है कि वैश्वीकरण और जनता के आंदोलनों के आगे राष्ट्रीयता खत्म हो रही है। सच यह है कि राष्ट्रीयता की भावना लोगों में अब भी एक जोरदार भावना है और इसके साथ परंपरा, मिल जुलकर रहने और समान मकसद की भावनाएँ जुड़ी हुई है। यद्यपि मध्यम वर्ग के विचारशील लोग रफ्रता-रफ्रता राष्ट्रीयता की भावना से अलग छूट रहे हैं या कम से कम समझते हैं कि हट रहे हैं। मजदूर वर्ग और जनता के आंदोलन, जो जानबूझकर राष्ट्रीयता की नींव पर कायम हुए थे, अब राष्ट्रीयता की तरफ झुकते जा रहे हैं और इस युद्ध की शुरूआत ने तो सब जगह और सभी को राष्ट्रीयता के जाल में ढकेल दिया है। राष्ट्रीयता की इस अचरज भरी उठान ने, या यों कहिए कि एक नई ही शक्ल में उसे देखने और उसकी अहमियत को जान लेने के कारण ने, नए-नए मुद्दे खड़े कर दिए हैं या पुराने मुददों की शक्ल बदल दी है। पुरानी और जमी हुई परंपराएँ आसानी से हटाई या मिटाई नहीं जा सकती, नाजुक वक्तों में वे उठ खड़ी होती है और लोगों के दिमागों पर छा जाती हैं। और अक्सर, जैसा कि हमने देखा है, जानबूझकर इस बात की कोशिश होती है कि उनके जरिये लोगों को काम में लगने के लिए या कुर्बानियों के लिए उकसाया जाए। पुरानी परंपराओ को बहुत हद तक स्वीकार करना पड़ता है और उन्हें नए विचारों और नई परंपराओं को स्थापित करना भी जरूरी है। राष्ट्रीयता का आदर्श एक गहरा और मजबूत आदर्श है और यह बात नहीं कि इसका जमाना बीत चुका हो और आगे के लिए इसका महत्व न रह गया हो_ लेकिन और भी आदर्श, जैसे- वैश्वीकरण और श्रमजीवी वर्ग के आदर्श, जो मौजूदा जमाने की असलियतों की बुनियाद पर ज्यादा कायम है, उठ खड़े हुए हैं और अगर हम दुनिया की कशमकश को बंद कर शांति स्थापित करना चाहते हैं, तो हमें इन भिन्न-भिन्न आदर्शों के बीच एक समझौता कायम करना होगा, आदमी की आत्मा के लिए राष्ट्रीयता का जो आकर्षण है, इसका लिहाज करना पड़ेगा, चाहे उसके दायरे को कुछ सीमित ही करना पड़े। गद्यांश का लेखक संभवतः है A एक राष्ट्रवादीB एक आदर्शवादी C एक पत्रकारD एक राजनीतिक विचारक
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सारी दुनिया में होने वाली हाल की घटनाओं ने इसे साबित कर दिया है कि यह ख्याल गलत है कि वैश्वीकरण और जनता के आंदोलनों के आगे राष्ट्रीयता खत्म हो रही है। सच यह है कि राष्ट्रीयता की भावना लोगों में अब भी एक जोरदार भावना है और इसके साथ परंपरा, मिल जुलकर रहने और समान मकसद की भावनाएँ जुड़ी हुई है। यद्यपि मध्यम वर्ग के विचारशील लोग रफ्रता-रफ्रता राष्ट्रीयता की भावना से अलग छूट रहे हैं या कम से कम समझते हैं कि हट रहे हैं। मजदूर वर्ग और जनता के आंदोलन, जो जानबूझकर राष्ट्रीयता की नींव पर कायम हुए थे, अब राष्ट्रीयता की तरफ झुकते जा रहे हैं और इस युद्ध की शुरूआत ने तो सब जगह और सभी को राष्ट्रीयता के जाल में ढकेल दिया है। राष्ट्रीयता की इस अचरज भरी उठान ने, या यों कहिए कि एक नई ही शक्ल में उसे देखने और उसकी अहमियत को जान लेने के कारण ने, नए-नए मुद्दे खड़े कर दिए हैं या पुराने मुददों की शक्ल बदल दी है। पुरानी और जमी हुई परंपराएँ आसानी से हटाई या मिटाई नहीं जा सकती, नाजुक वक्तों में वे उठ खड़ी होती है और लोगों के दिमागों पर छा जाती हैं। और अक्सर, जैसा कि हमने देखा है, जानबूझकर इस बात की कोशिश होती है कि उनके जरिये लोगों को काम में लगने के लिए या कुर्बानियों के लिए उकसाया जाए। पुरानी परंपराओ को बहुत हद तक स्वीकार करना पड़ता है और उन्हें नए विचारों और नई परंपराओं को स्थापित करना भी जरूरी है। राष्ट्रीयता का आदर्श एक गहरा और मजबूत आदर्श है और यह बात नहीं कि इसका जमाना बीत चुका हो और आगे के लिए इसका महत्व न रह गया हो_ लेकिन और भी आदर्श, जैसे- वैश्वीकरण और श्रमजीवी वर्ग के आदर्श, जो मौजूदा जमाने की असलियतों की बुनियाद पर ज्यादा कायम है, उठ खड़े हुए हैं और अगर हम दुनिया की कशमकश को बंद कर शांति स्थापित करना चाहते हैं, तो हमें इन भिन्न-भिन्न आदर्शों के बीच एक समझौता कायम करना होगा, आदमी की आत्मा के लिए राष्ट्रीयता का जो आकर्षण है, इसका लिहाज करना पड़ेगा, चाहे उसके दायरे को कुछ सीमित ही करना पड़े। निम्न में कौन सा कथन असत्य है? A राष्ट्रीयता की आड़ में कभी-कभी लोगों को त्याग हेतु प्रेरित किया जाता है। B राष्ट्रीयता भविष्य में भी प्रासंगिक रहेगी C वैश्वीकरण ने राष्ट्रीयता को प्रभावित किया है जिसके कारण यह पतन की ओर उन्मुख है। D वैश्वीकरण का राष्ट्रीयता के आदर्शों के साथ समायोजन आवश्यक है।
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Read the following passage carefully and answer the questions that follow: It would be a mistake if the house got into the habit of calling for explanations on varying episodes in this dangerous and widespread war and asked for an account to be given of when any action was lost or any part of the front was beaten in. In the first place no full explanation could possibly be given without revealing valuable information to the enemy. The dictator governments are not under any such pressure to explain or excuse any ill success that may befall on them, unlike these formidable potentates, I am only a servant of the crown and parliament and I am always at the disposal of the house of commons. This house would not wish any servant whom it has entrusted with such duties to be at disadvantage against our antagonists. I have not heard that Hitler had to attend the Reichstage and tell them why he sent the “Bismark”, on the disastrous cruise. Neither have I heard of any convincing statement by Mussolini of the reasons why the greatest part of his African Empire has been conquered and so many of his soldiers are prisoners in our hands. I should feel needless disadvantage if I were obliged to give an account of our operations irrespective of whether the time is suitable or not. It would be better if I am permitted on behalf of government to choose the occasion to make statements about the war. Why is the speaker reluctant to disclose to the house all the facts regarding the progress of the war? A Because no full explanation could possibly be given without revealing valuable information to the enemy B Because it is a dangerous practice C Because the governments would have dictatorial advantages D None of these
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Read the following passage carefully and answer the questions that follow: It would be a mistake if the house got into the habit of calling for explanations on varying episodes in this dangerous and widespread war and asked for an account to be given of when any action was lost or any part of the front was beaten in. In the first place no full explanation could possibly be given without revealing valuable information to the enemy. The dictator governments are not under any such pressure to explain or excuse any ill success that may befall on them, unlike these formidable potentates, I am only a servant of the crown and parliament and I am always at the disposal of the house of commons. This house would not wish any servant whom it has entrusted with such duties to be at disadvantage against our antagonists. I have not heard that Hitler had to attend the Reichstage and tell them why he sent the “Bismark”, on the disastrous cruise. Neither have I heard of any convincing statement by Mussolini of the reasons why the greatest part of his African Empire has been conquered and so many of his soldiers are prisoners in our hands. I should feel needless disadvantage if I were obliged to give an account of our operations irrespective of whether the time is suitable or not. It would be better if I am permitted on behalf of government to choose the occasion to make statements about the war. In the conduct of the war, what advantages are enjoyed by dictatorial government over democratic government? A The dictatorial government has to explain everything about the conduct of house B All the members of such a government are completely free C Such a government cannot be pressurised to explain the defeat and thus complete secrecy can be maintained D None of these
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Read the following passage carefully and answer the questions that follow: It would be a mistake if the house got into the habit of calling for explanations on varying episodes in this dangerous and widespread war and asked for an account to be given of when any action was lost or any part of the front was beaten in. In the first place no full explanation could possibly be given without revealing valuable information to the enemy. The dictator governments are not under any such pressure to explain or excuse any ill success that may befall on them, unlike these formidable potentates, I am only a servant of the crown and parliament and I am always at the disposal of the house of commons. This house would not wish any servant whom it has entrusted with such duties to be at disadvantage against our antagonists. I have not heard that Hitler had to attend the Reichstage and tell them why he sent the “Bismark”, on the disastrous cruise. Neither have I heard of any convincing statement by Mussolini of the reasons why the greatest part of his African Empire has been conquered and so many of his soldiers are prisoners in our hands. I should feel needless disadvantage if I were obliged to give an account of our operations irrespective of whether the time is suitable or not. It would be better if I am permitted on behalf of government to choose the occasion to make statements about the war. What does the speaker mean by “Formidable potentates” and “our antagonists”? A The enemies of the allied powers and the powerful rulers B The powerful rulers and the enemies of the allied powers. C The completely free person at the top and the opposition in the house D None of these
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 निम्नलिख्ति प्रश्नों में एक स्थिति का वर्णन है, जिसके पश्चात् उसके चार संभव उत्तर दिए गए हैं। जिस उत्तर को आप सर्वाधिक उपयुक्त मानते हैं, उसे अपने उत्तर के रूप में इंगित कीजिए। आप एक ट्रेन पकड़ने के लिए रेलवे स्टेशन पर गये हैं और जैसे ही आप वहाँ पहुँचते हैं तो आपको पता चलता है कि जिस ट्रेन को आप पकड़ना चाहते थे वह ठीक उसी समय स्टेशन छोड़ रही है। आपके गंतव्य के लिए अगली ट्रेन 3 घंटे बाद है। आप टिकट काउंटर पर जाने का प्रयास करते हैं लेकिन यह महसूस करते हैं कि काउंटर पर एक लंबी लाइन लगी है और यदि आप उस लाइन में लगते हैं तो ट्रेन का छूटना तय है। आप- A बिना टिकट ट्रेन में चढ़ जायेंगे और पकड़े जाने पर जुर्माना भरेंगे। B लाइन में खड़े होंगे तथा एक टिकट लेंगे और इस ट्रेन के छूटने की स्थिति में अगली ट्रेन का इंतजार करेंगे। C लाइन में सबसे आगे खड़े व्यक्ति से अपने लिए टिकट खरीदने के लिए कहेंगे और उसे अपनी आपात जरूरत से अवगत करायेंगे। D एक प्लेटफार्म टिकट खरीदेंगे और टीटी से मिलकर उसे यह बतायेंगे कि आप ट्रेन में चढ़ रहे हैं। आप उससे अपनी यात्र को वैध बनाने के लिए आवश्यक यात्र दस्तावेज तैयार करने के लिए कहेंगे।
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 निम्नलिख्ति प्रश्नों में एक स्थिति का वर्णन है, जिसके पश्चात् उसके चार संभव उत्तर दिए गए हैं। जिस उत्तर को आप सर्वाधिक उपयुक्त मानते हैं, उसे अपने उत्तर के रूप में इंगित कीजिए। आप एक जिले के जिलाधिकारी हैं। आपको सूचना मिलती है कि विधवा पेंशन में अनियमितता को लेकर एक स्वयंसेवी संगठन हजारों ग्रामीण महिलाओं के साथ कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर रहा है। आप इस संबंध में क्या करेंगे? A आप प्रभावित लोगों से तत्काल प्रदर्शन रोकने के लिए आग्रह करेंगे। B आप पुलिस कार्यवाही की लोगों को चेतावनी देंगे और प्रदर्शन को रुकवाएंगे। C प्रदर्शनकारियों के समक्ष जाकर आप अनियमितता की जांच का आश्वासन लोगों को देंगे। D आप लोगों की शिकायतों का प्रतिवेदन/प्रार्थनापत्र लेकर अनियमितता की जांच के लिए एक विशेष अधिकारी की नियुक्ति की घोषणा करेंगे।
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 निम्नलिख्ति प्रश्नों में एक स्थिति का वर्णन है, जिसके पश्चात् उसके चार संभव उत्तर दिए गए हैं। जिस उत्तर को आप सर्वाधिक उपयुक्त मानते हैं, उसे अपने उत्तर के रूप में इंगित कीजिए। आप एक तहसील के उपजिलाधिकारी (SDM) हैं। आपके पास सैकड़ों ग्रामीण मनरेगा से संबंधित शिकायतें लेकर आते हैं और बताते हैं कि ग्राम प्रधान, ग्राम विकास अधिकारी और खंड विकास अधिकारी की मिली-भगत से फर्जी जॉब कार्ड बनाकर बैंकों से पैसा निकाल लिया जा रहा है, और विकास के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति हुई है। आपकी प्रतिक्रिया इस स्थिति में क्या होगी? A संबंधित ग्राम प्रधान से वस्तुस्थिति की जानकारी लेंगे तथा फिर अपेक्षित कार्यवाही करेंगे। B लोगों की शिकायतों की स्वयं जांच करेंगें तथा बैंक के अधिकारियों से मिलकर फर्जी जॉब कार्डों के बारे में वस्तुस्थिति की जानकारी देंगे। C खंड विकास अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी के निलंबन की संस्तुति करेंगे। D शिकायत की निष्पक्ष जांच के लिए जिलाधिकारी को लिखेंगे।
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 निम्नलिख्ति प्रश्नों में एक स्थिति का वर्णन है, जिसके पश्चात् उसके चार संभव उत्तर दिए गए हैं। जिस उत्तर को आप सर्वाधिक उपयुक्त मानते हैं, उसे अपने उत्तर के रूप में इंगित कीजिए। आप सुदूर क्षेत्र में एक जलापूर्ति परियोजना स्थापित करने हेतु कार्य कर रहे हैं। किसी भी हालत में परियोजना की पूरी लागत वसूल कर पाना असंभव है। उस क्षेत्र के लोगों का आय-स्तर बहुत नीचा और 25 प्रतिशत जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे हैं। जलापूर्ति की कीमत निर्धारण का निर्णय लेते समय आप क्या करेंगे? A यह अनुशंसा करेंगे कि जलापूर्ति पूरी तरह से निःशुल्क हो। B यह अनुंशसा करेंगे कि सभी प्रयोगकर्ता नल लगाने हेतु एक बार तय एकमुश्त राशि का भुगतान करें और पानी का उपयोग निःशुल्क हो। C यह अनुशंसा करेंगे कि गरीबी रेखा से ऊपर के परिवारों के लिए एक तय मासिक शुल्क लगाया जाए और गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों हेतु जलापूर्ति निःशुल्क हो। D यह अनुशंसा करेंगे कि प्रयोगकर्ता जल के उपभोग पर आधारित शुल्क का भुगतान करें जिसमें गरीबी रेखा से ऊपर तथा नीचे के परिवारों हेतु विभेदीकृत शुल्क निश्चित किया जाए।
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 निम्नलिख्ति प्रश्नों में एक स्थिति का वर्णन है, जिसके पश्चात् उसके चार संभव उत्तर दिए गए हैं। जिस उत्तर को आप सर्वाधिक उपयुक्त मानते हैं, उसे अपने उत्तर के रूप में इंगित कीजिए। आप प्रभारी चिकित्सा अधिकारी हैं और आपको सुदूर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में जीवन रक्षक दवाओं को बाँटने का कार्य सौंपा गया है। आपके पास दवाई की एक अंतिम खुराक बची है और उसके लिए दो दावेदार हैं जिनमें से एक धनवान और प्रभावशाली व्यक्ति है तथा दूसरा एक गरीब ग्रामीण है। आप- A वह खुराक धनी प्रभावशाली व्यक्ति को दे देंगे। B वह खुराक गरीब ग्रामीण को दे देंगे। C दोनों की तात्कालिक जरूरत का मूल्यांकन करेंगे और दवा उस व्यक्ति को देंगे जिसे इसकी अधिक जरूरत है जबकि अन्य लोगों के लिए दवा की अतिरिक्त खुराक मँगाने का प्रयास करेंगे। D दवा की इस खुराक को अपने पास रख लेंगे और दोनों को दवा देने के लिए अतिरिक्त आपूर्ति का इंतजार करेंगे।
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 निम्नलिख्ति प्रश्नों में एक स्थिति का वर्णन है, जिसके पश्चात् उसके चार संभव उत्तर दिए गए हैं। जिस उत्तर को आप सर्वाधिक उपयुक्त मानते हैं, उसे अपने उत्तर के रूप में इंगित कीजिए। आपने यह अवलोकन किया है कि आपका अधीनस्थ आपके आदेशों का पालन नहीं कर रहा है और आपके आदेशों को क्रियान्वित करने में अनावश्यक देरी कर रहा है। उसे समझाने और लगातार परामर्श देने के सारे प्रयास विफल हो चुके हैं। आप- A उसे एक कारण बताओ नोटिस भेजेंगे कि उसके द्वारा जानबूझकर की जा रही आदेशों की अवहेलना के लिए उसके विरुद्ध कोई कार्यवाही क्यों नहीं की जानी चाहिए? B निलम्बन प्रक्रिया शुरू करेंगे C उसे अपने कार्यालय में बुलायेंगे और उसे यह कड़ा संदेश देंगे कि या तो वह आपके आदेशों का पालन करे या फिर कार्यवाही का सामना करने के लिए तैयार रहे D उसे अपने कार्यालय में बुलायेंगे और विचार-विमर्श के द्वारा अवज्ञा के कारणों को खोजेंगे और उसे अपने कार्य निष्पादन में सुधार लाने की सलाह देंगे
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 निम्नलिख्ति प्रश्नों में एक स्थिति का वर्णन है, जिसके पश्चात् उसके चार संभव उत्तर दिए गए हैं। जिस उत्तर को आप सर्वाधिक उपयुक्त मानते हैं, उसे अपने उत्तर के रूप में इंगित कीजिए। जैतपुर में लगाए जा रहे परमाणु संयंत्र को लेकर स्थानीय किसानों एवं आम जनता का विरोध चरम पर है जिसे समाजसेवियों का समर्थन भी मिल रहा है। जापान के फुकुशिमा में परमाणु त्रसदी के बाद इसके विरोधस्वरूप जैतपुर में धरना-प्रदर्शन हो रहे हैं जिसके हिंसक होने की आशंका है। स्थानीय जिलाधिकारी के रूप में इस समस्या से निपटने के लिए आप क्या करेंगे? A सरकार को पत्र लिखकर अनुरोध करेंगे कि प्रस्तावित संयंत्र का निर्माण कार्य रोक दिया जाए अथवा इसका स्थान परिवर्तन किया जाए। B स्थानीय लोगों और समाजसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को कार्यालय में बुलाकर उन्हें विरोध प्रदर्शनों से दूर रहने की हिदायत देंगे। C परियोजना स्थल पर जाकर स्थानीय लोगों से वार्ता करेंगे और उन्हें समझाएंगे कि प्रस्तावित संयंत्र किस प्रकार सुरक्षित और अभीष्ट मानकों के तहत निर्मित किया जाएगा। D विरोध प्रदर्शनों को चलने देंगे तथा उनके हिंसक होने की स्थिति में पुलिस बल को कार्रवाई का आदेश देंगे।
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 निम्नलिख्ति प्रश्नों में एक स्थिति का वर्णन है, जिसके पश्चात् उसके चार संभव उत्तर दिए गए हैं। जिस उत्तर को आप सर्वाधिक उपयुक्त मानते हैं, उसे अपने उत्तर के रूप में इंगित कीजिए। एक अपार्टमेंट ब्लॉक के निवासी स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते आपके पास आये हैं और वे एक शराब की दुकान को हटाने में आपकी सहायता चाहते हैं जो कि अवैधानिक रूप से उनके अपार्टमेंट के निकट स्थापित की गयी है। स्पष्ट रूप से यह एक कानून का उल्लघंन है क्योंकि शराब की दुकान को एक स्थानीय रिहाइश के 100 मीटर की परिधि में नहीं खोला जा सकता। आगे की जाँच पड़ताल में आप यह जानकारी पाते हैं कि दुकान एक प्रभावशाली व्यक्ति की है और इसके खिलाफ कुछ करना स्थानीय शांति पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। आप- A मामले से अपने उच्चाधिकारियों को अवगत करायेंगे और उनसे संबंधित दुकान मालिक के विरुद्ध आपके द्वारा की जाने वाली किसी भी कार्यवाही के लिए समर्थन के लिए कहेंगे B यथास्थिति को बने रहने देंगे- जानबूझकर कानून और व्यवस्था की एक समस्या को पैदा करने का कोई तुक नहीं है C आगे बढ़ेंगे और नियमों को लागू करेंगे- उस स्थान से शराब की दुकान को हटवायेंगे D दुकान मालिक से यह स्पष्ट करने के लिए कहेंगे कि नियमों का उल्लंघन करने की दृष्टि से उसकी दुकान के विरुद्ध कोई कार्यवाही क्यों न की जाये?
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 निम्नलिख्ति प्रश्नों में एक स्थिति का वर्णन है, जिसके पश्चात् उसके चार संभव उत्तर दिए गए हैं। जिस उत्तर को आप सर्वाधिक उपयुक्त मानते हैं, उसे अपने उत्तर के रूप में इंगित कीजिए। आपको एक निगम का सीईओ नियुक्त किया गया है। यह निगम राज्य और केंद्र सरकार के बीच एक संयुक्त उद्यम है। आपके निगम के महत्वपूर्ण ग्राहकों में से एक के द्वारा गुणवत्ता के मुद्दे पर एक विशाल खेप को अस्वीकार कर दिया गया है। मामला आपके समक्ष आया है, आप- A माल की खेप को वापस ले लेंगे तथा उत्पादन प्रक्रिया और गुणवत्ता का पूर्ण परीक्षण करेंगे। B ग्राहक से बात करेंगे और शिकायत के कारणों को जानेंगे तथा उससे बात करके खेप को यदि आवश्यक हो तो घटी दरों पर स्वीकार करने का आग्रह करेंगे C आपके निगम द्वारा अपनायी जाने वाली उत्पादन प्रक्रियाओं के एक पूर्ण गुणवत्ता ऑडिट की शुरूआत करेंगे D B. और C. दोनों